ओवैसी के मन में जागा राष्ट्रप्रेम या फिर नया ड्रामा? पीएम मोदी से कि 26/11 हमलों के मास्टर्माइंड्स को पकड़ने की गुज़ारिश
AIMIM प्रमुख ओवैसी ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की कि 26/11 हमलों के मास्टर्माइंड्स को अमेरिका की तरह पाकिस्तान से पकड़कर भारत लाया जाए। बयान ने राजनीतिक हलचल मचाई और आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम की मांग को उजागर किया।

आसादुद्दीन ओवैसी
आसादुद्दीन ओवैसी, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष, ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के मास्टर्माइंड्स को पाकिस्तान से अमेरिका की तरह पकड़कर भारत लाया जाए। ओवैसी ने इस अपील के दौरान अमेरिका के हालिया कारनामे का उदाहरण देते हुए बताया कि अमेरिकी विशेष बलों ने 3 जनवरी को काराकस में मादुरो को मादक पदार्थों के आरोप में हिरासत में लिया था। इस कार्रवाई की तस्वीरें तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा साझा की गई थीं।
ओवैसी ने अपने बयान में पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के मसूद अजहर और लश्कर-ए-तैयबा के अन्य प्रमुख सदस्यों को विशेष लक्ष्य के रूप में नामित किया। उन्होंने कहा कि ये वही लोग हैं जिनके कारण 26/11 हमले में 166 लोगों की जान गई थी और देश के भीतर भय का माहौल फैल गया था।
ओवैसी की इस अपील ने राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर हलचल पैदा कर दी है। कुछ लोगों ने इसे राष्ट्रवाद की दिशा में साहसिक कदम के रूप में सराहा, जबकि अन्य ने इसे अवसरवादी कदम करार दिया। इस बयान के बाद मोदी कार्यालय से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
भारत-पाकिस्तान सीमा पर आतंकवाद के मुद्दे हमेशा संवेदनशील रहे हैं। भारत ने पहले भी पाकिस्तान स्थित आतंकवादी ठिकानों पर हवाई और सीमापार हमले किए हैं। 26/11 हमले की त्रासदी ने देश को गहराई से झकझोरा था और इसके मास्टर्माइंड्स की गिरफ्तारी लंबे समय से राष्ट्रीय चिंता का विषय रही है। ओवैसी ने अपने बयान में इस पहल को अमेरिका की कार्रवाई से जोड़कर यह संदेश देने की कोशिश की है कि वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कदम उठाना संभव है।
वहीं, कानूनी और अंतरराष्ट्रीय पहलुओं की बात करें तो किसी अन्य देश से किसी व्यक्ति को पकड़कर लाने के लिए भारत को अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र संधियां और द्विपक्षीय समझौतों का पालन करना पड़ता है। अमेरिकी कार्रवाई में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई थी, जिसमें विशेष बलों ने बिना किसी बड़ी कानूनी अड़चन के मादुरो को हिरासत में लिया। भारत के संदर्भ में यह कदम जटिल है, क्योंकि इसमें दोनों देशों के बीच संवेदनशील राजनीतिक और कूटनीतिक संबंध शामिल हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे कदम भारत की सुरक्षा नीति, आतंकवाद विरोधी रणनीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा पर बड़े प्रभाव डाल सकते हैं। 26/11 के आतंकवादी हमलों ने देश के लिए यह स्पष्ट कर दिया कि आतंकवाद केवल सीमा पर ही नहीं, बल्कि देश के भीतर भी गंभीर खतरा है। इसलिए, ऐसे मास्टर्माइंड्स को पकड़ने की मांग को राजनीतिक, सुरक्षा और कानूनी दृष्टिकोण से गहनता से समझना जरूरी है।
ओवैसी का बयान न केवल राजनीतिक चर्चा का विषय बना है, बल्कि यह देश में आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग को भी उजागर करता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां इस अपील पर किस तरह प्रतिक्रिया देती हैं और क्या भारत की सुरक्षा नीति में किसी निर्णायक कार्रवाई की संभावना बनती है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
