प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक इजरायल यात्रा के उस अनसुने संयोग पर विशेष रिपोर्ट, जब उन्होंने साझा किया कि उनकी जन्म तिथि और भारत द्वारा इजरायल को राष्ट्र के रूप में मान्यता देने का दिन एक ही है। जानिए कैसे 17 सितंबर 1950 का वह दिन आज भारत और इजरायल के बीच कूटनीतिक और भावनात्मक संबंधों की सबसे मजबूत कड़ी बन चुका है।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति के गलियारों में कुछ संयोग ऐसे होते हैं जो दो देशों के बीच के रिश्तों को केवल औपचारिक संधियों से ऊपर उठाकर एक भावनात्मक धरातल पर ले आते हैं। ऐसा ही एक ऐतिहासिक और व्यक्तिगत क्षण जुलाई 2017 में तब देखने को मिला, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी ऐतिहासिक यात्रा पर इजरायल की धरती पर उतरे। यह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली इजरायल यात्रा थी, जिसने न केवल कूटनीति के नए प्रतिमान स्थापित किए, बल्कि एक ऐसे सुखद संयोग को भी दुनिया के सामने रखा जिसने दोनों देशों के संबंधों में एक नई आत्मीयता भर दी।

तेल अवीव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ आयोजित एक साझा प्रेस वक्तव्य के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने एक ऐसा तथ्य साझा किया जिसने वहां मौजूद कूटनीतिज्ञों और पत्रकारों को अचंभित कर दिया। पीएम मोदी ने मुस्कराते हुए इस बात को रेखांकित किया कि उनका और भारत-इजरायल के आधिकारिक संबंधों का जन्म एक ही दिन हुआ था। प्रधानमंत्री का जन्म 17 सितंबर, 1950 को हुआ था और ठीक इसी तारीख को भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर इजरायल को एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था।

इस घटनाक्रम के पीछे के ऐतिहासिक तथ्यों का विश्लेषण करें तो यह कूटनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण नजर आता है। यद्यपि भारत ने 17 सितंबर, 1950 को इजरायल को मान्यता प्रदान कर दी थी, लेकिन पूर्ण दूतावास स्तर के राजनयिक संबंधों की स्थापना में चार दशकों का समय लगा और यह लक्ष्य 1992 में प्राप्त हो सका। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी यात्रा के दौरान इस अंतराल के बावजूद उस बुनियादी जुड़ाव को प्राथमिकता दी, जो उनके जन्म के साथ ही शुरू हो गया था। उन्होंने वैश्विक मंच पर यह संदेश दिया कि इजरायल के साथ भारत का जुड़ाव केवल रणनीतिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत और साझा मूल्यों पर आधारित है।

प्रधानमंत्री का यह बयान केवल शब्दों का चयन नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी कूटनीतिक पहल थी। इसके माध्यम से उन्होंने इजरायल के साथ एक अटूट और भावनात्मक सेतु का निर्माण किया। इस संबोधन ने इजरायली नेतृत्व और वहां की जनता को यह विश्वास दिलाया कि भारत अब इस साझेदारी को एक नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है। यह यात्रा और प्रधानमंत्री का यह विशेष उल्लेख आज भी भारत-इजरायल के बीच "विशेष संबंधों" की नींव का एक महत्वपूर्ण पत्थर माना जाता है, जिसने भविष्य के रक्षा, कृषि और तकनीक के क्षेत्रों में सहयोग का मार्ग प्रशस्त किया।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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