सशक्त ग्रामीण सहकारी बैंकिंग: PACS का कंप्यूटरीकरण और डिजिटल क्रांति
PACS का कंप्यूटरीकरण भारत के ग्रामीण सहकारी क्षेत्र में डिजिटल क्रांति का प्रतीक बन गया है। ERP सॉफ्टवेयर और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से वित्तीय समावेशन, पारदर्शिता और सेवा दक्षता में सुधार, किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए नई संभावनाएं खोल रहा है।

भारत का सहकारी आंदोलन लंबे समय से ग्रामीण विकास और समावेशी आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अब यह आंदोलन एक नए युग में प्रवेश कर चुका है, जहां डिजिटल तकनीक और कंप्यूटरीकरण के माध्यम से प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) को सशक्त बनाना केंद्रित नीतिगत उद्देश्य बन गया है। इस परिवर्तन ने न केवल किसानों के लिए सेवाओं की गुणवत्ता और गति बढ़ाई है, बल्कि ग्रामीण वित्तीय प्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता का नया आयाम भी स्थापित किया है।
24 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में देश की सभी कार्यशील PACS के कंप्यूटरीकरण की महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्घाटन किया। इस पहल का उद्देश्य PACS और बड़ी क्षेत्रीय बहुउद्देश्यीय सहकारी समितियों (LAMPS) को NABARD द्वारा विकसित एकीकृत ERP आधारित राष्ट्रीय सॉफ़्टवेयर प्लेटफॉर्म से जोड़ना है। इसके तहत सभी PACS को राज्य सहकारी बैंकों (StCBs) और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs) के साथ वास्तविक समय में एकीकृत किया जाएगा।
इस परियोजना के लिए भारत सरकार ने ₹1,796.28 करोड़, राज्य सरकारों ने ₹877.11 करोड़ और NABARD ने ₹252 करोड़ की वित्तीय सहायता मंजूर की है। पूर्वोत्तर और पर्वतीय राज्यों में अनुकूल फंडिंग पैटर्न लागू किया गया है, जबकि केंद्र शासित प्रदेशों को विधानमंडल की स्थिति के अनुसार पूर्ण या आंशिक वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।
PACS के कंप्यूटरीकरण से पहले, अधिकांश समितियों में रिकॉर्ड प्रबंधन मैन्युअल था, जिससे त्रुटियाँ, देरी और पारदर्शिता की कमी जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती थीं। डिजिटल प्लेटफॉर्म ने इन चुनौतियों को दूर करते हुए न केवल दैनिक लेन-देन और ऋण वितरण को गति दी, बल्कि वित्तीय लेखांकन, ऑडिट और MIS रिपोर्टिंग में भी मजबूती लायी।
परियोजना का कार्यान्वयन पांच चरणों में किया गया: हार्डवेयर डिलीवरी और फील्ड सत्यापन से लेकर डेटा माइग्रेशन, ERP पर ऑनबोर्डिंग, दैनिक प्रविष्टि, और वर्षांत ऑडिट। ePACS सॉफ़्टवेयर अब 22 मॉड्यूल में उपलब्ध है और 11 भारतीय भाषाओं में कार्यरत है, जिससे स्थानीय स्तर पर संचालन और रिपोर्टिंग में सहजता आई है।
राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी तंत्र सुदृढ़ किया गया है। NABARD के केंद्रीय और राज्य PMUs, राज्य सहकारी बैंक और DCCBs मिलकर PACS अधिकारियों को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, परियोजना डैशबोर्ड और नियमित समीक्षा बैठकों के माध्यम से प्रगति पर लगातार निगरानी की जा रही है।
अब तक 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 67,930 PACS के कंप्यूटरीकरण को मंजूरी मिल चुकी है। 60,063 PACS ERP सॉफ़्टवेयर पर ऑनबोर्ड किए जा चुके हैं और 58,118 PACS ने “गो-लाइव” चरण हासिल किया है। इससे ग्रामीण समुदायों को समय पर, किफायती और पारदर्शी वित्तीय सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।
इस पहल की सफलता का प्रमाण महाराष्ट्र की खरसई विविध कार्यकारी सोसायटी और तमिलनाडु के अराकंडनल्लूर PACS जैसे उदाहरणों में देखा जा सकता है। खरसई में ERP प्रणाली ने संचालन दक्षता, डेटा सटीकता और सदस्यों की संतुष्टि में सुधार लाया, जबकि अराकंडनल्लूर PACS ने क्लाउड-आधारित डेटा स्टोरेज के माध्यम से बाढ़ जैसी आपदा के दौरान भी सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित की।
भविष्य की योजना PACS को बहुउद्देशीय इंजन के रूप में विकसित करना, गैर-ऋण गतिविधियों का विस्तार करना, मोबाइल और QR आधारित डिजिटल सेवाएं प्रदान करना और सदस्यों की शिक्षा और जागरूकता बढ़ाना है। इसके साथ ही, PACS, DCCBs और StCBs के बीच एक सहकारी ग्रिड (Co-op Grid) का निर्माण करके ग्रामीण वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना भी प्राथमिक लक्ष्य है।
सारांशतः, PACS का कंप्यूटरीकरण केवल तकनीकी परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण वित्तीय संस्थाओं के समग्र सशक्तिकरण की दिशा में एक रणनीतिक कदम है। यह परियोजना किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए पारदर्शी, तेज़ और विश्वसनीय वित्तीय सेवाओं का मार्ग प्रशस्त करेगी और भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक समृद्धि और डिजिटल दक्षता को नया आयाम देगी।
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Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
