भारत के सहकारी कृषि निर्यात में नई क्रांति, किसानों को प्रशिक्षण और सशक्तिकरण
नेशनल को-ऑपरेटिव एक्सपोर्ट लिमिटेड (NCEL) भारतीय सहकारी और कृषि निर्यात को वैश्विक मानकों पर ले जाकर किसानों की आय बढ़ा रहा है। दो वर्षों में 10,000 से अधिक समितियों की सदस्यता, ₹5,396 करोड़ का टर्नओवर और 13.09 लाख मीट्रिक टन कृषि निर्यात के साथ NCEL ने भारत को कृषि निर्यात में वैश्विक पहचान दिलाई है।

भारत की कृषि क्षेत्र की विशाल क्षमता अब वैश्विक बाजारों में अपनी पहचान बनाने के लिए नए आयाम छू रही है। सीमित बाजार पहुंच, अवसंरचना की कमी और खंडित समन्वय जैसी चुनौतियों को पार करते हुए, नेशनल को-ऑपरेटिव एक्सपोर्ट लिमिटेड (NCEL) ने भारतीय किसानों और सहकारी समितियों के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार का द्वार खोल दिया है। यह संगठन केवल निर्यात बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह भारतीय कृषि सहकारिता के वैश्विक मंच पर सशक्त प्रतिनिधित्व की नींव भी रखता है।
NCEL की स्थापना 25 जनवरी, 2023 को मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी एक्ट, 2002 के तहत की गई थी, और इसे माननीय गृहमंत्री एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह की पहल पर राष्ट्रीय स्तर का बहु-राज्यीय सहकारी संगठन बनाने के उद्देश्य से गठित किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य भारत के सहकारी उत्पादों को वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाने, किसानों की आय में वृद्धि करने और देश को कृषि निर्यात में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करना है।
संस्था का संगठनात्मक ढांचा व्यापक और समावेशी है। NCEL सभी स्तरों की सहकारी समितियों के लिए खुला है, और किसान उत्पादक संगठन (FPOs), किसान उत्पादक कंपनियां (FPCs) तथा स्वयं सहायता समूह (SHGs) भी इसमें नाममात्र सदस्यता के माध्यम से जुड़ सकते हैं। मई 2025 तक 10,346 से अधिक समितियों ने एनसीईएल में सदस्यता के लिए आवेदन किया है, जिनमें से 9,425 को शेयर सर्टिफिकेट जारी किए जा चुके हैं। सदस्यता से किसान भंडारण, पैकेजिंग, प्रमाणन और ब्रांडिंग जैसी मूल्य वर्धित सेवाओं का लाभ उठाते हुए वैश्विक बाजार में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
NCEL को गुजरात कोऑपरेटिव दूध मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF), इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (IFFCO), कृषक भारती कोऑपरेटिव लिमिटेड (KRIBHCO), नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (NAFED) और नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NCDC) जैसे प्रतिष्ठित सहकारी संगठनों द्वारा बढ़ावा दिया जा रहा है। ये सहयोग NCEL को कृषि निर्यात की आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं को दूर करने और किसानों तक लाभ सुनिश्चित करने में समर्थ बनाते हैं।
राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर NCEL ने कई रणनीतिक साझेदारियां स्थापित की हैं। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और गुजरात में नोडल एजेंसियों तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ MoU से निर्यात को बढ़ावा मिला है। सेनेगल गणराज्य और इंडोनेशिया के व्यापारिक साझेदारों के साथ किए गए समझौतों से भारत के कृषि निर्यात के नए द्वार खुले हैं। इसके अलावा, नेपाल के 62 मिलर और व्यापारियों के साथ समझौतों ने गेहूं निर्यात में सहजता और स्थिरता लाई है। NCEL ने इंटरनेशनल कोऑपरेटिव एलायंस के ग्लोबल कोऑपरेटिव कॉन्फ्रेंस में भी भाग लेकर भारतीय सहकारिता को वैश्विक मंच पर सशक्त प्रतिनिधित्व दिलाया है।
इतिहास की दृष्टि से देखा जाए तो भारत में सहकारी आंदोलन 19वीं सदी के अंत में शोषणकारी प्रथाओं के विरुद्ध किसानों और कारीगरों की सामूहिक शक्ति के रूप में उभरा। NCEL इस विरासत को आधुनिक स्वरूप में पेश करता है, किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़कर उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त करता है।
NCEL ने सिर्फ दो वर्षों में अपनी प्रभावशीलता सिद्ध की है। 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 10,346 सहकारी समितियों ने सदस्यता के लिए आवेदन किया और ₹5,396 करोड़ के कुल टर्नओवर तथा 13.09 लाख मीट्रिक टन कृषि उत्पादों का निर्यात किया। चावल, गेहूं, मक्का, प्याज, जीरा और चीनी जैसे उत्पादों के निर्यात में NCEL ने देश को वैश्विक मानकों पर लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
संगठन न केवल निर्यात को सुगम बनाता है, बल्कि किसानों को प्रशिक्षण, गुणवत्ता आश्वासन और वैश्विक मानकों के पालन में भी मार्गदर्शन प्रदान करता है। यह अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कृषि उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और प्रसंस्करण को सुव्यवस्थित करने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाता है। NCEL का लाभ-साझाकरण मॉडल भी समावेशी विकास की परिकल्पना को साकार करता है, जिसमें लाभांश और शुद्ध अधिशेष सीधे किसानों और सहकारी समितियों में वितरित होते हैं।
जैसे-जैसे भारत वैश्विक कृषि व्यापार में अपनी स्थिति मजबूत करता है, NCEL की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यह न केवल भारत के सहकारी क्षेत्र को वैश्विक पहचान दिला रहा है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत और 'सहकार से समृद्धि' के दृष्टिकोण को भी साकार कर रहा है।
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Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
