CBSE की Dual Board Exam Policy के तहत साल में दो बार बोर्ड परीक्षा कराने का प्रस्ताव सामने आया है। इसका उद्देश्य छात्रों पर परीक्षा का दबाव कम करना और उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए दूसरा अवसर देना है। यह नीति राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप मानी जा रही है और शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत देती है।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की Dual Board Exam Policy को लेकर देश की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। इस नई नीति के तहत बोर्ड परीक्षाओं को साल में दो बार आयोजित करने की रूपरेखा पर विचार किया जा रहा है, जिससे छात्रों को एक से अधिक अवसर मिल सकें। यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है, जब छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, परीक्षा दबाव और मूल्यांकन प्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

CBSE से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, Dual Board Exam Policy का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक लचीला और छात्र-केंद्रित बनाना है। इस नीति के तहत कक्षा 10 और कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाएं एक ही शैक्षणिक सत्र में दो चरणों में आयोजित की जा सकती हैं। यदि कोई छात्र पहली परीक्षा में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाता, तो उसे दूसरी परीक्षा में अपने अंकों में सुधार का अवसर मिलेगा।

शिक्षा मंत्रालय और CBSE के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह प्रस्ताव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) की भावना के अनुरूप है, जिसमें रटंत विद्या की बजाय समझ, कौशल और निरंतर मूल्यांकन पर जोर दिया गया है। बोर्ड का मानना है कि एक ही परीक्षा पर भविष्य निर्भर होने से छात्रों पर अत्यधिक मानसिक दबाव पड़ता है, जिसे कम करना समय की आवश्यकता है।

Dual Board Exam Policy के तहत परीक्षा संचालन, मूल्यांकन और परिणाम प्रणाली को लेकर भी व्यापक बदलाव प्रस्तावित हैं। सूत्रों के अनुसार, दोनों परीक्षाओं के पाठ्यक्रम समान रहेंगे और छात्रों के बेहतर प्रदर्शन वाले अंक को अंतिम परिणाम में शामिल किया जा सकता है। इससे छात्रों को अपनी कमजोरियों को पहचानने और सुधार करने का मौका मिलेगा।

हालांकि इस नीति को लागू करना प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है। CBSE को परीक्षा केंद्रों, शिक्षकों, उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन और समय-सारणी के समन्वय के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता होगी। बोर्ड से जुड़े अधिकारियों ने संकेत दिया है कि नीति को अंतिम रूप देने से पहले सभी हितधारकों—राज्य सरकारों, स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों—से परामर्श किया जाएगा।

Dual Board Exam Policy को लेकर शिक्षकों और अभिभावकों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कई शिक्षक संगठनों का कहना है कि यदि यह नीति स्पष्ट दिशा-निर्देशों और मजबूत बुनियादी ढांचे के साथ लागू की जाती है, तो यह छात्रों के लिए लाभकारी हो सकती है। वहीं कुछ अभिभावकों ने आशंका जताई है कि बार-बार परीक्षाएं होने से छात्रों पर पढ़ाई का बोझ बढ़ सकता है।

CBSE की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि फिलहाल यह एक प्रस्तावित नीति है और इसके क्रियान्वयन की समय-सीमा तय नहीं की गई है। बोर्ड का कहना है कि नीति लागू करने से पहले इसके शैक्षणिक, मानसिक और प्रशासनिक प्रभावों का गहन अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि Dual Board Exam Policy को संतुलित और चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया, तो यह भारतीय बोर्ड परीक्षा प्रणाली में एक ऐतिहासिक सुधार साबित हो सकती है। यह नीति छात्रों को केवल अंकों की दौड़ से बाहर निकालकर सीखने की प्रक्रिया को अधिक अर्थपूर्ण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

कुल मिलाकर, CBSE की Dual Board Exam Policy ने शिक्षा जगत में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले समय में यह साफ होगा कि यह प्रस्ताव केवल एक विचार बनकर रह जाता है या वास्तव में भारत की बोर्ड परीक्षा प्रणाली की दिशा और दशा बदलने में सफल होता है।

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