प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 जनवरी, 2026 को सोमनाथ मंदिर की 1,000 साल की अडिगता और पुनर्निर्माण की कहानी साझा की। उन्होंने 11 जनवरी से शुरू होने वाले 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' की घोषणा की, जो मंदिर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय महत्ता को उजागर करेगा।

गुजरात स्थित प्राचीन सोमनाथ मंदिर ने अपनी 1,000वीं वर्षगांठ के अवसर पर भारतीय इतिहास में संघर्ष और पुनर्निर्माण की एक अद्वितीय कहानी पेश की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 जनवरी, 2026 को प्रकाशित अपने ओप-एड में इस मंदिर की शताब्दियों पुरानी यात्रा का विस्तृत विवरण दिया, जिसमें महमूद गजनवी के 1026 ईस्वी के आक्रमण से लेकर आधुनिक भारत के पुनर्निर्माण तक की कहानी शामिल है।

ओप-एड में मोदी ने बताया कि कैसे इस मंदिर ने अनेक आघातों का सामना किया और हर बार पुनर्निर्माण के माध्यम से अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखा। किंग भीमा प्रथम, अहिल्याबाई होलकर जैसे शासकों ने इसे हर बार नष्ट होने के बाद पुनर्निर्मित किया, और स्वतंत्रता के बाद सदार पटेल और राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने इसे राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई।



प्रधानमंत्री ने अपने लेख में विशेष रूप से 1947 का उल्लेख किया, जब सदार पटेल ने मंदिर के खंडहरों में खड़े होकर इसे पुनः स्थापित करने का संकल्प लिया, और 1951 में इसका भव्य उद्घाटन हुआ। इस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने धर्मनिरपेक्षता के दृष्टिकोण से कुछ चिंता व्यक्त की थी, लेकिन मंदिर के पुनर्निर्माण ने भारतीय सांस्कृतिक पुनरुत्थान का मार्ग प्रशस्त किया।

मोदी ने लिखा कि सोमनाथ मंदिर की अडिगता और पुनर्निर्माण की कहानी भारत की शक्ति, सहिष्णुता और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक है। उन्होंने यह भी बताया कि यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि राष्ट्रीय एकता और गौरव का एक जीवंत उदाहरण भी है।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने 11 जनवरी से शुरू होने वाले 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' की भी घोषणा की। इस वर्षभर चलने वाले कार्यक्रमों में धार्मिक अनुष्ठान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और सामाजिक आयोजनों को शामिल किया जाएगा, जो न केवल मंदिर की ऐतिहासिक महत्ता को उजागर करेंगे, बल्कि पूरे देश में राष्ट्रीय और सांस्कृतिक चेतना को भी प्रबल करेंगे।

ओप-एड में मोदी ने स्पष्ट किया कि यह आयोजन केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का प्रतीक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जैसे मंदिर ने सदियों तक आघात सहा और हर बार पुनः उठ खड़ा हुआ, वैसे ही भारत भी हर चुनौती के सामने अपनी पहचान और गौरव बनाए रखता है।

सोमनाथ मंदिर की यह 1,000 वर्षीय यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रमाण है, बल्कि यह देश की संस्कृति, इतिहास और राष्ट्रीय गौरव का जीवंत दर्पण भी है। प्रधानमंत्री मोदी की इस घोषणा और ओप-एड ने पूरे देश में इस ऐतिहासिक स्थल के महत्व और इसके प्रतीकात्मक अर्थ को फिर से जीवित कर दिया है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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