कांग्रेस सांसद रणदीप सुरजेवाला ने भारत-US ट्रेड डील को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस समझौते में भारतीय किसानों, डिजिटल प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा की बलि दी गई है। क्या भारत अब 'आत्मनिर्भर' के बजाय 'अमेरिका निर्भर' बन रहा है? कृषि संकट और टैरिफ कटौती पर विपक्ष के इस बड़े प्रहार की पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

India US Trade Deal 2026 : भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) ने देश की सियासत में एक नया उबाल ला दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस डील को लेकर केंद्र सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत' की रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सुरजेवाला का आरोप है कि इस समझौते की आड़ में मोदी सरकार ने भारतीय किसानों के हितों, ऊर्जा सुरक्षा और देश की डिजिटल आजादी को दांव पर लगा दिया है। उन्होंने तीखा तंज कसते हुए पूछा कि क्या यह वास्तव में एक 'मजबूत सरकार' का फैसला है या फिर भारत की संप्रभुता के साथ किया गया एक समझौता, जो देश को आत्मनिर्भरता से दूर 'अमेरिका निर्भरता' की ओर धकेल रहा है।

कांग्रेस सांसद ने इस सौदे के दूरगामी परिणामों पर चिंता जताते हुए कहा कि यह व्यापार समझौता भारतीय नागरिकों की रोजी-रोटी को तबाह करने की क्षमता रखता है। उनके अनुसार, सरकार ने अमेरिकी प्रोसेस्ड फलों और अन्य अतिरिक्त उत्पादों के लिए घरेलू बाजार के दरवाजे खोलकर स्थानीय उत्पादकों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। उन्होंने विशेष रूप से कपास (Cotton) के आयात का मुद्दा उठाते हुए बताया कि 334 मिलियन डॉलर के मौजूदा आयात ने पहले ही घरेलू कीमतों को गिरा दिया है, जिससे भारतीय किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। सुरजेवाला ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा कि क्या इस समझौते के तहत दूध, गेहूं और डेयरी उत्पादों को भी 'जीरो टैरिफ' या रियायती श्रेणी में शामिल किया गया है।

आर्थिक पहलुओं के साथ-साथ, सुरजेवाला ने राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा गोपनीयता (Data Privacy) के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि डिजिटल फ्रीडम और डेटा प्राइवेसी जैसे संवेदनशील विषयों पर समझौता करके सरकार ने भारतीय हितों की रक्षा करने में विफलता दिखाई है। विपक्ष का तर्क है कि एक सशक्त राष्ट्र को अपनी डिजिटल सीमाओं और नागरिकों के डेटा से समझौता नहीं करना चाहिए था।

इस पूरे घटनाक्रम में एक और चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब सुरजेवाला ने विदेश मंत्रालय की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि जब इस ट्रेड डील के बारे में विदेश मंत्री से प्रश्न पूछे गए, तो उन्होंने इसे अन्य विभागों का मामला बताकर पल्ला झाड़ लिया। सुरजेवाला ने इसे 'जानकारी और समझ की कमी' करार देते हुए कहा कि जब देश के विदेश मंत्री ही इस महत्वपूर्ण अंतरिम समझौते की बारीकियों से अनभिज्ञ हैं, तो जनता की संतुष्टि की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

यह विवाद उस समय पैदा हुआ है जब भारत और अमेरिका ने एक व्यापारिक ढांचे की घोषणा की है, जिसके तहत भारत अमेरिकी औद्योगिक सामानों और सूखे मेवे सहित कई उत्पादों पर टैरिफ कम करने या पूरी तरह खत्म करने पर सहमत हुआ है। अंततः, यह मुद्दा केवल व्यापार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह भारत की भविष्य की आर्थिक स्वायत्तता और घरेलू कृषि बाजार की सुरक्षा पर एक बड़ी बहस का केंद्र बन गया है।

Updated On 16 Feb 2026 7:11 PM IST
Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

Next Story