सबरीमाला स्वर्ण घोटाला मामले में केरल के पूर्व देवस्वम मंत्री कदकमपल्ली सुरेंद्रन से SIT ने की 2 घंटे लंबी पूछताछ। पूर्व बोर्ड सदस्य एन. विजयकुमार के 'सखावा' वाले बयान ने मचाई खलबली, कहा- बड़े नेताओं के दबाव में हुए स्वर्ण चोरी के फैसले। जानें इस हाई-प्रोफाइल भ्रष्टाचार मामले की पूरी सच्चाई और जांच का ताजा अपडेट।

तिरुवनंतपुरम: आस्था के सबसे बड़े केंद्रों में से एक, सबरीमाला मंदिर के स्वर्ण आभूषणों की चोरी और हेराफेरी के मामले ने अब केरल की राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस हाई-प्रोफाइल 'स्वर्ण डकैती' मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अब राज्य के पूर्व देवस्वम मंत्री कदकमपल्ली सुरेंद्रन पर शिकंजा कस दिया है। शनिवार को हुई इस गहन पूछताछ ने सत्ता के गलियारों में हलचल तेज कर दी है, क्योंकि घोटाले की आंच अब सीधे तत्कालीन मंत्रालय तक पहुँच गई है।

दो घंटे की पूछताछ और SIT का शिकंजा

मामले की गंभीरता को देखते हुए, एसपी शशिधरन के नेतृत्व में SIT की टीम ने पूर्व मंत्री कदकमपल्ली सुरेंद्रन से लगभग दो घंटे तक पूछताछ की। यह पूछताछ SIT कार्यालय के बाहर एक गुप्त स्थान पर की गई। जांच दल का मानना है कि जिस समय यह स्वर्ण घोटाला हुआ, उस समय देवस्वम विभाग की पूरी जिम्मेदारी सुरेंद्रन के पास थी। पूछताछ के बाद कदकमपल्ली सुरेंद्रन ने स्वयं इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने जांच दल को उन सभी तथ्यों की जानकारी दे दी है जो उनके संज्ञान में थे। उनके साथ ही पूर्व देवस्वम बोर्ड अध्यक्ष पी.एस. प्रशांत से भी पूछताछ की खबर सामने आई है।

"सब 'सखावा' के कहने पर हुआ": चौंकाने वाला खुलासा

इस मामले में सबसे सनसनीखेज मोड़ तब आया जब गिरफ्तार किए गए देवस्वम बोर्ड के पूर्व सदस्य एन. विजयकुमार ने चौंकाने वाला बयान दिया। विजयकुमार ने अपनी बेगुनाही का दावा करते हुए सारा दोष 'सखावा' (कॉमरेड/वरिष्ठ नेता) पर मढ़ दिया है। विजयकुमार के अनुसार, "मैं पूरी तरह निर्दोष हूँ, मैंने जो कुछ भी किया वह सखावा के आदेश पर किया।" उन्होंने आगे बताया कि बोर्ड में स्वर्ण पट्टियों को बदलने सहित सभी महत्वपूर्ण निर्णय तत्कालीन अध्यक्ष ए. पद्मकुमार द्वारा लिए जाते थे और वह बिना पढ़े ही उन पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर थे।

विजयकुमार का बयान इस मामले में भ्रष्टाचार की गहराई को दर्शाता है। उन्होंने SIT को बताया कि पद पर रहते हुए उन पर इतना मानसिक दबाव बनाया गया था कि उन्होंने आत्महत्या करने तक का विचार कर लिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्य निर्णयों का मसौदा पहले से तैयार होता था और उन्हें केवल औपचारिक मुहर के रूप में इस्तेमाल किया गया।

सबरीमाला जैसे पवित्र स्थान से जुड़ी स्वर्ण चोरी की यह घटना केवल वित्तीय अनियमितता नहीं है, बल्कि करोड़ों भक्तों की आस्था के साथ विश्वासघात भी है। जैसे-जैसे SIT की जांच आगे बढ़ रही है और पूर्व मंत्री व बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों से पूछताछ हो रही है, यह स्पष्ट है कि इस घोटाले के पीछे कोई बड़ी साजिश काम कर रही थी। आने वाले दिनों में SIT की रिपोर्ट केरल की राजनीति और देवस्वम प्रशासन में बड़े बदलाव का कारण बन सकती है।

Updated On 30 Dec 2025 4:43 PM IST
Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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