मणिपुर में बम धमाके ने उजाड़ा हंसता-खेलता परिवार; दो मासूमों की मौत के बाद भड़की जन-आक्रोश की आग
मणिपुर के बिष्णुपुर में बम धमाके में दो मासूम बच्चों की मौत के बाद इम्फाल घाटी में भारी विरोध प्रदर्शन। जानें उग्रवादी हमले और वर्तमान स्थिति की पूरी जानकारी।

मणिपुर के बिष्णुपुर में हुए बम धमाके के विरोध में इम्फाल घाटी की सड़कों पर मशाल जुलूस निकालते स्थानीय लोग और आगजनी की घटनाओं के बीच सुरक्षा की मांग करते प्रदर्शनकारी।
Manipur bomb blast Bishnupur news : मणिपुर की घाटी में जारी जातीय हिंसा के बीच एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। बिष्णुपुर जिले में हुए एक संदिग्ध बम हमले में दो मासूम बच्चों की जान चली गई, जिसके बाद पूरे इम्फाल घाटी में विरोध प्रदर्शनों का सैलाब उमड़ पड़ा है। यह घटना उस समय हुई जब 7 अप्रैल को संदिग्ध यूकेएनए (UKNA) उग्रवादियों ने एक रिहायशी मकान को निशाना बनाते हुए बम फेंका। इस कायराना हमले ने 5 साल के एक मासूम बालक और उसकी महज 6 महीने की छोटी बहन की जीवनलीला समाप्त कर दी, जबकि उनकी मां इस समय अस्पताल में जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं।
इस दुखद खबर के फैलते ही 9 अप्रैल से इम्फाल घाटी के विभिन्न जिलों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। इस बार प्रदर्शनों की तस्वीर पहले से जुदा और अधिक मर्मस्पर्शी थी, क्योंकि अपने हमउम्र दोस्तों को खोने के बाद बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे भी सड़कों पर उतर आए। छोटे-छोटे हाथों में तख्तियां लिए ये बच्चे अपने मारे गए साथियों के लिए न्याय मांग रहे थे। शाम ढलते ही घाटी 'मशाल रैलियों' की रोशनी से नहा उठी, जिसमें हजारों की संख्या में लोगों ने उग्रवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और राजमार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। गुरुवार रात को सिंगजामेई इलाके में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया, जब प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच तीखी झड़पें हुईं। बेकाबू भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाबलों को आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल करना पड़ा।
प्रशासनिक और कानूनी मोर्चे पर सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। संवेदनशील इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया है और अफवाहों को रोकने के लिए इंटरनेट ब्लैकआउट की अवधि बढ़ा दी गई है। मई 2023 से शुरू हुए इस जातीय संघर्ष में अब तक 2,000 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। पुलिस ने इस ताजा हमले के सिलसिले में कई गिरफ्तारियां की हैं और संदिग्ध उग्रवादी ठिकानों पर छापेमारी जारी है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, हालांकि स्थानीय जनता में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गहरा असंतोष देखा जा रहा है।
Dear World,
— Licypriya Kangujam (@LicypriyaK) April 16, 2026
This is Manipur Now at 11 pm IST. No Justice, No Rest. 😢🙏#HappeningNow pic.twitter.com/nijbLYmOCY
मणिपुर की यह त्रासदी केवल दो मासूम बच्चों की मौत नहीं, बल्कि उस गहरे जख्म का प्रतीक है जो बीते कई महीनों से इस राज्य की रगों में बह रहा है। जब तक निर्दोषों का खून गिरना बंद नहीं होता, तब तक शांति की कोई भी अपील अधूरी है। आज मणिपुर की सड़कों पर उतरा यह जन-आक्रोश केवल न्याय की मांग नहीं है, बल्कि एक शांतिपूर्ण भविष्य की पुकार है, जहां कम से कम मासूम बच्चों को अपनी जान न गंवानी पड़े।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
