1 मार्च 2026 को नागपुर के धमनगांव स्थित बारूद फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में 15 मजदूरों की मौत और 18 गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रारंभिक जांच में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और पैकेजिंग के दौरान चिंगारी से चेन रिएक्शन की आशंका जताई गई है। सरकार ने मुआवजे और उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं

1 मार्च 2026 की सुबह नागपुर के धमनगांव क्षेत्र में स्थित एक विस्फोटक फैक्ट्री में ऐसा धमाका हुआ, जिसने देखते ही देखते पूरी यूनिट को मलबे में बदल दिया। शिफ्ट बदलने के समय हुआ यह विस्फोट इतना भीषण था कि आसपास के इलाकों में दहशत फैल गई और कई किलोमीटर दूर तक धमाके की गूंज सुनाई दी। इस हादसे ने अब तक 15 श्रमिकों की जान ले ली है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं।

यह दुर्घटना नागपुर जिले की हिंगना तहसील के धमनगांव इलाके में स्थित एक बारूद निर्माण इकाई में हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह का समय था और फैक्ट्री में कामकाज सामान्य रूप से चल रहा था। तभी अचानक एक तेज धमाका हुआ, जिसके बाद कुछ ही सेकंड में एक के बाद एक कई विस्फोटों की आवाजें आने लगीं। बताया जा रहा है कि उस समय बड़ी संख्या में मजदूर फैक्ट्री परिसर के भीतर मौजूद थे।

प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि विस्फोट बारूद की पैकेजिंग या हैंडलिंग के दौरान हुआ। आशंका है कि घर्षण या किसी तकनीकी चूक के कारण एक चिंगारी उठी, जिसने वहां रखे विस्फोटक पदार्थ को अपनी चपेट में ले लिया। चूंकि परिसर में बड़ी मात्रा में बारूद जमा था, एक छोटे धमाके ने चेन रिएक्शन का रूप ले लिया और पूरी यूनिट में क्रमिक विस्फोट शुरू हो गए। धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि फैक्ट्री की छत उड़ गई और इमारत के हिस्से दूर तक बिखर गए।

हादसे के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन, पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। बचाव अभियान में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) को भी लगाया गया। मलबे के नीचे फंसे श्रमिकों को निकालने के लिए घंटों तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलता रहा। प्रशासन ने पुष्टि की है कि अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है क्योंकि कुछ मजदूरों के अब भी मलबे में दबे होने की संभावना है।

करीब 18 घायल श्रमिकों को नागपुर के सरकारी मेडिकल अस्पताल और निजी चिकित्सा केंद्रों में भर्ती कराया गया है। चिकित्सकों के अनुसार, कई घायलों की हालत गंभीर है और वे 80 प्रतिशत से अधिक झुलस चुके हैं। अस्पतालों में आपातकालीन व्यवस्था लागू कर दी गई है और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम लगातार निगरानी कर रही है।

इस घटना ने औद्योगिक सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक रिपोर्टों में संकेत मिले हैं कि फैक्ट्री में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन नहीं किया जा रहा था। यह भी जांच का विषय है कि क्या परिसर में क्षमता से अधिक विस्फोटक सामग्री संग्रहित की गई थी। प्रशासन ने फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है, जिसमें यह भी देखा जा रहा है कि इकाई के पास वैध लाइसेंस और फायर सेफ्टी क्लीयरेंस उपलब्ध थे या नहीं।

महाराष्ट्र सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे की घोषणा की है और उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी प्रकार की लापरवाही या नियमों की अनदेखी पाई जाती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

नागपुर की यह औद्योगिक त्रासदी न केवल कई परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति का कारण बनी है, बल्कि इसने औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, यह स्पष्ट होगा कि यह हादसा महज एक तकनीकी चूक का परिणाम था या फिर व्यवस्थागत लापरवाही की एक बड़ी कड़ी। फिलहाल धमनगांव की उस फैक्ट्री के मलबे के बीच से उठता धुआं इस बात की गवाही दे रहा है कि एक सुबह ने कई जिंदगियों की दिशा हमेशा के लिए बदल दी।

Updated On 1 March 2026 1:30 PM IST
Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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