सोना और चांदी की कीमतों में 30 जनवरी 2026 को आई ऐतिहासिक गिरावट की पूरी रिपोर्ट। जानें क्यों चांदी में लगा 15% का लोअर सर्किट और क्या केविन वॉर्श की नियुक्ति व ट्रंप की नीतियां हैं इस 'महाक्रैश' की असली वजह। क्या यह निवेश का सही समय है? पढ़ें पेशेवर विश्लेषण।

मुंबई। वैश्विक और घरेलू सराफा बाजारों में आज एक ऐसा भूकंप आया जिसने निवेशकों की रातों की नींद उड़ा दी है। शुक्रवार, 30 जनवरी 2026 का दिन बुलियन मार्केट के इतिहास में 'महागिरावट' के अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमतों में 15% का भीषण लोअर सर्किट लगा, जिससे भाव अपने ₹4.20 लाख के शिखर से सीधे गोता लगाकर ₹3.40 लाख के स्तर पर आ गिरे। सोने की चमक भी इस बिकवाली के दबाव में फीकी रही और यह लगभग 9% की गिरावट के साथ ₹1.83 लाख से लुढ़ककर ₹1.54 लाख प्रति 10 ग्राम के दायरे में सिमट गया।

बाजार में मची इस खलबली के पीछे अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और घरेलू समीकरणों का एक जटिल ताना-बाना काम कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इस मंदी का सबसे प्राथमिक कारण 'मुनाफावसूली' (Profit Booking) है। पिछले कुछ हफ्तों से सोने-चांदी की कीमतें किसी रॉकेट की तरह ऊपर भाग रही थीं। चांदी ने महज आठ दिनों में 3 लाख से 4 लाख का सफर तय किया था, जिसे देख बड़े निवेशकों और हेज फंड्स ने ऊंचे स्तरों पर अपनी पोजीशन खाली करना ही बेहतर समझा। इस भारी बिकवाली ने बाजार में आपूर्ति का दबाव इतना बढ़ा दिया कि खरीदार पीछे हट गए और कीमतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं।

वैश्विक मोर्चे पर अमेरिकी राजनीति और आर्थिक नीतियों ने भी इस गिरावट में घी का काम किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा फेडरल रिजर्व के अगले चेयरमैन के रूप में केविन वॉर्श (Kevin Warsh) के नाम की चर्चा ने डॉलर को नई मजबूती दी है। वॉर्श को महंगाई के प्रति बेहद कड़ा रुख रखने वाला (Hawkish) माना जाता है। उनकी संभावित नियुक्ति के संकेतों ने ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है, जिससे डॉलर इंडेक्स में उछाल आया। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं का कारोबार डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर के मजबूत होने से अन्य मुद्राओं के लिए सोना खरीदना महंगा हो गया, जिसका सीधा असर मांग और कीमतों पर पड़ा।

इसके अतिरिक्त, राष्ट्रपति ट्रंप के हालिया 'टैरिफ' वाले बयानों और तेल निर्यातक देशों के प्रति उनके कड़े रुख ने बाजार में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। निवेशक इस समय 'सेफ हेवन' यानी सुरक्षित निवेश के बजाय नकदी बचाने या जोखिम भरी संपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह भी है कि कीमती धातुओं से निकल रहा पैसा अब डिजिटल एसेट्स और इक्विटी की ओर प्रवाहित हो रहा है, जिसके चलते गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ (ETFs) में भी 14% तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

भले ही वर्तमान में बाजार डरा हुआ नजर आ रहा है, लेकिन विशेषज्ञ इसे एक स्वस्थ 'मार्केट करेक्शन' के रूप में देख रहे हैं। भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर पश्चिम एशिया और यूक्रेन संकट, अब भी पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं, जो भविष्य में सोने को फिर से सहारा दे सकते हैं। साथ ही, भारत में शादियों का सीजन शुरू होने वाला है, जो भौतिक सोने की मांग को दोबारा गति देगा। फिलहाल के लिए, यह गिरावट उन निवेशकों के लिए एक स्वर्णिम अवसर हो सकती है जो लंबे समय से सही एंट्री पॉइंट का इंतजार कर रहे थे। आज की इस उथल-पुथल ने स्पष्ट कर दिया है कि 2026 में बुलियन मार्केट की दिशा अब पूरी तरह से वैश्विक आर्थिक नीतियों और केंद्रीय बैंकों के अगले कदम पर टिकी है।

Updated On 30 Jan 2026 4:53 PM IST
Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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