कृषि बाज़ार रिपोर्ट 2026: देश की मंडियों में अनाज और तिलहन की कीमतों में भारी उछाल। गेहूं, ज्वार और बाज़रा के दाम MSP के मुकाबले रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचे। ज्वार ₹5,900 और सरसों ₹8,000 प्रति क्विंटल के पार। जानें 04 से 06 फरवरी के बीच फसलों की आवक और बाज़ार भाव का पूरा विश्लेषण। ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत।

Government MSP vs Open Market Price 2026, Daily Mandi arrival of Cereals and Oilseeds : भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए साल 2026-27 का विपणन सत्र नई उम्मीदें लेकर आया है। फरवरी माह के शुरुआती आंकड़ों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश की प्रमुख मंडियों में अनाज और तिलहन की कीमतें सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को पार कर गई हैं। बाज़ार में फसलों की कम आवक और बढ़ती वैश्विक मांग के बीच किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

प्रमुख फसलों का बाज़ार विश्लेषण : कीमतों में भारी अंतर

हालिया व्यापारिक सत्रों (04 फरवरी से 06 फरवरी, 2026) के दौरान मंडियों में अनाज और तिलहन की कीमतों में खासी तेजी देखी गई है। सरकार द्वारा तय किए गए समर्थन मूल्य और वास्तविक बाज़ार भाव के बीच का अंतर कृषि व्यापार के बदलते रुख को दर्शा रहा है।

  • मोटा अनाज (Cereals) : बाज़रा, जिसका MSP ₹2,775 प्रति क्विंटल तय किया गया है, बाज़ार में ₹3,800 के स्तर को छू रहा है। वहीं, ज्वार की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया है; ₹3,699 के MSP के मुकाबले ज्वार ₹5,917 प्रति क्विंटल तक के ऊंचे भाव पर बिक रहा है।
  • गेहूं और धान : गेहूं की बाज़ार कीमत ₹3,500 के पार बनी हुई है, जो ₹2,425 के MSP से काफी अधिक है। धान (सामान्य) की कीमतें भी ₹2,800 प्रति क्विंटल के आसपास स्थिर हैं।
  • तिलहन और रेशेदार फसलें (Oil Seeds & Fibre) : सरसों की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद यह ₹8,000 प्रति क्विंटल के करीब कारोबार कर रही है। कपास (Cotton) की कीमतें भी ₹7,900 के स्तर को पार कर MSP (₹7,710) के ऊपर बनी हुई हैं।

मंडियों में आवक की स्थिति :

आंकड़ों के अनुसार, गेहूं और कपास की आवक सबसे अधिक दर्ज की गई है। 06 फरवरी को गेहूं की आवक 1,173.70 मीट्रिक टन रही, जबकि कपास की आवक 902.30 मीट्रिक टन दर्ज की गई। मूंगफली और रागी जैसी फसलों की आवक फिलहाल कम बनी हुई है, जिससे इनकी कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है।

आर्थिक और सरकारी परिप्रेक्ष्य :

विशेषज्ञों का मानना है कि MSP से ऊपर बाज़ार भाव का होना इस बात का प्रमाण है कि बाज़ार में मांग और आपूर्ति का संतुलन किसानों के पक्ष में झुक रहा है। हालांकि, सरकार की ओर से रबी और खरीफ फसलों के लिए घोषित 2026-27 के समर्थन मूल्य किसानों को एक सुरक्षा कवच प्रदान करते हैं, लेकिन वर्तमान बाज़ार रुझान किसानों को खुले बाज़ार में व्यापार करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।

Updated On 6 Feb 2026 6:49 PM IST
Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

Next Story