लातूर में कुदरत का कहर: बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से रबी की फसलें तबाह, किसानों के अरमानों पर फिरा पानी
लातूर जिले में भीषण बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने रबी की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। रेणापुर, चाकूर और अहमदपुर के पोहेगांव, अंधोरी और किनगांव क्षेत्रों में ओलों के कारण गेहूं, ज्वार और आम की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। संकट में घिरे किसानों ने सरकार से तत्काल पंचनामा और मुआवजे की मांग की है। जानिए इस प्राकृतिक आपदा का कृषि क्षेत्र पर प्रभाव।

लातूर | समाचार सेवा
महाराष्ट्र के लातूर जिले में सोमवार की दोपहर कुदरत ने ऐसा तांडव मचाया कि देखते ही देखते किसानों की महीनों की मेहनत मिट्टी में मिल गई। आसमान से बरसीं आफत की गालियों (ओलों) और तूफानी बारिश ने जिले के कई तालुकों में रबी की फसलों को पूरी तरह जमीनदोस्त कर दिया है। विशेष रूप से रेणापुर के पोहेगांव और ताडापुर, चाकूर के शिवणखेड बुद्रुक और अहमदपुर के अंधोरी-किनगांव क्षेत्र में प्रकृति के इस प्रहार ने हाहाकार मचा दिया है। कटाई की कगार पर खड़ी फसलें पल भर में बर्बाद हो गईं, जिससे अन्नदाता की आंखों के सामने अंधेरा छा गया है।
सोमवार दोपहर करीब तीन बजे मौसम ने अचानक करवट ली और देखते ही देखते तेज हवाओं के साथ भीषण ओलावृष्टि शुरू हो गई। ओलों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कुछ ही मिनटों में खेतों पर बर्फ की सफेद चादर बिछ गई। यह मंजर जितना देखने में विस्मयकारी था, किसानों के लिए उतना ही डरावना साबित हुआ। भारी ओलावृष्टि के कारण गेहूं, ज्वार और चने की खड़ी फसलें पूरी तरह झुक गईं और खेतों में बिछ गईं। गेहूं की बालियां टूटकर बिखर गईं, जबकि चने के पौधों से फलियां झड़ गईं, जिससे पैदावार में भारी गिरावट की आशंका प्रबल हो गई है।
फसलों के साथ-साथ फलों के राजा आम पर भी कुदरत की मार पड़ी है। रेणापुर और चाकूर क्षेत्र में स्थित आम के बागों को इस बेमौसम आपदा ने गहरा जख्म दिया है। तेज आंधी और ओलों की वजह से आम का बौर और छोटे फल (कैरी) बड़े पैमाने पर झड़ गए हैं। बागवानों का कहना है कि पहले से ही मौसम की अनिश्चितता झेल रहे इस क्षेत्र के लिए यह आर्थिक चोट असहनीय है। रविवार की रात से शुरू हुआ यह सिलसिला सोमवार दोपहर तक विनाशकारी रूप ले चुका था, जिससे अंधोरी और किनगांव जैसे इलाकों में खेतों में पानी भर गया है। जलजमाव और नमी के कारण अब फसलों में फफूंद और रोगों के फैलने का खतरा भी बढ़ गया है।
इस आपदा के बाद अब प्रभावित क्षेत्रों के किसानों ने सरकार और प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। खेतों में बिछी फसलों को देखकर किसानों का धैर्य जवाब दे रहा है। स्थानीय कृषकों ने मांग की है कि राजस्व और कृषि विभाग की टीमें बिना किसी देरी के खेतों का पंचनामा करें और नुकसान का सटीक आकलन कर तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान करें। हालांकि प्रशासन की ओर से प्राथमिक सर्वेक्षण की सुगबुगाहट शुरू हो गई है, लेकिन किसानों की मांग है कि कागजी कार्रवाई के बजाय धरातल पर जल्द से जल्द मदद पहुंचाई जाए ताकि वे इस भीषण संकट से उबर सकें।

Pratahkal Newsroom
प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
