लातूर में कुदरत का कहर: ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश ने मचाया तांडव, बिजली गिरने से किसान की मौत
महाराष्ट्र के लातूर जिले में भीषण ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश ने भारी तबाही मचाई है। उदगीर में बिजली गिरने से एक किसान की मौत हो गई, जबकि रेणापूर और अहमदपुर में गेहूं व चने की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। पालकमंत्री शिवेंद्रसिंहराजे भोसले ने प्रशासन को तत्काल पंचनामा कर प्रभावितों को राहत पहुंचाने के आदेश दिए हैं। जानिए इस प्राकृतिक आपदा से जुड़ी पूरी रिपोर्ट।

लातूर: महाराष्ट्र के लातूर जिले में सोमवार को प्रकृति ने अपना रौद्र रूप दिखाया, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। जिले के विभिन्न हिस्सों में अचानक हुई भारी ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश ने न केवल लहलहाती फसलों को जमींदोज कर दिया, बल्कि एक परिवार का सहारा भी छीन लिया। उदगीर तहसील के वायगाव में खेत में काम कर रहे 60 वर्षीय किसान दिगंबर राम बेलकुंडे पर मौत बनकर बिजली गिरी, जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मृत्यु हो गई। इस हृदयविदारक घटना से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है और किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं।
जिले के रेणापूर, अहमदपुर और आसपास के अन्य तालुकों में स्थिति और भी विकट नजर आ रही है। तेज हवाओं के साथ गिरे ओलों ने गेहूं, चना और ज्वार जैसी प्रमुख फसलों को भारी नुकसान पहुँचाया है। खेतों में बिछी कटी हुई फसलें और टूटे हुए पेड़ों के मंजर किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फिरने की गवाही दे रहे हैं। सिर्फ फसलें ही नहीं, बल्कि कई गांवों में तूफानी हवाओं के कारण कच्चे मकानों और टीन की छतों वाले घरों को भी काफी क्षति पहुँची है, जिससे कई परिवार बेघर होने की कगार पर पहुँच गए हैं।
इस प्राकृतिक आपदा की गंभीरता को देखते हुए जिले के पालकमंत्री शिवेंद्रसिंहराजे भोसले ने तत्काल मोर्चा संभाला है। उन्होंने जिलाधिकारी वर्षा ठाकुर-घुगे और निवासी उपजिल्हाधिकारी केशव नेटके से फोन पर विस्तृत चर्चा की और जमीनी हालात का जायजा लिया। पालकमंत्री ने प्रशासन को कड़े निर्देश दिए हैं कि प्रभावित क्षेत्रों में बिना किसी देरी के 'पंचनामा' (नुकसान का आकलन) शुरू किया जाए, ताकि पीड़ितों को सरकारी सहायता समय पर मिल सके। उन्होंने विशेष रूप से उन परिवारों को तत्काल राहत प्रदान करने पर जोर दिया है जिनके घर इस आपदा में क्षतिग्रस्त हुए हैं।
वर्तमान में जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क मोड पर है। जिलाधिकारी वर्षा ठाकुर-घुगे ने स्पष्ट किया है कि सर्वे की प्रक्रिया युद्धस्तर पर शुरू कर दी गई है और जल्द ही विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी जाएगी ताकि मुआवजा वितरण की प्रक्रिया को गति मिल सके। मौसम विभाग द्वारा आगामी कुछ दिनों तक इसी तरह के खराब मौसम की चेतावनी दिए जाने के बाद प्रशासन ने नागरिकों से सावधानी बरतने की अपील की है। विशेष रूप से बिजली कड़कने और तेज हवाओं के दौरान खुले स्थानों पर न जाने की सलाह दी गई है। यह आपदा एक बार फिर कृषि क्षेत्र की अनिश्चितता और जलवायु परिवर्तन के गंभीर खतरों को रेखांकित करती है, जिसने लातूर के अन्नदाताओं को संकट के गहरे भंवर में धकेल दिया है।

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