राजुरा में आयोजित 43वें राज्यस्तरीय मराठी विषय शिक्षक कृतिसत्र में उमड़ा जनसैलाब। नगराध्यक्ष अरुण धोटे ने मराठी भाषा संवर्धन के लिए सामूहिक कार्य का आह्वान किया। भव्य ग्रंथ दिंडी, वृक्षारोपण और साहित्यिक चर्चाओं के साथ संपन्न हुए इस दो दिवसीय आयोजन में महाराष्ट्र भर के शिक्षकों ने शिरकत की। पढ़िए इस भव्य आयोजन की विस्तृत रिपोर्ट।

राजुरा। महाराष्ट्र की मिट्टी और मराठी भाषा के गौरव को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के संकल्प के साथ राजुरा की पावन धरती पर 43वें राज्यस्तरीय मराठी विषय शिक्षक वार्षिक कृतिसत्र का भव्य आगाज हुआ। महाराष्ट्र मराठी माध्यमिक शिक्षक संघ (राज्य एवं तालुका राजुरा) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस दो दिवसीय बौद्धिक समागम ने न केवल शिक्षा जगत का ध्यान आकर्षित किया, बल्कि मराठी भाषा के संवर्धन के लिए एक नई दिशा भी तय की। महात्मा ज्योतिबा फुले विद्यालय एवं कनिष्ठ महाविद्यालय के प्रांगण में 17 और 18 जनवरी 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में पूरे महाराष्ट्र से जुटे भाषा के उपासकों ने भाषा, साहित्य और पर्यावरण के संरक्षण की सामूहिक शपथ ली।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रकृति और ज्ञान के अनूठे संगम के साथ हुआ। आयोजन स्थल पर मान्यवरों के हाथों वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया, जिसमें आदर्श मराठी प्राथमिक विद्यामंदिर और आदर्श हाईस्कूल राजुरा के 'राष्ट्रीय हरित सेना' व 'इको क्लब' के विद्यार्थियों ने हाथों में जनजागृति वाले फलक लेकर सबका ध्यान खींचा। इसके पश्चात निकली भव्य 'ग्रंथ दिंडी' आकर्षण का केंद्र रही। महात्मा ज्योतिबा फुले विद्यालय के बैंड पथक और लेझिम पथक की थाप पर निकली इस दिंडी में ग्रामगीता, भारतीय संविधान, विभिन्न कालजयी उपन्यास और 'आपला महाराष्ट्र मराठी अध्यापक' त्रैमासिक जैसे ग्रंथों को पालकी में रखकर नगर भ्रमण कराया गया।

उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राजुरा नगर परिषद के नगराध्यक्ष अरुण धोटे ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा कि मराठी भाषा को 'अभिजात भाषा' का दर्जा मिलना गौरव की बात है, लेकिन अब यह प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वे मराठी में व्यवहार करें और इसके संवर्धन हेतु सामूहिक प्रयास करें। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाराष्ट्र मराठी माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष घनश्याम पटले ने की, जिन्होंने शिक्षकों से भाषाई कौशल विकसित करने और संघ के आगामी उपक्रमों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। स्वागत अध्यक्ष के रूप में ग्रामीण सहकार शिक्षण प्रसारक मंडल चंद्रपुर के अध्यक्ष एडवोकेट जयंतराव साळवे ने गद्य, पद्य, कविता और उपन्यासों के माध्यम से मराठी की समृद्ध साहित्यिक विरासत पर प्रकाश डाला।

इस गरिमामयी अवसर पर मंच पर विशिष्ट अतिथि के रूप में कृतिसत्र की अध्यक्षा रजनी शर्मा (सह-संपादक), मार्गदर्शक विजयकुमार लांडगे (सतारा), राज्य कार्यवाह दुधराम राउत (गोंदिया), कार्यकारी अध्यक्ष भरत गावडे (सिंधुदुर्ग), डॉ. मंजुषा सावरकर (पुणे), आंतरिक लेखा परीक्षक पुरुषोत्तम गोंधले (भंडारा), संपादक योगेशकुमार राहांगडाले (गोंदिया) और डॉ. किशोर कवठे (राजुरा) उपस्थित थे। विजयकुमार लांडगे ने संघ के गौरवशाली इतिहास और कार्यप्रणाली से सभी को अवगत कराया। इस दौरान 'आपला महाराष्ट्र मराठी अध्यापक' के विशेष त्रैमासिक अंक का विमोचन भी गणमान्य व्यक्तियों के हाथों संपन्न हुआ।

दो दिनों तक चले इस ज्ञानयज्ञ में सतारा, सिंधुदुर्ग, गोंदिया, पुणे, भंडारा, गढ़चिरौली, वर्धा और चंद्रपुर सहित राज्य के कोने-कोने से बड़ी संख्या में मराठी शिक्षकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का सफल संचालन सह-कार्यवाह मोहनदास मेश्राम ने किया, जबकि प्रस्तावना तालुका अध्यक्ष राजू डाहुले ने रखी। अंत में राज्य कार्यवाह दुधराम राउत ने आभार प्रदर्शन किया। राजुरा तालुका आयोजकों के अथक परिश्रम से संपन्न हुआ यह कृतिसत्र आने वाले समय में मराठी भाषा के शैक्षणिक और सांस्कृतिक विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

Pratahkal Bureau

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