पूर्व सांसद और कुलपति डॉ. वाघमारे ने शिक्षा क्षेत्र में 'लातूर पैटर्न' की नींव रखी थी, कल पैतृक गांव कवठा में होगा उनका अंतिम संस्कार।

लातूर: लातूर पैटर्न के जनक, शिक्षा क्षेत्र के महान विचारक और वरिष्ठ मार्गदर्शक डॉ. जे. एम. वाघमारे का आज सुबह 8.30 बजे 91 वर्ष की आयु में दुखद निधन हो गया। उनके जाने से लातूर जिले सहित संपूर्ण महाराष्ट्र के शैक्षणिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। डॉ. वाघमारे ने अपनी दूरदृष्टि, परिश्रम और शैक्षणिक प्रतिबद्धता के बल पर 'लातूर पैटर्न' की अवधारणा को रोपित किया और उसे सफलतापूर्वक देश भर में पहुँचाया। हजारों विद्यार्थियों के जीवन को दिशा देने वाले वे सही अर्थों में शिक्षण महर्षि थे।

बहुआयामी व्यक्तित्व और नेतृत्व

वे पूर्व सांसद, पूर्व कुलपति, पूर्व प्राचार्य और पूर्व नगर अध्यक्ष के रूप में भी कार्यरत थे। प्रत्येक पद पर उन्होंने ईमानदारी और लगन से काम करते हुए समाज जीवन को समृद्ध किया। सादगी, अनुशासन, अध्ययनशील वृत्ति और समाज हित की भावना उनके व्यक्तित्व की विशेषताएं थीं।

शिक्षा के माध्यम से समाज परिवर्तन का ध्यास

शिक्षा के माध्यम से समाज परिवर्तन लाने का उनका ध्यास अंत तक कायम था। उनके मार्गदर्शन में तैयार हुई अनेक पीढ़ियाँ आज विभिन्न क्षेत्रों में सफलतापूर्वक कार्यरत हैं। उनके निधन से एक प्रेरणादायी युग के अंत होने की भावना व्यक्त की जा रही है। उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव कवठा, तहसील औसा, जिला लातूर में कल सुबह 11.00 बजे किया जाएगा।

Pratahkal Bureau

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