लातूर मनपा चुनाव: सियासी घमासान के बीच विधायक संभाजी पाटिल ने अमित देशमुख को दी खुले मंच पर बहस की चुनौती
लातूर महानगरपालिका चुनाव से पहले सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। विधायक संभाजी पाटिल ने विधायक अमित देशमुख को विकास के मुद्दों पर एक ही मंच पर खुली चर्चा की कड़ी चुनौती दी है। भ्रष्टाचार और बुनियादी सुविधाओं के अभाव का आरोप लगाते हुए पाटिल ने सीधे सवाल पूछे हैं। जानें क्या है लातूर की राजनीति का पूरा घटनाक्रम और इस चुनौती का चुनाव पर क्या होगा असर।

महाराष्ट्र के लातूर में आगामी महानगरपालिका चुनाव की दस्तक के साथ ही सियासी पारा अपने चरम पर पहुँच गया है। शहर की राजनीति में उस वक्त एक नया मोड़ आ गया जब विधायक संभाजी पाटिल ने पूर्व मंत्री और विधायक अमित देशमुख के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए उन्हें खुले मंच पर चर्चा करने की सीधी चुनौती दे डाली। शनिवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संभाजी पाटिल के तीखे तेवरों ने जिले की राजनीति में खलबली मचा दी है।
संभाजी पाटिल ने सत्ताधारी गुट पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि लातूर की जनता अब केवल खोखले आश्वासनों से संतुष्ट होने वाली नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि अमित देशमुख को अपने कार्यकाल और पिछले कई वर्षों के विकास कार्यों पर अटूट विश्वास है, तो उन्हें भागने के बजाय जनता के सामने आकर दूध का दूध और पानी का पानी करना चाहिए। पाटिल ने मांग की कि विकास के दावों की सच्चाई जानने के लिए दोनों नेताओं को एक ही मंच पर बैठकर आम जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए।
विधायक पाटिल ने शहर की बदहाली का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि लातूर के नागरिक आज भी सड़क, शुद्ध पेयजल, स्वच्छता और घरकुल जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने नगर निगम के कामकाज में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सत्ता के अहंकार में जनता के हितों की अनदेखी की गई है। पाटिल के अनुसार, अब वह समय आ गया है जब सत्ताधारियों को अपने हिसाब-किताब का जवाब देना होगा।
संभाजी पाटिल की इस खुली चुनौती के बाद अब सबकी निगाहें विधायक अमित देशमुख की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह चर्चा हकीकत में तब्दील होती है, तो यह लातूर के चुनावी इतिहास का एक निर्णायक मोड़ साबित होगी। फिलहाल, लातूर की गलियों से लेकर सोशल मीडिया तक केवल एक ही सवाल गूंज रहा है कि क्या अमित देशमुख इस चुनौती को स्वीकार करेंगे या यह मुकाबला केवल आरोप-प्रत्यारोपों के दौर तक ही सीमित रहेगा। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, जनता के बीच अपनी पैठ मजबूत करने की यह जंग और भी दिलचस्प होती जा रही है।

Pratahkal Bureau
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