लातूर भाजपा में बगावत का बिगुल: 'निष्ठावान' कार्यकर्ताओं ने फूंका विद्रोह, 'नमो आघाड़ी' के जरिए नेतृत्व को खुली चुनौती
लातूर महानगरपालिका चुनाव से पहले भाजपा में बड़ी बगावत! टिकट बंटवारे में 'आयाराम-गयाराम' को तवज्जो देने पर निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने 'नमो आघाड़ी' बनाकर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। विधायक संभाजी पाटिल निलंगेकर पर टिकट बेचने के आरोप और पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी ने लातूर भाजपा में 'भाजपा बनाम भाजपा' की स्थिति पैदा कर दी है। जानें पूरी खबर और बगावत करने वाले सभी प्रमुख नेताओं के नाम।

लातूर शहर महानगरपालिका चुनाव की दहलीज पर खड़े राजनीतिक गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया, जब भारतीय जनता पार्टी के भीतर सुलग रहा असंतोष एक भीषण ज्वाला बनकर फूट पड़ा। सालों से संगठन को सींचने वाले पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने टिकट बंटवारे में हुई कथित अनदेखी और 'आयाराम-गयाराम' संस्कृति के खिलाफ खुलेआम बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है। शहर की फिजाओं में अब तक गूंजने वाला 'कमल-कमल' का नारा अचानक 'निष्ठावान-निष्ठावान' के नारों में तब्दील हो गया है, जो पार्टी के भीतर की गहरी दरार को स्पष्ट रूप से बयां कर रहा है।
इस राजनीतिक घमासान की शुरुआत टिकटों के वितरण के बाद हुई, जिसमें पुराने चेहरों को दरकिनार कर हाल ही में पार्टी में शामिल हुए नए लोगों को तरजीह दी गई। असंतुष्ट गुट का आरोप है कि चुनाव प्रभारी और विधायक संभाजी पाटिल निलंगेकर के नेतृत्व में टिकटों की खरीद-फरोख्त हुई है और जमीनी कार्यकर्ताओं के त्याग को नजरअंदाज किया गया है। औसा रोड स्थित कल्पतरु मंगल कार्यालय में आयोजित एक विशाल बैठक में जनसंघ के जमाने से पार्टी के लिए समर्पित कार्यकर्ताओं ने अपनी व्यथा और क्रोध व्यक्त किया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भाजपा को लातूर में जीवित रखा, लेकिन आज उन्हें ही अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़नी पड़ रही है।
अपनी ताकत दिखाने और पार्टी नेतृत्व को कड़ा संदेश देने के लिए इन कार्यकर्ताओं ने 'निष्ठावान भाजपा' के बैनर तले एकजुट होकर 'नमो आघाड़ी' नामक एक नए मोर्चे की घोषणा की है। यह मोर्चा प्रभाग क्रमांक 8, 14, 15 और 16 में अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर चुका है। बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवक नितिनकुमार शेटे ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि निष्ठावानों पर अन्याय जारी रहा, तो पार्टी की छवि को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी। उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के परिणामों का हवाला देते हुए नेतृत्व को आईना दिखाया।
इस विद्रोह की फेहरिस्त काफी लंबी है, जिसमें पूर्व पार्षदों और दिग्गज पदाधिकारियों के नाम शामिल हैं। टिकट से वंचित रहने वाले प्रमुख चेहरों में वर्षा कुलकर्णी, संजय रंदाळे, श्वेता लोंढे, कोमल वायचळकर, सुनील मलवाड, शिवकुमार वाले, नितिन वाघमारे, शकुंतला गाडेकर, देवानंद साळुंखे, भाग्यश्री कोळखेरे, अजय दुढिले, अजय कोकाटे, व्यंकट वाघमारे, जानवी सूर्यवंशी, विशाल जाधव, सरिता राजगिरे और भाग्यश्री शेळके जैसे नाम प्रमुख हैं। इन सभी ने एक सुर में कहा कि वे ही असली भाजपा हैं और अपने हक के लिए संघर्ष करने से पीछे नहीं हटेंगे। यद्यपि उन्होंने जीत के बाद पुनः भाजपा का ही समर्थन करने की बात कही है, लेकिन वर्तमान बगावत ने भाजपा की चुनावी संभावनाओं पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
लातूर महानगरपालिका का यह चुनाव अब पार्टी बनाम विपक्ष न रहकर 'भाजपा बनाम भाजपा' की दिलचस्प जंग में तब्दील हो गया है। यह देखना अहम होगा कि शीर्ष नेतृत्व इस अंदरूनी कलह को शांत करने में सफल होता है या निष्ठावानों का यह रोष आगामी चुनाव परिणामों में भाजपा की राह मुश्किल कर देगा।

Pratahkal Bureau
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