महाराष्ट्र की कृषि मंडियों में 31 जानेवारी से 2 फेब्रुवारी 2026 तक अनाज, कपास और तिलहन फसलों के ताज़ा भाव जारी। ज्वार, मक्का, धान, कपास और मूंगफली जैसी फसलों के बाजार रेट कई जगह MSP से ऊपर रहे। यह डेटा किसानों और व्यापारियों के लिए अहम संकेत देता है।

Maharashtra Crop Prices : महाराष्ट्र की सभी कृषि मंडियों से जुड़े ताज़ा आंकड़े सामने आ गए हैं, जिनमें 29 से 31 जनवरी 2026 तक प्रमुख फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), वास्तविक बाजार भाव और आवक (Arrival) का विस्तृत विवरण दर्ज किया गया है। ये आंकड़े राज्य के किसानों, व्यापारियों और नीति-निर्माताओं के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि इन्हीं के आधार पर बाजार की दिशा और फसल की मांग का आकलन किया जाता है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, 31 जनवरी 2026 तक का डेटा फ्रीज़ कर दिया गया है। इसमें अनाज, रेशेदार फसलें और तिलहन फसलों की स्थिति स्पष्ट रूप से सामने आती है।

अनाज फसलों का हाल :

  • ज्वार (Jowar) का MSP 3,699 रुपये प्रति क्विंटल तय है, जबकि बाजार में इसके भाव 5,442 से 5,614 रुपये प्रति क्विंटल तक दर्ज किए गए।
  • मक्का (Maize) का MSP 2,775 रुपये है, लेकिन मंडियों में इसका भाव 3,645 से 3,774 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचा।
  • धान (साधारण) का MSP 2,369 रुपये प्रति क्विंटल रहा, वहीं बाजार भाव 2,687 से 2,811 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहे।
  • रागी (फिंगर मिलेट) के MSP 4,886 रुपये के मुकाबले बाजार में भाव 5,150 से 5,200 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किए गए।
  • गेहूं के भाव भी MSP से ऊपर रहे, हालांकि आवक सीमित देखी गई।

रेशेदार फसल और तिलहन :

  • कपास के MSP 7,710 रुपये प्रति क्विंटल के मुकाबले बाजार भाव 8,086 रुपये तक पहुंचे, जबकि आवक सैकड़ों मीट्रिक टन में दर्ज की गई।
  • मूंगफली का MSP 7,263 रुपये रहा, लेकिन मंडी में भाव 7,955 से 7,956 रुपये प्रति क्विंटल तक मिले।
  • सरसों और करडई (Safflower) में भी MSP की तुलना में ऊंचे बाजार भाव देखने को मिले, हालांकि कुछ मंडियों में आवक बेहद कम रही।

किसानों के लिए क्या मायने रखता है यह डेटा :

सरकारी तौर पर घोषित MSP किसानों को सुरक्षा देने का आधार है, लेकिन बाजार में MSP से अधिक भाव मिलना मांग, गुणवत्ता और सीमित आवक का संकेत देता है। महाराष्ट्र में कई फसलों के भाव MSP से ऊपर रहना किसानों के लिए राहत की खबर मानी जा रही है।

समापन में, जनवरी के अंतिम सप्ताह के ये आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि राज्य की कृषि मंडियों में कई प्रमुख फसलों की मांग मजबूत बनी हुई है। आने वाले हफ्तों में आवक और कीमतों का रुख किसानों की आय और कृषि नीति दोनों पर गहरा असर डाल सकता है।

Updated On 2 Feb 2026 5:45 PM IST
Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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