महाराष्ट्र के कोरपना तालुका में भारी बारिश से प्रभावित किसानों को अब तक सरकारी निधि नहीं मिलने पर पूर्व प्रमुख प्रकाश खणके ने तहसील कार्यालय पर मोर्चे का अल्टीमेटम दिया।

महाराष्ट्र के कोरपना तालुका में अतिवृष्टि की मार झेल रहे किसानों के लिए सरकारी सहायता अब तक केवल कागजों और घोषणाओं तक ही सीमित रह गई है। शासन द्वारा राहत कोष मंजूर किए जाने के ढोल तो जोर-शोर से पीटे गए, लेकिन हकीकत यह है कि किसानों के खाली हाथों में अब तक एक फूटी कौड़ी भी नहीं पहुंची है।

प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला

सरकार की इस कार्यप्रणाली को किसानों के साथ एक भद्दा मजाक करार देते हुए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पार्टी के पूर्व तालुका प्रमुख प्रकाश खणके ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट लहजे में चेतावनी दी है:

"यदि जल्द ही किसानों के बैंक खातों में निधि जमा नहीं की गई, तो तहसील कार्यालय पर एक विशाल मोर्चा निकाला जाएगा।"

मुआवजे की मांग और संघर्ष का घटनाक्रम

  • कोरपना तालुका में अगस्त और सितंबर के महीनों में हुई मूसलाधार बारिश ने फसलों को तहस-नहस कर दिया था।
  • शुरुआत में प्रशासन ने ६५ मिमी वर्षा के कड़े तकनीकी मानदंडों का हवाला देते हुए इस तालुका को मुआवजे की सूची से बाहर रखा था।
  • इस अन्याय के खिलाफ शिवसेना (यूबीटी) ने निरंतर संघर्ष किया और नायब तहसीलदार के माध्यम से राजुरा के विधायक तथा जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मुआवजे की मांग दोहराई।
  • लंबे समय तक चले इस पाठपुरावे और राजनीतिक दबाव के बाद अंततः सरकार ने प्रभावित किसानों के लिए आर्थिक सहायता मंजूर करने की घोषणा की।

अधूरी घोषणाएं और धरातल की हकीकत

घोषणा के हफ्तों बीत जाने के बाद भी धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रकाश खणके ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा है कि यदि निधि मंजूर हो चुकी है, तो वह आखिर अटकी कहां है? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल सुर्खियां बटोरने में व्यस्त है, जबकि कर्ज के बोझ तले दबा किसान अपनी बर्बाद फसलों के मुआवजे के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है।

चेतावनी और राजनीतिक सरगर्मी

इस संवेदनशील मुद्दे ने तालुका में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। शिवसेना (यूबीटी) का रुख अब पूरी तरह से आक्रामक हो चुका है। खणके ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक मांग नहीं बल्कि किसानों के हक की लड़ाई है। यदि शासन ने तत्काल कदम नहीं उठाए, तो तहसील कार्यालय का घेराव कर सरकार को जगाने का काम किया जाएगा।

उन्होंने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है कि किसानों के सब्र का बांध अब टूट रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है और अब क्षेत्र की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकारी अमला इस चेतावनी के बाद कितनी तत्परता दिखाता है।

Pratahkal Newsroom

Pratahkal Newsroom

प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story