कर्मवीर हिरे महाविद्यालय में अण्णाभाऊ साठे जयंती व लोकमान्य टिळक पुण्यतिथि पर समता और स्वराज्य का संदेश
कोल्हापुर के गारगोटी स्थित कर्मवीर हिरे महाविद्यालय में अण्णाभाऊ साठे जयंती और लोकमान्य टिळक पुण्यतिथि पर संयुक्त प्रतिमापूजन के जरिए समता और स्वराज्य का संदेश दिया गया।

तस्वीर में कोल्हापुर के गारगोटी स्थित कर्मवीर हिरे महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान महापुरुषों की तस्वीरों पर पुष्प अर्पित करते हुए प्राचार्य डॉ. यू. आर. शिंदे, नंदकिशोर लाघवे, प्राध्यापक और अन्य कर्मचारी नजर आ रहे हैं।
कोल्हापुर के गारगोटी स्थित कर्मवीर हिरे महाविद्यालय में साहित्यसम्राट अण्णाभाऊ साठे की जयंती तथा लोकमान्य बाळ गंगाधर टिळक की पुण्यतिथि के अवसर पर संयुक्त प्रतिमापूजन कार्यक्रम उत्साहपूर्ण वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान अण्णाभाऊ साठे के समता, सामाजिक परिवर्तन और श्रमिक समाज के सशक्तिकरण के विचारों के साथ-साथ लोकमान्य टिळक के स्वराज्य, राष्ट्रप्रेम और जनजागरण के योगदान को श्रद्धापूर्वक नमन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. यू. आर. शिंदे, कर्मचारी प्रतिनिधि डॉ. अरविंद चौगुले, उपप्राचार्य डॉ. एस. बी. देसाई, विभागीय उच्च शिक्षण कार्यालय के कनिष्ठ प्रशासन अधिकारी तथा विभागीय सहसंचालक नंदकिशोर लाघवे, बी.एड. समन्वयक प्रा. शारदा पाटील और स्टाफ प्रतिनिधि डॉ. शहाजीराव वारके द्वारा दोनों महापुरुषों की प्रतिमाओं का पूजन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित मान्यवरों ने कहा कि अण्णाभाऊ साठे ने अपने साहित्य के माध्यम से उपेक्षित, वंचित और श्रमिक समाज की वास्तविक स्थिति को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हुए समता, बंधुत्व और सामाजिक परिवर्तन की प्रेरणा दी। वहीं लोकमान्य बाळ गंगाधर टिळक ने स्वराज्य के विचार के माध्यम से भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा प्रदान की।
कार्यक्रम में स्वागत भाषण डॉ. नितीन जाधव ने दिया। प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए डॉ. युवराज दीक्षित ने अण्णाभाऊ साठे के समता के विचारों तथा लोकमान्य टिळक के स्वराज्य, स्वाभिमान और राष्ट्रप्रेम के संदेश की वर्तमान सामाजिक और शैक्षणिक क्षेत्र में प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन प्रा. विशाल आहेर ने किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक, शिक्षकेतर कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। सभी उपस्थितजनों ने दोनों महापुरुषों की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। यह आयोजन विद्यार्थियों तक समता, सामाजिक परिवर्तन, स्वराज्य और राष्ट्रप्रेम के मूल्यों का संदेश पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बना।

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