धुले नगर निगम चुनाव: भाजपा के रणनीतिक चक्रव्यूह में विपक्ष पस्त, दो 'आयातित' महिला प्रत्याशियों की निर्विरोध जीत से सियासी हलचल
धुले नगर निगम चुनाव में भाजपा का मास्टर प्लान सफल रहा, जहाँ दलबदल कर आईं उज्ज्वला रणजीत भोसले और ज्योत्स्ना प्रफुल्ल पाटिल निर्विरोध नगरसेवक चुनी गईं। 32 दिग्गजों के टिकट काटकर भाजपा ने विधायक अनूप अग्रवाल के नेतृत्व में विपक्षी खेमे में खलबली मचा दी है। जानिए कैसे भाजपा की चुनावी रणनीति ने मतदान से पहले ही जीत का खाता खोल दिया और क्या है आगामी निर्विरोध जीत का दावा।

धुले। खानदेश की राजनीति के गढ़ धुले नगर निगम चुनाव के रण में भारतीय जनता पार्टी ने अपनी आक्रामक बिसात बिछाते हुए विपक्ष को शुरुआती दौर में ही करारी मात दे दी है। नगर निगम की सत्ता पर पुनः 'कमल' खिलाने के संकल्प के साथ उतरी भाजपा की 'एकला चलो रे' की रणनीति और चुनावी चक्रव्यूह का असर धरातल पर दिखने लगा है। मतदान से पूर्व ही भाजपा के दो उम्मीदवारों ने निर्विरोध नगरसेवक निर्वाचित होकर जीत का बिगुल फूंक दिया है। इस चुनावी घटनाक्रम की सबसे दिलचस्प बात यह है कि निर्विरोध चुनी गई दोनों महिला प्रत्याशी चुनाव की घोषणा के चंद दिनों पहले ही अन्य दलों का दामन छोड़कर भाजपा में शामिल हुई थीं, जिन्हें पार्टी ने तत्काल चुनावी मैदान में उतारकर मास्टर स्ट्रोक खेल दिया।
नगर निगम पर पूर्ण बहुमत के साथ अपना वर्चस्व कायम करने के लिए भाजपा ने इस बार 'रिफॉर्म और परफॉर्म' की नीति अपनाते हुए एक बड़ा जोखिम उठाया है। पार्टी ने आंतरिक गुटबाजी और सत्ता विरोधी लहर को मात देने के लिए 32 मौजूदा नगरसेवकों के टिकट काट दिए हैं। टिकट कटने वाले दिग्गजों की सूची में दो पूर्व महापौर और एक पूर्व उपमहापौर जैसे कद्दावर नाम शामिल हैं, जिनका राजनीतिक कद स्थानीय स्तर पर काफी मजबूत माना जाता था। पार्टी ने इन अनुभवी चेहरों की बलि देकर अन्य दलों से आए 'आयातित' नेताओं और नए चेहरों पर दांव लगाया है, जो फिलहाल भाजपा के लिए संजीवनी साबित होता दिख रहा है।
निर्विरोध निर्वाचन के इस घटनाक्रम में उज्ज्वला रणजीत भोसले का नाम सबसे ऊपर है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के शहर जिलाध्यक्ष रणजीत राजे भोसले ने नामांकन प्रक्रिया के अंतिम क्षणों में नाटकीय ढंग से भाजपा का दामन थामा था। भाजपा नेतृत्व ने तत्परता दिखाते हुए उनकी पत्नी उज्ज्वला भोसले को प्रभाग क्रमांक 1 से अपना आधिकारिक प्रत्याशी घोषित किया। भाजपा की इस सधी हुई चाल के सामने विपक्ष का गणित पूरी तरह बिगड़ गया और उज्ज्वला भोसले निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दी गईं। इसी कड़ी में, कुछ दिन पूर्व ही उद्धव ठाकरे गुट (शिवसेना) को अलविदा कहकर भाजपा में शामिल हुईं ज्योत्स्ना प्रफुल्ल पाटिल ने भी निर्विरोध जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पारी की शानदार शुरुआत की है।
भाजपा की इस शुरुआती बढ़त ने पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है। विधायक अनूप अग्रवाल ने इस सफलता पर गहरी संतुष्टि जताते हुए दावा किया है कि धुले नगर निगम के शीर्ष पद पर एक बार फिर भाजपा का ही महापौर आसीन होगा। उन्होंने विरोधियों पर कटाक्ष करते हुए संकेत दिए कि अभी यह जीत की केवल एक झलक है और आने वाले दिनों में करीब 8 से 10 और नगरसेवक निर्विरोध चुनकर आ सकते हैं। यद्यपि टिकट कटने से वरिष्ठ नगरसेवकों के खेमे में असंतोष की लहर है, लेकिन केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व की सख्ती के चलते फिलहाल किसी ने भी बगावत का बिगुल नहीं फूंका है। भाजपा की इस आक्रामक कार्यशैली और रणनीतिक जीत ने फिलहाल विपक्षी दलों को रक्षात्मक रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है।

Pratahkal Bureau
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