धुले जिले के नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों में बीजेपी ने 50 सीटें जीतकर शानदार प्रदर्शन किया, जबकि महाविकास आघाड़ी पूरी तरह विफल रही। दोंडाईचा, शिरपुर और पिंपलनेर में बीजेपी का दबदबा रहा, वहीं शिंदखेडा में अध्यक्ष पद को लेकर सियासी उलटफेर देखने को मिला।

धुले जिले के स्थानीय निकाय चुनावों ने एक बार फिर महाराष्ट्र की सियासत में हलचल मचा दी है। नगर परिषद और नगर पंचायत के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए जिले की राजनीति में अपना दबदबा कायम कर लिया है, जबकि महाविकास आघाड़ी का प्रदर्शन पूरी तरह धराशायी नजर आया है। दोंडाईचा, शिरपुर और पिंपलनेर में कमल खिलने से बीजेपी ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि जमीनी स्तर पर उसकी पकड़ पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुई है।

चुनाव परिणामों के अनुसार, धुले जिले की तीन नगर परिषदों और एक नगर पंचायत में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। कुल 50 सीटों पर जीत दर्ज कर पार्टी ने एकतरफा बढ़त बनाई है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 8 सीटें मिलीं, जबकि अजित पवार गुट की एनसीपी ने 4 सीटों पर सफलता हासिल की। इसके विपरीत कांग्रेस, एमआईएम और शरद पवार गुट की एनसीपी को मात्र एक-एक सीट से संतोष करना पड़ा। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह रहा कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना जिले में एक भी सीट नहीं जीत सकी।

दोंडाईचा नगर परिषद का चुनाव राजनीतिक गलियारों में विशेष चर्चा का विषय रहा। यहां चुनाव प्रक्रिया के दौरान ही सभी 26 सीटें निर्विरोध घोषित हो गईं। राज्य के मंत्री जयकुमार रावल ने इस चुनाव में अपनी राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर लगाई थी और वे विरोधी खेमों को भी साथ लाने में सफल रहे। इसका परिणाम यह हुआ कि उनकी माताजी नयनकुंवर रावल लगातार चौथी बार निर्विरोध नगराध्यक्ष बनीं, जो जिले की राजनीति में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

हालांकि शिंदखेडा नगर पंचायत के नतीजों ने बीजेपी को हल्का झटका भी दिया। यहां 17 में से 11 सीटें जीतकर पार्टी ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया, लेकिन नगराध्यक्ष पद बीजेपी के हाथ से निकल गया। अजित पवार गुट की कलावती माली नगराध्यक्ष बनीं, जबकि बीजेपी की प्रत्याशी रजनी वानखेडे को हार का सामना करना पड़ा। बहुमत के बावजूद अध्यक्ष पद न मिल पाना राजनीतिक विश्लेषण का विषय बन गया है।

शिरपुर वरवाडे नगर परिषद में पूर्व मंत्री अमरीशभाई पटेल का प्रभाव एक बार फिर देखने को मिला। बीजेपी प्रत्याशी और उनके पुत्र चिंतन पटेल ने नगराध्यक्ष पद पर 16,959 मतों के भारी अंतर से जीत दर्ज की। कभी कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले शिरपुर में यह परिणाम सत्ता परिवर्तन की स्पष्ट तस्वीर पेश करता है।

पिंपलनेर नगर परिषद का चुनाव भी बेहद रोचक रहा। यहां बीजेपी और शिंदे गुट की शिवसेना के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। दोनों को 8-8 सीटें मिलीं, लेकिन एक निर्दलीय के समर्थन से बीजेपी ने बहुमत हासिल कर लिया। नगराध्यक्ष पद पर योगिता चौरे की जीत ने पार्टी की रणनीतिक मजबूती को रेखांकित किया।

कुल मिलाकर, अलग-अलग दलों में बंटकर चुनाव लड़ने के बावजूद महायुति में शामिल दलों ने बीजेपी की राह आसान कर दी। धुले जिले के इन नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर बीजेपी ने न सिर्फ अपनी स्थिति मजबूत की है, बल्कि विपक्ष के लिए भी आने वाले चुनावों में बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

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