दालमिया सीमेंट कंपनी ने मुआवजे की दर 22 लाख से बढ़ाकर 27 लाख रुपये की और प्रभावित परिवारों के सदस्यों को लिखित रोजगार देने का आश्वासन दिया।

सांगोडा क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों पर पिछले तीन वर्षों से हो रहे अन्याय के खिलाफ जारी संघर्ष को आखिरकार ऐतिहासिक सफलता मिल गई है। समाजसेवी और युवा प्रतिष्ठान, कोरपना के अध्यक्ष नितीन विजय रावजी बावणे के नेतृत्व के कारण दालमिया सीमेंट कंपनी को अपने कदम पीछे खींचने पड़े हैं। कंपनी ने भूमि अधिग्रहण की दर को 22 लाख रुपये प्रति एकड़ से बढ़ाकर 27 लाख रुपये प्रति एकड़ करने पर अपनी सहमति दे दी है। इसके साथ ही प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को कंपनी में रोजगार देने का लिखित आश्वासन मिलने से सांगोडा के ग्रामीणों में संतोष का माहौल है।

कंपनी पर नियम विरुद्ध कामकाज और दबाव बनाने के आरोप

दालमिया सीमेंट कंपनी, नारंडा द्वारा सांगोडा के किसानों और ग्रामीणों पर पिछले तीन वर्षों से निरंतर अन्याय किए जाने का आरोप ग्रामीणों द्वारा लगाया जा रहा था। ग्रामीणों में इस बात को लेकर तीव्र आक्रोश था कि नियम विरुद्ध कामकाज और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कम दरों पर जमीन हड़पने की कोशिश की जा रही थी, साथ ही प्रशासन की मदद से उन पर दबाव डाला जा रहा था। अनेक किसानों की जमीन आंशिक रूप से अधिग्रहित किए जाने के कारण शेष बची खेती खेती योग्य नहीं रही, जिससे कई परिवारों पर आर्थिक संकट के बादल मंडराने लगे थे। खेती के बंजर रह जाने से आजीविका का प्रश्न खड़ा हो गया था, जबकि खेतों के बीच के हिस्से में जंगली जानवरों का आतंक बढ़ने से किसानों की समस्या और भी गंभीर हो गई थी।

आंदोलन और प्रशासन के साथ तीखी नोकझोंक

स्थानीय युवाओं को रोजगार से वंचित रखे जाने के कारण बेरोजगारी की समस्या विकराल हो गई थी। इस अन्याय के खिलाफ सांगोडा गांव के युवाओं ने 23 अक्टूबर 2025 से कोरपना में आठ दिनों तक आमरण अनशन किया था। इसी बीच, 24 दिसंबर 2025 को कंपनी ने प्रशासन की मौजूदगी में लगभग 70 से 80 पुलिसकर्मियों के कड़े बंदोबस्त के साथ तहसीलदार, पटवारी और मंडल अधिकारियों की उपस्थिति में जबरन काम शुरू करने का प्रयास किया। उस समय सांगोडा के ग्रामीणों ने नितीन बावणे की पहल पर एकजुट होकर कंपनी के इस बलपूर्वक कार्य का कड़ा विरोध किया और काम को तत्काल बंद करवा दिया। नितीन बावणे के हस्तक्षेप के कारण प्रशासन को चर्चा के लिए विवश होना पड़ा।

ऐतिहासिक समझौता और मुआवजे में बड़ी वृद्धि

तहसीलदार ने ग्रामीणों और दालमिया सीमेंट कंपनी के बीच मध्यस्थता बैठक आयोजित करने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर नितीन बावणे ने स्पष्ट शब्दों में अपनी भूमिका रखते हुए कहा कि, "जब तक सांगोडा के ग्रामीणों को पूर्ण न्याय नहीं मिल जाता, तब तक यह लड़ाई नहीं रुकेगी।" नितीन बावणे के नेतृत्व में हुए निरंतर आंदोलन, फॉलो-अप और चर्चाओं के कारण कंपनी पर दबाव बढ़ता गया और अंततः कंपनी को किसानों की मांगें माननी पड़ीं। जमीन अधिग्रहण की दर 22 लाख रुपये से बढ़ाकर 27 लाख रुपये प्रति एकड़ कर दी गई तथा जमीन देने वाले प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को कंपनी में रोजगार देने का लिखित आश्वासन दिया गया और जमीन का इकरारनामा (इसारपावती) पूरा किया गया।

ग्रामीणों ने जताया नेतृत्व के प्रति आभार

इस समझौते के दौरान वामन पाटील मुसळे, चरणदास देवाळकर, विठोबा बोंडे, विजय कोल्हे, ढवस पाटील, आकाश रागीट, प्रमोद भोयर, प्रफुल गिरडकर सहित सांगोडा के ग्रामीण उपस्थित थे। दालमिया सीमेंट कंपनी की ओर से प्लांट हेड प्रणब नायक, मायनिंग हेड मोगरे साहब और विनोद खेडीकर की उपस्थिति में अनुबंध की प्रक्रिया पूरी की गई। न्याय मिलने के बाद सांगोडा के किसानों और ग्रामीणों ने नितीन बावणे का विशेष आभार व्यक्त करते हुए उनके नेतृत्व की सराहना की। ग्रामीणों ने अपनी भावना व्यक्त करते हुए कहा कि, "गांव के लिए लड़ने वाला असली नेता।" ग्रामीणों का मानना है कि सही नेतृत्व, दृढ़ रुख और निरंतर संघर्ष के कारण ही यह ऐतिहासिक निर्णय संभव हो पाया है। सांगोडा गांव की यह जीत केवल आर्थिक मुआवजे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अधिकारों, न्याय और किसानों के स्वाभिमान की जीत है।

Pratahkal Bureau

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