नई दिल्ली: प्रधानमंत्री मोदी ने किया बुद्ध के पावन अवशेषों का भव्य अनावरण, कोटा के भरत नकवाल बने ऐतिहासिक पल के गवाह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में भगवान बुद्ध के पावन अवशेषों की प्रदर्शनी “The Light and the Lotus” का भव्य उद्घाटन किया। दशकों बाद विदेश से लौटे इन रत्नों के दर्शन के लिए कोटा के इन्फ्लुएंसर भरत नकवाल को विशेष निमंत्रण मिला। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में वित्त मंत्री और रामदास आठवले सहित कई दिग्गज शामिल हुए। बुद्ध की विरासत और शांति का यह अद्भुत संगम अब जनता के लिए खुल चुका है।

नई दिल्ली। भारत की आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के इतिहास में 3 जनवरी का दिन एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित एक अभूतपूर्व समागम में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने “The Light and the Lotus: Relics of the Awakened One” नामक ग्रैंड इंटरनेशनल एक्सपोजिशन का भव्य उद्घाटन किया। यह आयोजन केवल एक प्रदर्शनी मात्र नहीं, बल्कि दशकों बाद अपनी मातृभूमि लौटे भगवान बुद्ध के पावन अवशेषों और बहुमूल्य रत्नों के सम्मान में आयोजित एक राष्ट्रव्यापी उत्सव है। इस गौरवशाली और अंतरराष्ट्रीय महत्व के अवसर पर राजस्थान के कोटा शहर के लिए भी गर्व का क्षण रहा, जब वहां के प्रसिद्ध सोशल एक्टिविस्ट और इन्फ्लुएंसर भरत नकवाल को भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा विशेष रूप से आमंत्रित किया गया।
इस ऐतिहासिक प्रदर्शनी का सबसे भावुक और महत्वपूर्ण पहलू उन अमूल्य रत्नों और बुद्ध के पवित्र अवशेषों की घर वापसी है, जो लंबे समय तक विदेशी धरती पर रहने के बाद प्रधानमंत्री के प्रयासों से भारत वापस लाए गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने पूरी श्रद्धा के साथ इन अवशेषों का दर्शन किया और राष्ट्र की ओर से अपनी पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि ये अवशेष और रत्न केवल भारत की प्राचीन विरासत का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि ये संपूर्ण विश्व के लिए शांति, करुणा और मानवता के जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि विदेशों में गई भारत की सांस्कृतिक धरोहरों को वापस लाना सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाने के लिए मंच पर प्रधानमंत्री के साथ दिल्ली के मुख्यमंत्री, केंद्रीय संस्कृति मंत्री, वित्त मंत्री और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले सहित देश-विदेश के कई दिग्गज राजनेता और बौद्ध भिक्षु उपस्थित रहे। गणमान्य अतिथियों ने आधुनिक युग में भगवान बुद्ध की शिक्षाओं की प्रासंगिकता पर बल दिया और इसे वैश्विक संकटों के समाधान के रूप में प्रस्तुत किया। यह आयोजन भारत की 'सॉफ्ट पावर' और वैश्विक आध्यात्मिक नेतृत्व को प्रदर्शित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
कोटा के युवा प्रतिनिधि के रूप में शामिल हुए भरत नकवाल ने इस अनुभव को 'अलौकिक' और 'अविस्मरणीय' बताया। उन्होंने संस्कृति मंत्रालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की उपस्थिति में ऐसे दिव्य दर्शन करना किसी भी नागरिक के लिए सौभाग्य की बात है। नकवाल ने आम जनता से भी इस प्रदर्शनी का लाभ उठाने की अपील की है, जो अब सार्वजनिक दर्शन के लिए खोल दी गई है। यह आयोजन न केवल भारत की ऐतिहासिक जड़ों को सींचने का कार्य कर रहा है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी महान विरासत से रूबरू कराने का एक सशक्त माध्यम भी बन गया है।

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