सुसंस्कारित स्वास्थ्य सेवा से समाज निर्माण का संकल्प: मनमोहन वैद्य
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मनमोहन वैद्य और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कोटा में भारत विकास परिषद की तीन दिवसीय अखिल भारतीय स्वास्थ्य कार्यशाला को संबोधित किया।

कोटा, 1 मार्च। "देश हमें देता है सबकुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें", सेवाभाव से ओतप्रोत इन पंक्तियों के साथ भारत विकास परिषद द्वारा आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय सुसंस्कारित स्वास्थ्य सेवा कार्यशाला का रविवार को भव्य समापन हुआ। भारत विकास परिषद चिकित्सालय के अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता एवं महामंत्री अशोक वाशिष्ठ ने बताया कि तीन दिवसीय शिविर में देश के विभिन्न राज्यों से आए चिकित्सकीय सेवा से जुड़े चिकित्सकों ने अपने-अपने अनुभव साझा किये। अन्त में भारत विकास परिषद चिकित्सालय एवं अनुसंधान केन्द्र के संरक्षक श्याम शर्मा ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
स्वदेशी समाज और आध्यात्मिक चिंतन का संदेश
समापन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य मनमोहन वैद्य ने कहा कि "हमें केवल सेवा तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि भविष्य के भारत का निर्माण करना है। यह कार्य सरकार का नहीं, समाज का है। जो समाज राज्य पर कम निर्भर होकर अपने बल पर खड़ा होता है, वही स्वदेशी समाज है।" उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसका आध्यात्मिक चिंतन है। भारत ने कभी व्यापार के नाम पर लूट, शोषण या धर्मांतरण नहीं किया, बल्कि दुनिया को जीने, कमाने और आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई। कोरोना काल में भारत ने यह सिद्ध किया कि यहां केवल सरकारी तंत्र ही नहीं, बल्कि लाखों सामान्य नागरिकों ने सेवा को अपना धर्म मानकर कार्य किया।
मनमोहन वैद्य ने आगे जोर देते हुए कहा कि "मैं को छोटा कर 'हम' का विस्तार करना ही समाज को लौटाना है, यही धर्म और यही सच्ची सेवा है।" स्वास्थ्य के क्षेत्र में हमारा लक्ष्य केवल रोगियों का इलाज नहीं, बल्कि रोगमुक्त, समरस, समर्थ और निरामय समाज का निर्माण है। ऐसा समाज ही स्वदेशी भारत की सशक्त पहचान बनेगा।
भारतीय चिकित्सा पद्धति पर वैश्विक विश्वास
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा कि "भारतीय चिकित्सा पद्धति पर आज पूरी दुनिया का भरोसा बढ़ा है।" लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि "स्वास्थ्य सेवा केवल पेशा नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और निष्ठा का श्रेष्ठ उदाहरण है। हर कालखंड में चिकित्सकों को समाज में सम्मान मिला है, लेकिन कोरोना काल ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत के संस्कार, सेवा, त्याग और समर्पण किस तरह देश को वैश्विक चुनौतियों से उबार सकते हैं।" उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से प्रेरित संगठनों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि इन संगठनों ने न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी सेवा कार्यों के माध्यम से मानवता की मिसाल पेश की है। आज सुसंस्कारित स्वास्थ्य सेवा समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। चाहे आयुर्वेद हो, योग हो या आधुनिक चिकित्सा, हर क्षेत्र में जुड़े सेवाभावी लोग समाज की रीढ़ हैं।
नैतिक चुनौतियां और अंतिम व्यक्ति तक सेवा की पहुंच
ओम बिरला ने कहा कि समय के साथ स्वास्थ्य सेवाओं में कुछ नैतिक चुनौतियां भी सामने आईं, लेकिन कोरोना के बाद लोगों का भरोसा फिर से मजबूत हुआ है। यदि चिकित्सकों की कार्यपद्धति सेवा-भाव से प्रेरित होगी तो समाज में विश्वास और सम्मान स्वतः बढ़ेगा। उन्होंने निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रों में कार्यरत चिकित्सकों से आग्रह किया कि "धन के आकर्षण से ऊपर उठकर सेवा को प्राथमिकता दें।" लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि आज भी देश के दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सीमित है। अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने के लिए सुसंस्कारित, संवेदनशील और करुणामयी स्वास्थ्य कर्मियों को तैयार करना होगा। भारत विकास परिषद द्वारा मोबाइल वैन, चिकित्सा शिविरों और सेवा अभियानों के माध्यम से किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं।
विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति और समापन
कार्यक्रम को डॉ. जयंतीभाई भडेसिया, डॉ. रमेश अग्रवाल एवं श्याम शर्मा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम के अन्त में प्रार्थना एवं राष्ट्रगान के साथ कार्यशाला का समापन हुआ। इस गरिमामयी कार्यक्रम में मुख्य रूप से कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश विजयवर्गीय, विजय सिंह, पीके शर्मा, प्रेम विजय, रवि विजय, मनोज विजय, नरेन्द्र पोरवाल, ओमप्रकाश गुप्ता, हरिओम विजय, मनोज कोठारी, डॉ. अनुज सिंघल, सचिन जम्भोरकर, डॉ. रत्नेश खरे, डॉ. अशोकराव कुकड़े, डॉ. रमेश अग्रवाल, क्षेत्रीय संचालक डॉ. जयंती भाई समेत बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन मौजूद रहे।

Pratahkal Bureau
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