आर्यिका विभाश्री माताजी के सानिध्य में आयोजित अनुष्ठान में तीर्थंकरों को अर्घ्य समर्पित किए गए और भारत-बाहुबली युद्ध नाटिका का मंचन हुआ।

कोटा के आर.के. पुरम स्थित श्री 1008 मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर, त्रिकाल चौबीसी के तत्वावधान में आर्यिका श्री 105 विभाश्री माताजी एवं आर्यिका श्री 105 विनयश्री माताजी ससंघ के सानिध्य में आयोजित सिद्धचक्र महामंडल विधान के अंतर्गत रविवार को विशेष पूजा-अर्चना के साथ तीर्थंकरों को अर्घ्य समर्पित किए गए। प्रातःकालीन धार्मिक अनुष्ठानों से लेकर सायंकालीन भव्य दिग्विजय यात्रा तक पूरा क्षेत्र भगवान महावीर के जयकारों से गुंजायमान रहा और वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक बन गया।

विधान पूजन एवं अभिषेक प्रक्रिया

मंदिर समिति के अध्यक्ष अंकित जैन ने बताया कि प्रातः विशेष पूजा-अर्चना के उपरांत समवशरण में विराजित जिनेंद्र देव का अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। विधानाचार्य पंडित जितेंद्र शास्त्री एवं स्वतंत्र भैया के सान्निध्य और निर्देशन में सिद्धचक्र महामंडल विधान किया गया जिसमें श्रद्धालुओं द्वारा विधिवत अर्घ्य समर्पित किए गए।

भव्य दिग्विजय यात्रा का वैभव

समिति उपाध्यक्ष लोकेश जैन बरमुंडा ने बताया कि सायंकाल चक्रवती इन्द्र ज्ञानचंद जैन, संजय-तृप्ति जैन के स्व निवास से चक्रवर्ती भव्य दिग्विजय यात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में चक्रवती इंद्र परिवार हाथी पर सवार रहे, वहीं सोधर्म इंद्र के रूप में एस के जैन परिवार घोड़े पर विराजमान रहे जबकि अन्य इंद्र बग्घियों में सवार होकर बैंड-बाजों एवं लवाजमे के साथ यात्रा नगर भ्रमण को निकली। दिग्विजय यात्रा के दौरान मार्ग में स्थान-स्थान पर पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं ने स्वागत किया। जैन श्रद्धालु नृत्य करते हुए जिन प्रभावना करते नजर आए। इन्द्र अपने हाथों से मोती व अर्शिफा लुटा रहे थे और श्रद्धालु महावीर के जयकारों के साथ नाचते गाते आगे बढ़ रहे थे।

गणमान्य जनों की उपस्थिति

इस अवसर पर सकल समाज के संरक्षक विमल जैन नांता, विनोद टोरडी, अध्यक्ष प्रकाश बज, महामंत्री पदम बडला, भाजपा नेता जगदीश जिंदल, समिति उपाध्यक्ष लोकेश जैन बरमुंडा, संयोजक पदम जैन दुगरिया, कार्याध्यक्ष प्रकाश सेठिया, मुकेश पापड़ीवाल, अक्षय जैन, संजय बांझल, रोहित जैन, राजेन्द्र गोधा, पंकज खटोड सहित अनेक गणमान्य जन एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

सांस्कृतिक प्रस्तुति: भारत-बाहुबली युद्ध

महिला मंडल की भव्य नाटिका के अंतर्गत रात्रिकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम में धार्मिक नाटिका में भारत-बाहुबली युद्ध मंचन किया गया, जिसमें धर्म, त्याग और वैराग्य के संदेश को प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत किया गया। नाटिका को उपस्थित श्रद्धालुओं ने सराहना के साथ देखा।

आर्यिका विभाश्री माताजी का मंगल प्रवचन

आर्यिका श्री 105 विभाश्री माताजी ने प्रवचन में धर्म और धन के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि — "जो व्यक्ति धर्म को छोड़कर केवल धन के पीछे भागता है, उसका पतन निश्चित है, जबकि धर्म के पथ पर चलने वाला व्यक्ति कभी अभावग्रस्त नहीं होता। धर्म के बिना धन का कोई मूल्य नहीं है और धर्मयुक्त धन ही कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।" समवशरण में विराजमान पूज्य गणिनी आर्यिका श्री 105 विभाश्री माताजी से आवक बेष्ठी परिवार द्वारा प्रश्न किया गया कि धर्म में धन की कितनी उपयोगिता है तथा क्या धर्म के बिना धन से कल्याण संभव है अथवा धन के बिना धर्म से कल्याण हो सकता है।

धर्मध्वजा और दिग्विजय का संदेश

इस पर पूज्य माताजी ने उत्तर देते हुए कहा कि — "भगवान की भक्ति, वचनों का श्रवण और धर्माचरण सातिशय पुण्य बंध का कारण बनता है।" उन्होंने भरत चक्रवर्ती की दिग्विजय यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने 60 हजार वर्षों में छह खंडों पर विजय प्राप्त कर धर्मध्वजा फहराई थी।

Pratahkal Bureau

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