कोटा के श्री माहेश्वरी सेवा समिति द्वारा मथुरा-गिरिराज जी में भव्य धार्मिक आयोजन किया गया। राजेश कृष्ण बिरला के नेतृत्व में 150 श्रद्धालुओं ने ठाकुर जी का अभिषेक कर छप्पन भोग लगाया और यमुना मैया को 75 चुनरी सहित सोलह श्रृंगार अर्पित किए। भक्ति और परंपरा के इस अनूठे संगम की विस्तृत रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

मथुरा/कोटा। भक्ति, परंपरा और अटूट श्रद्धा का अनूठा संगम उस समय देखने को मिला जब कोटा से श्री माहेश्वरी सेवा समिति का एक विशाल प्रतिनिधिमंडल ब्रज भूमि की पावन धरा पर पहुँचा। कान्हा की क्रीड़ास्थली और भक्ति के केंद्र गिरिराज जी एवं यमुना तट पर आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान ने न केवल श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया, बल्कि सनातन परंपराओं के प्रति युवा और बुजुर्गों के साझा उत्साह की एक जीवंत तस्वीर पेश की। कोटा से रवाना हुए 150 लोगों के इस दल ने मथुरा, गिरिराज और यमुना जी के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया, जहाँ भक्ति के जयकारों के बीच समूचा वातावरण कृष्णमय हो गया।

मुख्य यजमान और माहेश्वरी समाज कोटा के अध्यक्ष राजेश कृष्ण बिरला के नेतृत्व में आयोजित इस यात्रा की विशेषता यह रही कि इसमें नव-विवाहित जोड़ों से लेकर 90 वर्ष तक के बुजुर्गों ने समान उत्साह के साथ सहभागिता की। गिरिराज जी की तलहटी में आयोजित कुनवाड़ा कार्यक्रम में ठाकुर जी का पंचामृत अभिषेक किया गया, जिसके पश्चात भगवान को छप्पन भोग अर्पित किए गए। इस अवसर पर राजेश बिरला ने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में परस्पर निर्मल भाव और समरसता का संचार होता है। उन्होंने भारत भूमि को देव भूमि बताते हुए कहा कि भगवान श्री कृष्ण के आदर्शों और उनकी लीलाओं के दर्शन मात्र से मन प्रफुल्लित हो उठता है और अपनी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलती है।

धार्मिक अनुष्ठान का दूसरा महत्वपूर्ण पड़ाव यमुना जी का जैतपुरा तट रहा, जहाँ श्रद्धा का सागर उमड़ पड़ा। माहेश्वरी सेवा समिति कुन्हाड़ी के अध्यक्ष मनीष मूंदड़ा ने बताया कि माँ यमुना को 75 चुनरी ओढ़ाई गई। इस दौरान नावों के माध्यम से पूरी यमुना मैया पर चुनरी का विस्तार किया गया, जो दृश्य अत्यंत मनोरम और भक्तिपूर्ण था। देवी स्वरूपा यमुना जी को केवल चुनरी ही नहीं, बल्कि चांदी की पायल, बिछिया, सोने की लौंग और मंगलसूत्र सहित पूर्ण सोलह श्रृंगार अर्पित किए गए। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर था और विधि-विधान के साथ संपन्न हुए इस कार्यक्रम में ठाकुर जी और यमुना मैया के जयकारों से समूचा तट गूंज उठा।

इस भव्य धार्मिक आयोजन में माहेश्वरी समाज के वरिष्ठ जनों और पदाधिकारियों की गरिमामय उपस्थिति रही। कार्यक्रम को सफल बनाने में सूरज बिरला, महेश अजमेरा, सुरेश काबरा, राकेश मंडोवरा, अदिति जाजू और सचिव ब्रज गोपाल भराड़िया सहित समाज के अनेक गणमान्य लोगों ने सक्रिय भूमिका निभाई। यह आयोजन केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि समाज की एकता और आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा, जिसका प्रभाव कोटा से लेकर ब्रज तक महसूस किया गया।

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