जोधपुर। रेलवे के आधुनिकीकरण और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों का असर अब यात्री सेवाओं पर दिखने लगा है। उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल से दक्षिण भारत की ओर रुख करने वाले यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना सामने आई है। पश्चिम मध्य रेलवे के हैदराबाद मंडल के अंतर्गत आने वाले बासर और नवीपेट स्टेशनों के बीच विद्युतीकरण और अत्याधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली को स्थापित करने के लिए 'नॉन-इन्टरलॉकिंग ब्लॉक' लिया जा रहा है। इस तकनीकी अपग्रेडेशन के चलते भगत की कोठी से काचीगुडा के बीच संचालित होने वाली रेल सेवा सीधे तौर पर प्रभावित होगी और यात्रियों को निर्धारित समय से देरी का सामना करना पड़ेगा।

रेलवे प्रशासन द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस बुनियादी ढांचे के विकास कार्य के कारण ट्रेन संख्या 17606, भगत की कोठी-काचीगुडा रेलसेवा को अलग-अलग तिथियों पर रेगुलेट यानी मार्ग में रोककर चलाया जाएगा। सबसे अधिक प्रभाव 16 जनवरी 2026 को प्रस्थान करने वाली ट्रेन पर पड़ेगा। आगामी शुक्रवार को भगत की कोठी से रवाना होने वाली यह रेल सेवा नांदेड़ मंडल पर करीब 2 घंटे की देरी से संचालित होगी। तकनीकी कार्यों की जटिलता को देखते हुए रेलवे ने यह निर्णय लिया है ताकि भविष्य में रेल संचालन को अधिक सुरक्षित और तीव्र बनाया जा सके।

इतना ही नहीं, इस कार्य का सिलसिला अगले सप्ताह भी जारी रहेगा। शेड्यूल के मुताबिक, यही गाड़ी संख्या 17606 जो दिनांक 20 जनवरी और 23 जनवरी 2026 को भगत की कोठी से अपनी यात्रा प्रारंभ करेगी, उसे भी नांदेड़ मंडल पर 50 मिनट के लिए रेगुलेट किया जाएगा। हालांकि यह देरी 16 तारीख की तुलना में कम है, लेकिन लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह समय अंतराल महत्वपूर्ण हो सकता है। रेलवे ने इस ब्लॉक को परिचालन सुरक्षा और तकनीकी सुदृढ़ीकरण के लिए अनिवार्य बताया है।

इस पूरे घटनाक्रम का व्यापक असर उन यात्रियों पर पड़ेगा जिन्होंने पहले से ही अपनी यात्रा की योजना बना रखी है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि विद्युतीकरण और सिग्नलिंग के इन कार्यों से भविष्य में ट्रेनों की रफ्तार और सुरक्षा में इजाफा होगा, लेकिन वर्तमान में चल रहे इस 'नॉन-इन्टरलॉकिंग' कार्य के कारण यात्रियों को होने वाली असुविधा अपरिहार्य है। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी यात्रा शुरू करने से पहले आधिकारिक पूछताछ नंबरों या नेशनल ट्रेन इंक्वायरी सिस्टम के माध्यम से अपनी गाड़ी की वर्तमान स्थिति की जांच अवश्य कर लें ताकि स्टेशन पर अनावश्यक प्रतीक्षा से बचा जा सके। विकास की इस पटरी पर दौड़ती भारतीय रेल अब नई तकनीक के साथ तालमेल बिठाने की तैयारी में है।

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