झालावाड़: नृसिंह मंदिर की भूमि साइबर थाने को आवंटित करने पर भड़का राठौर समाज, उग्र आंदोलन की दी चेतावनी
झालावाड़ के गिन्दौर में भगवान श्री नृसिंह मंदिर की भूमि को साइबर थाने के लिए आवंटित करने पर राठौर समाज ने कड़ा रोष जताया है। जिला प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में समाज ने धार्मिक भावनाओं के आहत होने की बात कही है और स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मंदिर निर्माण के लिए भूमि सुरक्षित नहीं रखी गई, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। आस्था और प्रशासन के बीच छिड़े इस विवाद की पूरी जानकारी पढ़ें।

झालावाड़। राजस्थान के झालावाड़ जिले में आस्था और प्रशासनिक निर्णय के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। ग्राम गिन्दौर (झालरापाटन) में सदियों से पूजनीय भगवान श्री नृसिंह मंदिर की भूमि को प्रस्तावित नवीन साइबर थाने के लिए आवंटित किए जाने के निर्णय ने राठौर समाज के भीतर गहरे असंतोष और आक्रोश की ज्वाला भड़का दी है। अखिल भारतीय राठौर (तेली) समाज ने इस कदम को अपनी धार्मिक भावनाओं पर कुठाराघात बताते हुए जिला प्रशासन और राजस्थान सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए समाज के प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपकर स्पष्ट किया है कि खलिहान की जिस भूमि पर प्राचीन नृसिंह भगवान का मंदिर स्थित है, उसे किसी भी स्थिति में अन्य प्रयोजन के लिए स्वीकार नहीं किया जाएगा। विवाद का मुख्य केंद्र खसरा नंबर 1327/1301 है, जिसे पूर्व में ही साइबर थाने के लिए आवंटित किया गया था। किंतु अब प्रशासन द्वारा शेष बची भूमि, जिसमें खसरा नंबर 1323/1302 एवं 1325/1302 शामिल हैं, को भी थाने के विस्तार हेतु अधिग्रहित कर लिया गया है। उल्लेखनीय है कि इसी भूमि पर वर्तमान में मंदिर का अस्तित्व है और समाज द्वारा इसके जीर्णोद्धार का कार्य श्रद्धापूर्वक कराया जा रहा था।
राठौर समाज के प्रतिनिधियों का तर्क है कि इस स्थान से केवल उनकी ही नहीं, बल्कि समस्त ग्रामवासियों की गहरी आध्यात्मिक जड़ें जुड़ी हुई हैं। प्रतिवर्ष नवरात्रि के पावन पर्व पर यहाँ विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी आस्था प्रकट करते हैं। ऐसे में मंदिर की भूमि को पुलिस थाने के नाम स्थानांतरित करना समाज के लिए असहनीय हो गया है। उनकी प्रमुख मांग है कि नृसिंह भगवान मंदिर के निर्माण हेतु खसरा नंबरों सहित पर्याप्त भूमि आवंटित की जाए और भूमि का विधिवत सीमा ज्ञान कराकर उसे समाज को सौंपा जाए। समाज का कहना है कि यदि प्रशासन साइबर थाने को प्राथमिकता दे सकता है, तो जन आस्था के केंद्र मंदिर को भी उसी तर्ज पर प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान श्री नृसिंह भगवान मंदिर समिति के सदस्यों के साथ धीरज राठौर, अनिल राठौर, सुनील, ईश्वर, राधाकिशन, नवीन और दीपक राठौर सहित समाज के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। समाज ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों को नजरअंदाज किया, तो वे भविष्य में उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होंगे। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि यदि ऐसी स्थिति निर्मित होती है, तो इसकी समस्त जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। यह विवाद अब केवल भूमि आवंटन का नहीं, बल्कि झालावाड़ की धार्मिक विरासत और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच एक बड़े टकराव का रूप लेता जा रहा है।

Pratahkal Bureau
Pratahkal Bureau is the editorial team of Pratahkal News, dedicated to delivering accurate, timely, and unbiased news. Our Bureau focuses on verified reporting, in-depth analysis, and responsible journalism across politics, society, economy, and national affairs.
