कार्यशाला में 450 बंदियों की स्वास्थ्य जांच और एक्स-रे किए गए, जिसमें 68 संदिग्ध मरीजों के कफ सैंपल लेकर उपचार की प्रक्रिया शुरू की गई।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य

कार्यशाला का उद्देश्य कारागृह में निरुद्ध बंदियों के स्वास्थ्य की नियमित जांच कर टीबी रोग की शीघ्र पहचान एवं समयबद्ध उपचार सुनिश्चित करना रहा।


स्क्रीनिंग एवं जांच के आंकड़े

  • कार्यक्रम के दौरान कुल 450 बंदियों की टीबी स्क्रीनिंग की गई तथा सभी के चेस्ट एक्स-रे कराए गए।
  • स्क्रीनिंग के पश्चात 68 बंदियों में संदिग्ध लक्षण पाए जाने पर उनके स्पुटम (कफ) सैम्पल एकत्रित कर जांच हेतु प्रयोगशाला भेजे गए।

विशेषज्ञों द्वारा स्वास्थ्य परामर्श

इस अवसर पर टीबी एवं चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. काजी फैजानउल हक एवं चिकित्सा अधिकारी जेल डॉ. हरिओम मीणा द्वारा बंदियों की स्वास्थ्य जांच की गई। उन्होंने बंदियों को टीबी रोग के निम्नलिखित बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान की:

  • टीबी रोग के लक्षण
  • बचाव के तरीके
  • उपचार संबंधी जानकारी

कारागृह अधीक्षक का संबोधन

जिला कारागृह झालावाड़ के अधीक्षक निरंजन शर्मा ने बंदियों को संबोधित करते हुए कहा:

"क्षय रोग एक संक्रामक रोग है, जिसका समय पर पता लगाकर पूर्ण उपचार संभव है। यदि किसी को लगातार खांसी, बुखार, वजन में कमी या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें।"

सहयोग एवं उपलब्धि

कार्यशाला के सफल आयोजन में इन अधिकारियों व कार्मिकों का विशेष सहयोग रहा:

  • लोको उज्जवल सिंह (कारापाल)
  • अरविन्द कुमार परिहार (नर्सिंग ऑफिसर)
  • सुरेन्द्र सिंह (एसटीएस)
  • जितेन्द्र कुमार टेलर (लैब टेक्नीशियन)
  • लक्ष्मी गुर्जर (असिस्टेंट रेडियोग्राफर)
  • अनवर हुसैन

इस कार्यक्रम के माध्यम से कारागृह परिसर में स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा मिला तथा टीबी मुक्त भारत अभियान के लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया।

Pratahkal Bureau

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