झालावाड़ भाजपा कार्यकारिणी में मनीष चांदवाड को जिला उपाध्यक्ष बनाए जाने पर बवाल। भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों, नंदी शाला घोटाले और पाला बदलने की राजनीति के बीच झालरापाटन में कार्यकर्ताओं का आक्रोश बढ़ा। क्या प्रमोद जैन भाया के करीबियों को संगठन में जगह देना भाजपा को भारी पड़ेगा? पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

झालावाड़: भाजपा की नई कार्यकारिणी में 'दागदार' चेहरे को जगह, झालरापाटन में जनाक्रोश और चर्चाओं का बाजार गर्म

झालावाड़। राजस्थान के झालावाड़ जिला भाजपा की नई कार्यकारिणी की घोषणा के साथ ही राजनीतिक गलियारों में भूचाल आ गया है। विशेष रूप से झालरापाटन शहर के विवादित चेहरे मनीष चांदवाड को जिला उपाध्यक्ष बनाए जाने के निर्णय ने न केवल संगठन के निष्ठावान कार्यकर्ताओं को हतप्रभ किया है, बल्कि पूरे शहर में यह चर्चा का विषय बन गया है कि क्या भाजपा की 'चाल, चरित्र और चेहरा' वाली विचारधारा अब भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे व्यक्तियों के सामने नतमस्तक हो गई है।

वर्तमान में झालरापाटन नगर पालिका अध्यक्ष के पति मनीष चांदवाड की छवि पर विपक्ष ही नहीं, बल्कि अपनों ने भी कई गंभीर सवाल दागे हैं। आरोप है कि सत्ता सुख की खातिर उन्होंने कई बार पाला बदला। चर्चा है कि जब भाजपा में अवसर कम दिखे तो वे कांग्रेस के पाले में चले गए और पांच वर्षों तक वहां सक्रिय रहे। उस दौरान 'भारत माता की जय' के स्थान पर सोनिया गांधी के जयकारे लगाने वाले चांदवाड, सत्ता परिवर्तन होते ही पुन: भाजपा की शरण में आ गए। स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लग रहे हैं कि नगरपालिका चुनाव के दौरान जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रमोद जैन भाया की टीम को जवाबदेही सौंपी गई, जिसने पार्टी की मूल जड़ों को कमजोर करने का काम किया है।

चांदवाड का कार्यकाल विवादों और घोटालों की लंबी फेहरिस्त से घिरा नजर आता है। हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के कार्यक्रम में आए समर्थकों को कचरा ढोने वाले वाहनों में भोजन वितरण करने का प्रकरण राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहा, जिससे पार्टी की भारी किरकिरी हुई। इसके अलावा, बस स्टैंड से जाली चोरी का मामला हो या कृष्ण सागर से बरामद हुई जालियां, भ्रष्टाचार के आरोप हर जगह पीछा कर रहे हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की रडार पर भी एक ऐसा मामला है जिसमें कथित तौर पर 50 लाख रुपये के भूखंड को मात्र 5 लाख रुपये में आवंटित कर लाखों की बंदरबांट की गई।

पशु प्रेम के नाम पर बनाई गई नंदी शाला भी जांच के दायरे में है। सूत्रों का दावा है कि कांग्रेस शासन में प्रमोद जैन भाया द्वारा नंदी शाला के विकास के लिए दिए गए 3 करोड़ रुपये का कोई हिसाब-किताब नहीं है। कुव्यवस्था के चलते कई नंदियों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि शहर में आवारा नंदियों का आतंक बरकरार है। वहीं, नगर पालिका के भीतर बिजली उपकरण, टेंडर प्रक्रिया और पार्षदों के बोर्ड से जुड़े घोटालों की गूंज बार-बार सुनाई देती है। एक विचित्र मामला तो अध्यक्ष कक्ष के दरवाजे का भी सामने आया है, जहां सरकारी धन से बने दो दरवाजों में से एक के घर पर लगाए जाने की चर्चा सरेआम है।

इतना ही नहीं, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक मोक्षदायिनी की दुर्दशा को लेकर भी स्थानीय निवासियों में भारी रोष है। आरोप है कि मनीष चांदवाड ने अपने निजी हितों के लिए वार्ड के मतदाताओं और एक नगर सेठ तक को नहीं बख्शा, जिनसे काम के बदले ली गई कथित राशि आज तक नहीं लौटाई गई है। व्यक्तिगत रंजिश के चलते भाजपा के वरिष्ठ नेता निर्मल दुआ के पट्टे पर हस्ताक्षर न करना और नियमों को ताक पर रखकर सड़कों का निर्माण करना उनकी कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के वर्तमान जिला नेतृत्व ने ऐसे व्यक्ति को जिम्मेदारी देकर जनता की भावनाओं पर प्रहार किया है। चर्चा यह भी है कि यदि संजय जैन 'ताऊ' जिला अध्यक्ष होते, तो शायद ऐसे विवादित चेहरों की संगठन में एंट्री संभव नहीं थी। बहरहाल, कांग्रेस नेता प्रमोद जैन भाया के करीबी रहे व्यक्ति को भाजपा संगठन में उच्च पद मिलना आने वाले चुनावों में पार्टी के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है। जनता के बीच उपजा यह आक्रोश और 'चड्डी बदलने से दस्त नहीं रुकते' जैसी तल्ख टिप्पणियां इस बात का संकेत हैं कि झालरापाटन की राजनीति में आने वाले दिन बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।

Updated On 6 Jan 2026 5:10 PM IST
Pratahkal Bureau

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