झालावाड़ भाजपा कार्यकारिणी में 'दागदार' चेहरे की एंट्री: झालरापाटन में जनाक्रोश और कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष
झालावाड़ भाजपा जिला कार्यकारिणी में मनीष चांदवाड को उपाध्यक्ष बनाए जाने पर राजनीतिक बवाल। भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों, दल-बदल की राजनीति और जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी ने झालरापाटन में आक्रोश पैदा कर दिया है। कचरा वाहन में भोजन वितरण से लेकर नंदी शाला घोटाले तक, जानिए कैसे एक विवादित चेहरे की नियुक्ति ने भाजपा की साख को दांव पर लगा दिया है और प्रमोद जैन भाया के प्रभाव की चर्चा तेज कर दी है।

झालावाड़। भारतीय जनता पार्टी द्वारा हाल ही में घोषित जिला कार्यकारिणी ने झालावाड़ की राजनीति में एक नया विवाद छेड़ दिया है। विशेष रूप से झालरापाटन शहर से मनीष चांदवाड को जिला उपाध्यक्ष के पद पर आसीन किए जाने के फैसले ने न केवल जमीनी कार्यकर्ताओं को अचंभित किया है, बल्कि पूरे शहर में इस पर तीखी बहस छिड़ गई है। पार्टी की शुचिता और 'चाल-चरित्र-चेहरा' की दुहाई देने वाले संगठन के इस निर्णय पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या अब संगठन की जाजम पर भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे चेहरों को जगह दी जाएगी।
मनीष चांदवाड, जो वर्तमान में झालरापाटन चेयरमैन पति हैं, की राजनीतिक यात्रा दल-बदल और विवादों से भरी रही है। चर्चा है कि जब भाजपा में अवसर की कमी दिखी, तो उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया और पांच वर्षों तक सत्ता का सुख भोगा। उस दौरान उनके सुर 'भारत माता की जय' के बजाय सोनिया गांधी के गुणगान में लगे रहे, लेकिन सत्ता परिवर्तन होते ही उन्होंने पुनः भाजपा का चोला ओढ़ लिया। स्थानीय कार्यकर्ताओं का आरोप है कि नगरपालिका चुनावों के दौरान समर्पित भाजपाइयों को दरकिनार कर कांग्रेस नेता प्रमोद जैन भाया की टीम को नगरपालिका की कमान सौंपी गई, जिसके बाद से भ्रष्टाचार के गहरे पैर जमने शुरू हुए।
भ्रष्टाचार के आरोपों की सूची लंबी है। हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के कार्यक्रम के दौरान कचरा ढोने वाले वाहनों में भोजन वितरण का मामला राष्ट्रीय स्तर पर उछला, जिसने पार्टी की छवि को गहरा आघात पहुँचाया। इसके अलावा बस स्टैंड से जालियां चोरी होने और उन जालियों का कृष्ण सागर से बरामद होना, साथ ही पचास लाख के भूखंड को महज पांच लाख में आवंटित कर लाखों के गबन का मामला अभी भी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच की बाट जोह रहा है। नंदी शाला के निर्माण में भी बड़े घोटाले की सुगबुगाहट है; बताया जाता है कि प्रमोद जैन भाया द्वारा दिए गए तीन करोड़ रुपये के विकास कोष का कोई अता-पता नहीं है, जबकि कुप्रबंधन के कारण वहां कई गौवंश काल के गाल में समा चुके हैं।
व्यक्तिगत आचरण और कार्यशैली पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह हैं। बताया जाता है कि चेयरमैन कक्ष के दरवाजे के भुगतान से लेकर वार्ड के आम नागरिकों तक से लिए गए रुपयों की वापसी न होना उनकी छवि को धूमिल करता है। यहां तक कि भाजपा के ही वरिष्ठ नेता निर्मल दुआ के पट्टे पर अभी तक हस्ताक्षर न होना और अन्य गैर-कानूनी सड़क निर्माण कार्य उनकी मनमानी को दर्शाते हैं। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि यदि संजय जैन 'ताऊ' जिला अध्यक्ष होते, तो ऐसे तत्वों की संगठन में एंट्री मुमकिन नहीं थी। कार्यकर्ताओं का मानना है कि मनीष चांदवाड के रूप में वास्तव में प्रमोद जैन भाया की भाजपा संगठन में घुसपैठ हुई है, जो आगामी चुनावों में पार्टी के लिए आत्मघाती सिद्ध हो सकती है। जनता के बीच पनप रहा यह आक्रोश और 'चड्डी बदलने से दस्त नहीं रुकते' जैसे मुहावरे अब भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रहे हैं।

Pratahkal Bureau
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