जयपुर: सौर ऊर्जा से रोशन होगा ग्रामीण राजस्थान का भविष्य, 'सोलर दीदी' बनेंगी आत्मनिर्भरता की नई मिसाल
जयपुर में राजीविका और बयरफुट कॉलेज, तिलोनीया के बीच 'सोलर दीदी' प्रशिक्षण हेतु महत्वपूर्ण समझौता हुआ। इस पहल के तहत ग्रामीण महिलाओं को ४० दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण देकर सौर ऊर्जा तकनीशियन बनाया जाएगा। अतिरिक्त मुख्य सचिव श्रीमती श्रेया गुहा की उपस्थिति में हुए इस एमओयू का उद्देश्य महिलाओं को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और ग्रामीण राजस्थान में सौर प्रणालियों का सुदृढ़ रखरखाव सुनिश्चित करना है।

जयपुर, 06 जनवरी। राजस्थान के ग्रामीण अंचल की महिलाएं अब न केवल चूल्हा-चौका संभालेंगी, बल्कि सूरज की रोशनी से गांवों को रोशन करने वाली तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में भी अपनी पहचान स्थापित करेंगी। महिला सशक्तिकरण और हरित ऊर्जा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए मंगलवार को राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) और अजमेर के प्रसिद्ध बयरफुट कॉलेज, तिलोनीया (SWRC) के मध्य एक महत्वपूर्ण गैर-वित्तीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। जयपुर में आयोजित इस गरिमामयी समारोह ने प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं को 'सोलर दीदी' के रूप में एक नई पहचान देने की नींव रख दी है।
यह समझौता राजीविका की राज्य मिशन निदेशक नेहा गिरि और बयरफुट कॉलेज की निदेशक एवं सीईओ सौम्या किदाम्बी के बीच संपन्न हुआ। इस गौरवशाली क्षण की साक्षी ग्रामीण विकास विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव श्रीमती श्रेया गुहा बनीं, जिनकी उपस्थिति ने इस पहल के महत्व को और अधिक रेखांकित किया। इस अवसर पर विभाग की सचिव श्रीमती पुष्पा सत्यानी और राजीविका की परियोजना निदेशक (प्रशासन) श्रीमती प्रीती सिंह सहित राज्य परियोजना प्रबंधक एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण भी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस रणनीतिक साझेदारी को ग्रामीण विकास के लिए मील का पत्थर बताया।
इस अभिनव पहल का मुख्य केंद्र बिंदु ग्रामीण महिलाओं को "सोलर दीदी" के रूप में विकसित करना है। इसके तहत राजीविका के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी प्रतिभावान महिलाओं का चयन किया जाएगा, जिन्हें तिलोनीया स्थित बयरफुट कॉलेज में 40 दिवसीय गहन आवासीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह केवल एक किताबी ज्ञान नहीं होगा, बल्कि इसमें महिलाओं को सौर उपकरणों के संचालन, जटिल वायरिंग, ट्रबलशूटिंग, प्रिवेंटिव मेंटेनेंस और सुरक्षा मानकों का व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। फील्ड एक्सपोज़र के माध्यम से उन्हें वास्तविक चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार किया जाएगा, ताकि वे अपने क्षेत्र में एक कुशल तकनीशियन के रूप में सेवाएं दे सकें।
तकनीकी रूप से यह समझौता 'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' जैसी सरकारी योजनाओं को धरातल पर सफल बनाने में सहायक सिद्ध होगा। अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में सौर प्रणालियां खराब होने के बाद रखरखाव के अभाव में अनुपयोगी हो जाती हैं, लेकिन अब प्रशिक्षित 'सोलर दीदियाँ' ग्राम पंचायतों और सामुदायिक संस्थानों में इन प्रणालियों की समयबद्ध मरम्मत और ऊर्जा दक्षता सुनिश्चित करेंगी। इससे न केवल स्वच्छ ऊर्जा का प्रवाह बना रहेगा, बल्कि इन महिलाओं के लिए स्वरोजगार और सेवा-आधारित आय के नए द्वार भी खुलेंगे।
राजीविका और बयरफुट कॉलेज के बीच हुआ यह समन्वय राजस्थान के समावेशी विकास की एक नई पटकथा लिख रहा है। यह साझेदारी यह स्पष्ट करती है कि जब पारंपरिक ग्रामीण कौशल को आधुनिक तकनीक और संस्थागत सहयोग का साथ मिलता है, तो परिवर्तन की गति स्थायी हो जाती है। यह कदम न केवल ग्रामीण राजस्थान को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि सामाजिक और आर्थिक मोर्चे पर महिलाओं की भागीदारी को एक नए शिखर पर ले जाएगा।

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