जयपुर में गूंजा कर्मचारियों का हुंकार: संवादहीनता के खिलाफ शहीद स्मारक पर 36 घंटे का महा-उपवास शुरू
जयपुर के शहीद स्मारक पर अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ ने सरकार की संवादहीनता के खिलाफ 36 घंटे का उपवास शुरू किया है। प्रदेश अध्यक्ष महावीर शर्मा के नेतृत्व में वेतन विसंगति, संविदा नियमितीकरण और पुरानी पेंशन की सुरक्षा जैसी 11 सूत्री मांगों को लेकर कर्मचारी लामबंद हैं। यदि मांगें नहीं मानी गईं तो 12 जनवरी को जयपुर में 1 लाख कर्मचारियों की विशाल महारैली होगी।

जयपुर, 6 जनवरी। राजस्थान की राजधानी जयपुर का ऐतिहासिक शहीद स्मारक आज एक बार फिर राज्य सरकार के खिलाफ कर्मचारियों के आक्रोश का गवाह बना। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ की प्रांतीय कार्यकारिणी ने सरकार की कथित संवादहीनता और कर्मचारी विरोधी नीतियों के विरुद्ध मोर्चा खोलते हुए 36 घंटे के सामूहिक उपवास का शंखनाद कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष महावीर शर्मा और प्रदेश महामंत्री महावीर सिहाग के नेतृत्व में जुटे सैंकड़ों पदाधिकारियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी वाजिब मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होता, यह संघर्ष थमने वाला नहीं है।
राज्य सरकार द्वारा बजट घोषणाओं के बावजूद अधीनस्थ सेवाओं के कर्मचारियों का कैडर पुनर्गठन न करने और वेतन विसंगतियों को अनसुना करने से कर्मचारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है। आंदोलन की गंभीरता को रेखांकित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष महावीर शर्मा ने कहा कि सरकार की संवेदनहीनता ने हमें इस कड़ाके की ठंड में उपवास पर बैठने को मजबूर किया है। संविदा कार्मिकों के नियमितिकरण, एक पारदर्शी स्थानांतरण नीति की बहाली और पुरानी पेंशन योजना (OPS) के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ के विरोध में कर्मचारी समाज अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है।
महासंघ के सात संकल्पों और 11 सूत्री मांग पत्र को लेकर शुरू हुए इस आंदोलन की पृष्ठभूमि काफी समय से तैयार की जा रही थी। प्रदेश महामंत्री महावीर सिहाग और वरिष्ठ उपाध्यक्ष तेज सिंह राठौड़ ने बताया कि इस उपवास से पूर्व महासंघ के पदाधिकारियों ने प्रदेश के सभी जिलों में 'संघर्ष चेतना यात्रा' निकालकर कर्मचारियों को लामबंद किया था। 14 दिसंबर को जयपुर में आयोजित महाधिवेशन के माध्यम से सरकार को चेतावनी दी गई थी, लेकिन शासन की ओर से संवाद का कोई रास्ता नहीं खोले जाने के कारण आंदोलन को धार देना अनिवार्य हो गया।
महासंघ ने अपनी मांगों में पदोन्नति और वेतन विसंगतियों को दूर करने, संविदा कर्मियों को स्थायी करने और विभिन्न विभागों, निगमों व बोर्डों में बढ़ते निजीकरण पर रोक लगाने जैसे ज्वलंत मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। इसके साथ ही कर्मचारियों के मान-सम्मान और स्वाभिमान की सुरक्षा को आंदोलन का मूल आधार बनाया गया है। महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार अब भी नहीं जागी, तो आगामी 12 जनवरी को जयपुर में एक विशाल 'चेतावनी महारैली' आयोजित की जाएगी, जिसमें प्रदेश के 41 जिलों से एक लाख से अधिक कर्मचारी अपनी ताकत का प्रदर्शन करेंगे।
इस महत्वपूर्ण उपवास कार्यक्रम में कर्मचारी एकता की मिसाल पेश करते हुए महासंघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के.के. गुप्ता, ओम प्रकाश शर्मा, आयुदान सिंह कविया, वरिष्ठ उपाध्यक्ष तेज सिंह राठौड़, बन्ना राम चौधरी, अर्जुन शर्मा, अजय सैनी, सज्जन सिंह, दीपक शर्मा, महेंद्र तिवाड़ी, मानसिंह, लेखराज वर्मा, मोहन मीणा, सीताराम जी सलोनिया, चंदर शेखर जी गुर्जर, प्रहलाद जाट, शिवराज चौधरी, दीपक खींची, जितेंद्र कसवां, दिलीप सिंह राजावत, रामकिशोर मीणा, हिमांशु यादव और प्रदेश प्रवक्ता गोविंद नाटानी सहित कई दिग्गज नेताओं ने शिरकत की। कर्मचारियों का यह मौन उपवास अब राजस्थान की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर रहा है, जो आने वाले दिनों में एक बड़े जन-आंदोलन की आहट दे रहा है।

Pratahkal Bureau
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