ईरान में बढ़ते विरोध और व्यापक प्रदर्शन के बीच यह चर्चा तेज़ हो गई है कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई देश छोड़कर भागने की योजना बना रहे हैं। आर्थिक असंतोष से शुरू हुआ आंदोलन अब सत्ता के खिलाफ विद्रोह में बदल चुका है, और खामेनेई की संभावित पलायन योजना ने राजनीतिक संकट को और गहरा कर दिया है।

मध्य पूर्व की राजनीति में इन दिनों तेहरान की सड़कों पर उठती आवाज़ें और सत्ता के गलियारों में फुसफुसाती अफ़वाहें दोनों ही विश्वभर का ध्यान अपनी ओर खींच चुकी हैं। ईरान में व्यापक विरोध प्रदर्शन देश को अंदर से हिला रहे हैं, और अब यह खबरें भी उभर रही हैं कि देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई देश छोड़कर भागने की योजना बना रहे हैं — एक ऐसे समय में जब आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक संकट ने ईरान की स्थितियों को बेकाबू कर दिया है।

ईरान में विरोध प्रदर्शन मूल रूप से बढ़ती महँगाई, बेरोज़गारी, गिरती रियाल (मुद्रा) और सामाजिक असंतोष के कारण शुरू हुए थे। जल्द ही यह सिर्फ़ आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने “तानाशाह मुर्दाबाद” और “खामनेई मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाए — सीधे तौर पर सुप्रीम लीडर के शासन को चुनौती देते हुए।

हालांकि ईरानी मीडिया और सरकार इन कहानियों को अक्सर “विदेशी षड्यंत्र” और “दंगाई तत्वों” की प्रेरणा बताते हैं, लेकिन घरेलू परिस्थितियाँ इतनी गंभीर हैं कि आम जनता एवं अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में यह संकेत मिलता है कि खामेनेई की हालत अब सत्ता के सबसे बड़े संकट का सामना कर रही है।

खामेनेई का ‘प्लान बी’ — भागने की अफ़वाहें

कुछ पश्चिमी खुफिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अगर ईरान में जारी विरोध और असंतोष फैलता रहा और सुरक्षा बलों ने शासन का समर्थन करना बंद कर दिया, तो खामेनेई के पास एक संभावित “प्लान बी” है — जो उन्हें मॉस्को, रूस की ओर भागने का मार्ग देता है। इस योजना में उनके नज़दीकी सहयोगियों, परिवार के सदस्यों और समर्थन समूह के साथ देश छोड़ने की तैयारी शामिल बताई गई है।

ख़बरों के अनुसार, यह योजना इतनी गंभीर है कि उसमें लगभग 20 महत्वपूर्ण सदस्यों, उनके करीबी सहयोगियों और परिवार शामिल हैं — एक संकेत जिसे कई विश्लेषक ईरान के नेतृत्व में विश्वास की कमी और सुरक्षा का संकट दोनों के रूप में देखते हैं।

विरोध प्रदर्शन का माहौल और कारण

विरोध की शुरुआत आर्थिक कारणों से हुई, लेकिन जल्दी ही यह राजनीतिक स्वरुप लेने लगा। कई शहरों में लोग सड़कों पर उतरकर राजनीतिक परिवर्तन और सत्तारूढ़ शैली के ख़िलाफ़ नारे लगा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों के नारे अब सिर्फ़ आर्थिक असंतोष तक सीमित नहीं हैं — वे सीधे खामेनेई के नेतृत्व और शासन प्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।

इन प्रदर्शनों ने 50 से अधिक शहरों में अपनी पैठ बना ली है, जिसमें तेहरान, मशहद, क़ोम, इस्फहान जैसे प्रमुख केंद्र शामिल हैं। कई जगह प्रदर्शनकारी मृतकों के अंतिम संस्कारों में भी सत्ता विरोधी नारे लगा रहे हैं — एक ऐसे बदलाव का संकेत, जहाँ विरोध अब जनाक्रोश और राष्ट्रीय असंतोष का रूप ले चुका है।


सरकार का जवाब और खामेनेई की प्रतिक्रिया

खामेनेई और ईरानी नेतृत्व ने विरोध को विदेशी तत्वों और दंगाइयों के प्रयास के रूप में पेश किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि सड़कों पर उठ रही आवाज़ों से निपटने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे और “दंगों” को “उनकी जगह” बताया जाएगा।


इसके अलावा, ईरानी नेतृत्व अमेरिका और इज़रायल को भी विरोध के पीछे की वजह बताए जाने वाले बाहरी हस्तक्षेप का आरोप लगा रहा है, जो देश को अंतर्गत टकराव के बजाय वैश्विक दांव‑पेंच के रूप में प्रस्तुत करती है।


क्या सच में खामेनेई भागेंगे?

अब तक के दस्तावेज़ और रिपोर्टों के आधार पर खामेनेई के भागने की अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि मीडिया रिपोर्टें और खुफिया आकलन यह संकेत देते हैं कि अगर शासन की पकड़ ढीली होती है और सुरक्षा बल शासन के साथ नहीं रहते, तो खामेनेई के पास बचा हुआ विकल्प ही देश छोड़ने का होगा — एक संकेत जो ईरान की राजनीति के भविष्य पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।

ईरान के लिए एक निर्णायक मोड़

ईरान में विरोध प्रदर्शन और खामेनेई के भागने की संभावनाएँ केवल खबरों तक सीमित नहीं हैं — वे देश की राजनीतिक पहचान, सामाजिक धरोहर और आर्थिक स्थिरता के लिए एक बड़ा परीक्षण बन चुकी हैं। अगर खामेनेई वास्तव में देश छोड़ने की योजना बना रहे हैं, तो यह न सिर्फ ईरान के इतिहास में एक नया अध्याय खुलेगा, बल्कि मध्य पूर्व की राजनीति और विश्व शक्तियों के बीच समीकरणों को भी बदल सकता है।

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