संबल में चोरी-चापेमारी का कहर: रोज की लूट, रोज का डर — क्या कानून सिर्फ किताबों में रह गया?
संबल में चोरी‑चापेमारी की बढ़ती घटनाओं ने स्थानीय समाज में चिंता बढ़ा दी है। बिजली चोरी के खिलाफ बड़े पैमाने पर छापेमारी से लेकर घरेलू चोरी तक, चोरी एक गंभीर समस्या बन चुकी है। पुलिस और प्रशासन की कार्रवाइयाँ जारी हैं, लेकिन कानून‑व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जनता की भी भागीदारी आवश्यक है।

उत्तर प्रदेश के संबल जिले में चोरी और चापेमारी की घटनाओं ने हाल‑फिलहाल फिर से सुर्खियाँ बटोरी हैं और स्थानीय निवासियों की चिंता को बढ़ा दिया है। चाहे वह घरेलू सामान की चोरी हो, बिजली चोरी के खिलाफ हुई बड़ी कार्रवाई हो, या नन्हें‑मोटे अपराधों के बढ़ते मामले — हर स्तर पर चोरी जैसे अपराधों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और जनता की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
सबसे पहले, धनारी के भागनगर में बिजली चोरी के खिलाफ चलाए गए अभियान ने इस बात को उजागर किया कि चोरी और अवैध कनेक्शन कितने व्यापक स्तर पर हो रहे हैं। बिजली विभाग एवं पुलिस द्वारा सुबह‑सुबह 180 सदस्यीय टीम के साथ 150 से अधिक घरों की जांच की गई, जिसमें अवैध कनेक्शन पकड़े गए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बिजली चोरी से सरकार को भारी आर्थिक नुकसान होता है, इसलिए इस तरह की कार्रवाई समय‑समय पर की जाएगी। इस छापेमारी ने स्थानीय ग्रामीणों में भी खलबली मचा दी और लोगों को वैध कनेक्शन लेने के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया।
संबल व आस‑पड़ोस के इलाकों में चोरी‑चापेमारी की घटनाएँ केवल बिजली चोरी तक सीमित नहीं हैं। पुलिस के पास पिछले कुछ महीनों में चोरी से जुड़े कई मामलों की तहरीरें आयीं हैं, जिनमें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोग प्रभावित हुए हैं। चोरी के मामलों में घरों से जेवरात, नकदी और अन्य कीमती सामान चोरी होना शामिल है, जिससे सामान्य परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। हालांकि यह पूरी तरह से सम्बल जिले से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट नहीं है, लेकिन पूरे प्रदेश में चोरी के बढ़ते मामलों ने स्थानीय प्रशासन को अलर्ट किया है।
चोरी‑चापेमारी की समस्या का कारण न सिर्फ आर्थिक असमानता और बेरोज़गारी है, बल्कि सामाजिक ढांचों में कमजोरी और कानून के प्रति सम्मान की कमी भी है। अपराधी अक्सर रात के समय घरों में सेंध लगाकर या बिजली के अवैध कनेक्शन जोड़कर सरकार की संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं। उदाहरण के लिए, अन्य हिस्सों में थाना क्षेत्र की रिपोर्टों में सामने आया है कि चोर घरों में घुसकर सोने‑चांदी के आभूषण, नकदी, वाहन और इलेक्ट्रॉनिक सामान लेकर फरार हो रहे हैं।
स्थानीय पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चोरी जैसे अपराधों के खिलाफ प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी, सीसीटीवी फुटेज विश्लेषण, और जनसमुदाय सहभागिता को बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि चोरों को जल्द से जल्द पकड़कर न्यायिक प्रक्रिया के लिए पेश किया जा सके। इसी क्रम में कई बार करवाई में चोरी की पूरी संपत्ति बरामद होने और चोरों की गिरफ्तारी जैसी सकारात्मक खबरें भी सामने आई हैं।
हालांकि चोरी की वारदातें भयावह हैं, लेकिन इससे भी बड़ी समस्या यह है कि आम जनता कभी‑कभी ऐसे मामलों को “सामान्य” समझने लगती है। यही मानसिकता चोरों को पराक्रम की प्रेरणा दे सकती है। इसीलिए यह जरूरी है कि सरकार और समाज मिलकर सुरक्षा उपायों, जन जागरण अभियानों, और सख्त न्यायिक दंड की दिशा में ठोस कदम उठाएं।
न सिर्फ पुलिस बल, बल्कि स्थानीय नागरिकों को भी चौकस रहने की जरूरत है। समय‑समय पर पड़ोसियों के बीच सहयोग, संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्टिंग और आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाने से चोरी जैसे मामलों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
भारतीय कानून के तहत चोरी (चोरी/चापेमारी) एक गंभीर अपराध है और इसे रोकने के लिए सरकार लगातार कानूनों को सुदृढ़ कर रही है। यदि समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़े और लोग अपने घरों तथा सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहें, तो चोरी पर नियंत्रण पाना आसान हो सकता है।
संबल और आसपास के इलाकों में चोरी‑चापेमारी के बढ़ते मामलों ने यह दिखाया है कि कानून‑व्यवस्था की मजबूती, प्रौद्योगिकी का उपयोग, और समुदाय सहभागिता ही इस समस्या का समाधान हो सकते हैं। जहां एक ओर पुलिस छापेमारियों और चोरों की गिरफ्तारी में जुटी है, वहीं जनता की जागरूकता और उत्तरदायित्व भी अपराध को रोकने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

