ईरान-इजरायल युद्ध में हिजबुल्लाह की एंट्री से हड़कंप! खामेनेई की मौत के बाद लेबनान से दागे गए रॉकेट। मिडिल ईस्ट में महाजंग और तेल संकट की पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

Iran-Israel war : पश्चिम एशिया इस वक्त बारूद के ऐसे ढेर पर बैठा है, जहां से उठने वाली लपटें पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लेने को बेताब हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत और उनके परिवार के सफाए के बाद प्रतिशोध की ज्वाला भड़क उठी है। जिस वक्त दुनिया होली के रंगों में डूबने की तैयारी कर रही थी, मिडिल ईस्ट का आसमान मिसाइलों और रॉकेटों की 'खूनी दिवाली' से लाल हो उठा है। अमेरिका और इजरायल के विनाशकारी हवाई हमलों के जवाब में अब ईरान का सबसे घातक मोहरा 'हिजबुल्लाह' अपनी लंबी खामोशी तोड़कर जंग के मैदान में कूद गया है। लेबनान स्थित इस लड़ाकू समूह की एंट्री ने इस युद्ध को एक ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया है, जहां से वापसी का रास्ता केवल तबाही की ओर जाता है।

हिजबुल्लाह का प्रहार और इजरायल की सरप्राइज एंट्री :

सालों तक ईरान द्वारा पाले-पोसे गए हिजबुल्लाह ने अपनी 'कुंभकरण' वाली नींद को त्यागते हुए सोमवार सुबह इजरायल के प्रमुख शहर हाइफा पर छह रॉकेट दागकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। इजरायली रक्षा बल (IDF) ने इस हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि लेबनान की ओर से दागे गए इन रॉकेटों के कारण उत्तरी इजरायल में सायरन गूंज उठे। हालांकि, इजरायल के आयरन डोम ने इन खतरों को बीच हवा में ही नाकाम करने का दावा किया है, लेकिन 2024 के सीजफायर के बाद लेबनान की सीमा से हुआ यह पहला बड़ा हमला इजरायल के लिए एक गंभीर चेतावनी है। अब तक पर्दे के पीछे रहने वाला यह समूह अब सीधे तौर पर तेहरान के साथ मिलकर इजरायल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की रणनीति तैयार कर रहा है।

बढ़ता संघर्ष और वैश्विक संकट का साया :

ईरान-इजरायल युद्ध अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा है। ईरान ने अपनी 'एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस' को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। तेहरान ने न केवल तेल अवीव को निशाना बनाया है, बल्कि मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी एयरबेस पर भी भीषण हमले किए हैं। इस संघर्ष में पहली बार अमेरिका ने तीन सैनिकों की मौत की आधिकारिक पुष्टि की है, जो वाशिंगटन के लिए इस जंग में एक बड़ा झटका है। युद्ध के इस विस्तार ने निम्नलिखित वैश्विक चिंताओं को जन्म दिया है:

  • आर्थिक अस्थिरता : युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है।
  • क्षेत्रीय सुरक्षा : लेबनान और सीरिया जैसे देशों की भागीदारी से पूरे अरब जगत की स्थिरता खतरे में है।
  • राजनयिक विफलता : संयुक्त राष्ट्र (UN) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आपात बैठक बुलाई है, लेकिन जमीनी हालात बिगड़ते जा रहे हैं।

वैधता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया :

ईरान के नए नेतृत्व ने इस युद्ध को अस्तित्व की लड़ाई करार दिया है। अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के बीच, अमेरिका और इजरायल इसे आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई बता रहे हैं, जबकि ईरान इसे अपनी संप्रभुता की रक्षा कह रहा है। हिजबुल्लाह, जिसे पश्चिमी देश एक आतंकी संगठन मानते हैं, अब ईरान की अघोषित सेना के रूप में कार्य कर रहा है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और हिजबुल्लाह के बीच का तालमेल यह संकेत दे रहा है कि आगामी दिनों में इजरायल को दोहरे मोर्चों—उत्तर में लेबनान और पूर्व में ईरान—से निपटने के लिए तैयार रहना होगा।

यह महासंग्राम अब उस दहलीज पर है जहां एक छोटी सी चूक तीसरे विश्व युद्ध का बिगुल फूंक सकती है। पूरी दुनिया की नजरें अब ईरान के नए नेतृत्व और इजरायल की अगली जवाबी कार्रवाई पर टिकी हैं।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

Next Story