ईरान-इजरायल युद्ध के बीच फंसे सैकड़ों भारतीय छात्रों ने पीएम मोदी से एयरलिफ्ट की गुहार लगाई है। हमलों और बदहाली के बीच दूतावास की मदद जारी। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

US-Israel Air Strikes 2026 : पश्चिम एशिया में तनाव ने एक विनाशकारी मोड़ ले लिया है। 28 फरवरी, 2026 को ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए भीषण हवाई हमलों ने पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक दिया है। इस संघर्ष के बीच ईरान में पढ़ रहे सैकड़ों भारतीय छात्र मौत के साये में जीने को मजबूर हैं। तेहरान और अन्य शहरों से आ रही खबरें विचलित करने वाली हैं, जहाँ मिसाइलों की गड़गड़ाहट और संचार व्यवस्था ठप होने के बीच छात्र बंकरों में शरण लिए हुए हैं।

युद्ध का तांडव और बदहवास छात्र :

ईरान द्वारा इजरायली हमलों के जवाब में की गई मिसाइल जवाबी कार्रवाई ने स्थिति को और अधिक भयावह बना दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, इन हमलों में नागरिक हताहत हुए हैं, जिसमें एक लड़कियों के स्कूल पर हुआ हमला भी शामिल है, जिससे छात्रों के बीच दहशत का माहौल है। ईरान के विभिन्न विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि संचार नेटवर्क बार-बार बाधित हो रहा है और किराने जैसी बुनियादी वस्तुओं की किल्लत शुरू हो गई है। डर और अनिश्चितता के इस माहौल में, 'ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन' (AIMSA) और 'जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन' (JKSA) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप करने और छात्रों को सुरक्षित निकालने (Evacuation) की अपील की है।

चेतावनी और परीक्षा के बीच का द्वंद्व :

गौरतलब है कि भारतीय दूतावास ने 5 जनवरी, 14 जनवरी और हाल ही में 23 फरवरी को एडवाइजरी जारी कर छात्रों को ईरान छोड़ने का आग्रह किया था। इसके बावजूद, एक बड़ी संख्या में छात्र वहां रुक गए। इसकी मुख्य वजह मार्च में होने वाली उनकी वार्षिक परीक्षाएं थीं। छात्रों को डर था कि अगर वे बीच में पढ़ाई छोड़ते हैं, तो उनका पूरा शैक्षणिक वर्ष बर्बाद हो जाएगा। अब, कश्मीर से लेकर देश के अन्य हिस्सों में रह रहे छात्रों के परिवार अपनों की सुरक्षा के लिए सरकार की ओर देख रहे हैं। हालांकि, जनता के बीच इस मुद्दे पर राय विभाजित है—जहाँ कुछ लोग दूतावास की चेतावनियों को नजरअंदाज करने के लिए छात्रों की आलोचना कर रहे हैं, वहीं अन्य मानवीय आधार पर सहानुभूति और तत्काल सहायता की मांग कर रहे हैं।



राजनयिक प्रयास और सरकारी रुख :

भारत का विदेश मंत्रालय (MEA) इस संवेदनशील स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए है। मंत्रालय ने सभी पक्षों से संयम बरतने का आग्रह किया है और ईरान में फंसे भारतीयों के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। वर्तमान में ईरानी हवाई क्षेत्र (Airspace) बेहद जोखिम भरा बना हुआ है, जिससे निकासी अभियान में तकनीकी चुनौतियां आ रही हैं। भारत सरकार वर्तमान में ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय कर रही है ताकि सुरक्षित गलियारा तैयार किया जा सके।

इस संकट ने एक बार फिर युद्धग्रस्त क्षेत्रों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की जटिलताओं को उजागर कर दिया है। आने वाले कुछ घंटे इन छात्रों के भविष्य और उनकी सुरक्षित वतन वापसी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाले हैं।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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