"दिलवा धक-धक करत है..." कुवैत में फंसा बिहार का 'लाल', रोहित कुमार ने PM मोदी को लगाई युद्ध रुकवाने की गुहार
कुवैत में भीषण युद्ध के बीच फंसे बिहार के रोहित कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से युद्ध रुकवाने की भावुक अपील की है। "दिलवा धक-धक करत है" के संदेश के साथ वायरल हुए इस वीडियो ने खाड़ी देशों में फंसे लाखों भारतीयों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानें कैसे मौत के साये में बैठा एक भारतीय मजदूर अब पीएम मोदी से शांति और जीवन की भीख मांग रहा है।

मिडिल ईस्ट में मचे भीषण युद्ध के हाहाकार और आसमान से बरसती मिसाइलों के बीच एक ऐसी आवाज गूंजी है, जिसने पूरे भारत को झकझोर कर रख दिया है। "साहब, यहाँ दिलवा धक-धक करत है...", यह शब्द हैं कुवैत में रोजी-रोटी कमाने गए बिहार के लाल रोहित कुमार के, जो इस समय वैश्विक संघर्ष की आग में झुलस रहे खाड़ी देश के एक बंकरनुमा कमरे में कैद हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो संदेश में रोहित ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से युद्ध रुकवाने और शांति स्थापित करने की ऐसी भावुक अपील की है, जो अब सोशल मीडिया पर एक बड़ी मुहिम का रूप ले चुकी है।
भीषण धमाकों और सायरन की आवाजों के बीच रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो में रोहित कुमार की आंखों का खौफ साफ देखा जा सकता है। रोहित ने प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि स्थिति अब उनके नियंत्रण से बाहर हो चुकी है और हर बीतते घंटे के साथ मौत का खतरा बढ़ता जा रहा है। उन्होंने अपने संदेश में भारत की वैश्विक शक्ति और प्रधानमंत्री की कूटनीतिक क्षमता पर भरोसा जताते हुए आग्रह किया कि दुनिया के शक्तिशाली नेताओं को मिलकर इस विनाशकारी संघर्ष को तुरंत रोकना चाहिए। रोहित की यह अपील केवल उनकी अपनी जान बचाने के लिए नहीं, बल्कि कुवैत और आसपास के देशों में फंसे लाखों भारतीय कामगारों की सुरक्षा का एक सामूहिक स्वर बनकर उभरी है।
इस घटना के सामने आने के बाद प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं गहरी हो गई हैं। कूटनीतिक गलियारों में भी इस वीडियो की चर्चा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर उन नागरिकों की जमीनी हकीकत बयां कर रहा है जो युद्ध क्षेत्र में सबसे निचले स्तर पर काम कर रहे हैं। हालांकि विदेश मंत्रालय और कुवैत स्थित भारतीय दूतावास लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं और नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है, लेकिन रोहित कुमार जैसे हजारों युवाओं का धैर्य अब जवाब दे रहा है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, युद्ध की विभीषिका के कारण कई क्षेत्रों में संचार और रसद की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है, जिससे इन मजदूरों की स्थिति और भी विकट हो गई है।
रोहित कुमार की यह पुकार केवल एक व्यक्ति का डर नहीं है, बल्कि यह उन हजारों परिवारों की चीख है जो बिहार और उत्तर प्रदेश के छोटे गांवों में बैठकर टीवी स्क्रीन पर अपने अपनों की सलामती की दुआ कर रहे हैं। अब सबकी निगाहें भारत सरकार और प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीतिक पहल पर टिकी हैं कि क्या भारत एक बार फिर वैश्विक शांति दूत बनकर उभरेगा और खाड़ी देशों में फंसे अपने 'लालों' को इस बारूद के ढेर से सुरक्षित निकाल पाएगा। यह वीडियो संदेश न केवल एक अंतरराष्ट्रीय संकट का मानवीय चेहरा है, बल्कि यह उम्मीद की उस आखिरी किरण का प्रतीक है जो एक आम नागरिक अपने देश के नेतृत्व में देखता है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
