अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत को चेतावनी दी कि रूस से तेल की खरीद सीमित न करने पर अमेरिकी आयात शुल्क बढ़ सकता है। भारत ने दिसंबर 2025 तक रूस से तेल आयात घटाया, लेकिन अमेरिकी दबाव और घरेलू ऊर्जा जरूरतों के बीच संतुलन चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत को रूस से तेल की खरीद को सीमित न करने पर संभावित उच्चतर अमेरिकी आयात शुल्क की चेतावनी दी है। यह बयान उन्होंने अमेरिकी सीनेट सदस्य लिंडसे ग्राहम के साथ बातचीत के दौरान दिया। ट्रम्प ने भारत की रूस से तेल आयात में कमी को अपनी “कूटनीतिक सफलता” बताया और चेतावनी दी कि यदि नई दिल्ली ने इस खरीद को और कम नहीं किया, तो अमेरिका कड़े आर्थिक कदम उठा सकता है।

ट्रम्प ने दावा किया कि भारत ने उनके दबाव में आकर दिसंबर 2025 तक रूस से तेल की आयात मात्रा 1.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन से घटाकर 1.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन कर दी। उन्होंने कहा, “मोदी चाहते थे कि मैं खुश रहूँ। उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं था, इसलिए यह महत्वपूर्ण था कि मैं खुश रहूँ।” यह बयान अमेरिकी और भारतीय कूटनीतिक संबंधों में चर्चा का विषय बन गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह चेतावनी उस समय आई जब अमेरिका ने पहले से ही भारत के कई उत्पादों पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगा रखा है। यह कदम मुख्य रूप से रूस की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने और यूक्रेन युद्ध में रूस के संसाधनों को सीमित करने के अमेरिकी प्रयासों के अंतर्गत आता है। भारत में राजनीतिक हलकों में इस बयान ने हलचल पैदा कर दी है। विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका के दबाव में भारत अपनी ऊर्जा स्वतंत्रता पर समझौता कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम भारतीय राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है और यह केवल अमेरिकी मांगों को पूरा करने की कोशिश है।

इसके बावजूद, भारत के लिए यह एक जटिल स्थिति है। देश को सस्ते ऊर्जा स्रोतों की आवश्यकता है और घरेलू ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक बहुपक्षीय संबंध बनाए रखना भी आवश्यक है। अमेरिकी तेल आयात बढ़ाना, रूस से तेल की खरीद को घटाना और चीन व अन्य देशों के साथ रणनीतिक रिश्ते बनाए रखना—यह सभी भारत के लिए संतुलन बनाए रखने की चुनौती बन गया है।

वाणिज्य मंत्रालय और ऊर्जा विभाग की जानकारी के अनुसार, भारत ने पिछले वर्ष रूस से तेल आयात में कुछ कटौती की है, लेकिन पूरी तरह से रोक नहीं लगाई है। भारतीय नीति निर्माताओं का कहना है कि ऊर्जा की लागत और देश की विकास दर को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प की चेतावनी न केवल आर्थिक दबाव है बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय राजनयिक संदेश भी है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका अपनी वैश्विक नीतियों के लिए सहयोगी देशों पर प्रभाव डालने के लिए तैयार है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मामले ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि क्या ऊर्जा सुरक्षा के लिए देशों को अपनी स्वतंत्र निर्णय क्षमता से समझौता करना चाहिए। भारत जैसे उभरते हुए अर्थव्यवस्था वाले देश को अपने घरेलू और वैश्विक हितों के बीच सावधानीपूर्वक संतुलन बनाना होगा। ट्रम्प की चेतावनी ने एक बार फिर वैश्विक तेल व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत की भूमिका को उजागर किया है। यह घटना यह भी दर्शाती है कि वैश्विक राजनीति में निर्णय केवल घरेलू हितों से नहीं बल्कि बड़े भू-राजनीतिक दबावों और गठबंधनों से प्रभावित होते हैं।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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