अमेरिका में आधी सदी बाद पहली बार प्रवासी आबादी में गिरावट दर्ज की गई है। सख्त आव्रजन नीतियों, बढ़ते निर्वासन, हिरासत मामलों और श्रम बाजार पर पड़ते असर ने इस बदलाव को ऐतिहासिक बना दिया है, जिसका प्रभाव अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक नीति पर साफ दिख रहा है।

पिछले कई दशकों से निरंतर बढ़ती रही अमेरिका की प्रवासी आबादी में अब एक ऐतिहासिक मोड़ दर्ज किया गया है। आधी सदी से अधिक समय बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब देश की विदेशी मूल की जनसंख्या में गिरावट दर्ज की गई है। यह बदलाव न केवल जनसांख्यिकीय आंकड़ों तक सीमित है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव अमेरिकी श्रम बाजार, आव्रजन नीति और सामाजिक विमर्श पर भी पड़ता दिख रहा है।

हालिया आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 की शुरुआत में अमेरिका में प्रवासियों की संख्या रिकॉर्ड 5.33 करोड़ तक पहुंच गई थी। लेकिन कुछ ही महीनों में यह आंकड़ा घटकर लगभग 5.19 करोड़ रह गया। इस गिरावट के साथ ही कुल अमेरिकी आबादी में प्रवासियों की हिस्सेदारी भी कम हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव वैश्विक प्रवासन प्रवृत्तियों, सख्त घरेलू नीतियों और प्रशासनिक फैसलों का संयुक्त परिणाम है।

इस गिरावट का सबसे प्रत्यक्ष असर श्रम बाजार पर देखने को मिल रहा है। अमेरिका की अर्थव्यवस्था लंबे समय से प्रवासी श्रमिकों पर निर्भर रही है, विशेष रूप से निर्माण, कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं और तकनीकी क्षेत्रों में। प्रवासियों की संख्या में कमी से कई उद्योगों में श्रमिकों की उपलब्धता प्रभावित हुई है, जिससे उत्पादन, सेवाओं और आर्थिक विकास की गति पर दबाव बढ़ा है। श्रम बल में आई इस कमी को लेकर आर्थिक संस्थानों ने भविष्य में रोजगार और उत्पादकता से जुड़े जोखिमों की ओर भी संकेत किया है।

इसी दौरान प्रवर्तन एजेंसियों की गतिविधियों में तेज़ी आई है। आव्रजन और सीमा सुरक्षा से जुड़ी कार्रवाइयों में वृद्धि के चलते हिरासत और निर्वासन के मामलों में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। हिरासत केंद्रों में बंद प्रवासियों की संख्या रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है, जिनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी है जिनका कोई गंभीर आपराधिक इतिहास नहीं है। इन परिस्थितियों ने मानवाधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों के बीच चिंता बढ़ा दी है।

निर्वासन की प्रक्रिया भी पहले की तुलना में अधिक सख्त और तेज़ हुई है। प्रशासनिक आदेशों और आंतरिक प्रवर्तन अभियानों के चलते कई परिवारों के विभाजन और कार्यबल से अचानक बाहर होने की घटनाएं सामने आई हैं। इसके साथ ही वीज़ा प्रक्रियाओं में लंबित मामलों और कानूनी अनिश्चितताओं ने भी प्रवासियों के बीच असुरक्षा की भावना को गहरा किया है।

नीतिगत स्तर पर यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में बना हुआ है। एक ओर सरकार प्रवर्तन को कानून-व्यवस्था से जोड़कर देख रही है, वहीं दूसरी ओर अदालतों में कई मामलों में इन फैसलों को चुनौती दी गई है। कुछ न्यायिक आदेशों ने अस्थायी सुरक्षा दर्जा प्राप्त प्रवासियों को राहत दी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आव्रजन नीति केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि संवैधानिक और कानूनी विमर्श का भी विषय बनी हुई है।

सार्वजनिक राय में भी धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां पहले आव्रजन को लेकर चिंता चरम पर थी, वहीं अब यह मुद्दा अपेक्षाकृत संतुलित नजरिए से देखा जाने लगा है। फिर भी, प्रवासी आबादी में आई यह ऐतिहासिक गिरावट अमेरिका के सामाजिक ताने-बाने और आर्थिक भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत बनकर उभरी है। यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में आव्रजन नीति और प्रवासी श्रमिकों की भूमिका पर बहस और भी गहराएगी।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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