क्या आप जानते है सबसे प्रलयंकारी भूकंप कब और कहा आया था ? जाने कितनी हुई थी पृथ्वी की तबाही
वर्ष 1038 में चीन के डिंगक्सियांग में आए विनाशकारी भूकंप की पूरी कहानी। सोंग राजवंश के दौरान आए इस 7.5 तीव्रता के भूकंप ने 32,300 लोगों की जान ली और पूरे शांक्सी प्रांत को खंडहर बना दिया। जानिए कैसे सम्राट रेनजोंग ने राहत कार्यों से साम्राज्य को संभाला और इस ऐतिहासिक आपदा ने चीन की वास्तुकला को कैसे हमेशा के लिए बदल दिया।

Dingxiang earthquake history : करीब एक हजार साल पहले, जब सोंग राजवंश की समृद्धि अपने चरम पर थी, तब कुदरत के एक क्रूर प्रहार ने चीन के इतिहास की दिशा बदल दी थी। 9 जनवरी, 1038 की वह सुबह डिंगक्सियांग और शिनझोऊ के निवासियों के लिए मौत का पैगाम लेकर आई थी। शांक्सी प्रांत की शांत वादियों में अचानक जमीन के भीतर से उठे एक भीषण कंपन ने देखते ही देखते पूरे क्षेत्र को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया। आधुनिक भू-वैज्ञानिकों का अनुमान है कि रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 7.25 से 7.5 के बीच रही होगी, जिसने न केवल घरों को गिराया बल्कि साम्राज्य की नींव तक हिला दी थी।
इस प्रलयंकारी आपदा में जनहानि का आंकड़ा रूह कंपा देने वाला था। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, इस भूकंप ने करीब 32,300 लोगों को मौत की नींद सुला दिया, जबकि 5,600 से अधिक नागरिक गंभीर रूप से घायल हुए। विनाश केवल इंसानों तक सीमित नहीं था; लगभग 50,000 मवेशी भी इस भूगर्भीय हलचल की भेंट चढ़ गए। डिंगक्सियांग का भूगोल पूरी तरह बदल चुका था, जहाँ भव्य मंदिर और सरकारी इमारतें जमींदोज हो गईं और जमीन पर मील लंबी दरारें दिखाई देने लगीं। भू-वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह तबाही 'फेनहे ग्रैबेन' फॉल्ट सिस्टम की सक्रियता का परिणाम थी, जिसके कारण हुए भूस्खलन ने बचे-कुचे जीवन को भी संकट में डाल दिया था।
तत्कालीन सम्राट रेनजोंग के शासनकाल में इस त्रासदी को एक राष्ट्रीय आपदा घोषित किया गया था। ऐतिहासिक ग्रंथ 'सोंग शी' (सोंग का इतिहास) में दर्ज साक्ष्यों के अनुसार, शाही दरबार ने इस संकट के समय में अत्यंत संवेदनशीलता का परिचय दिया था। प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत अभियान चलाए गए और जीवित बचे लोगों के पुनर्वास के लिए करों में भारी छूट दी गई। सम्राट के इन कदमों का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि जनता के बीच टूटे हुए विश्वास को दोबारा बहाल करना था।
आज भी शांक्सी प्रांत की वास्तुकला में इस भूकंप के निशान और उसके बाद किए गए पुनर्निर्माण की झलक साफ़ दिखाई देती है। डिंगक्सियांग का यह भूकंप हमें याद दिलाता है कि मानव सभ्यता कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, प्रकृति की प्रचंड शक्ति के सामने वह हमेशा बौनी ही रहती है। यह घटना केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं थी, बल्कि यह सोंग राजवंश के लचीलेपन और संकट प्रबंधन की एक ऐतिहासिक मिसाल भी है, जिसने सदियों तक चीनी समाज और उनकी निर्माण कला को प्रभावित किया।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
