स्टेशन पर इंतजार अब स्वाद के साथ ; KFC, Haldiram जैसे ब्रांड्स को मिली स्टेशन पे एंट्री
भारतीय रेलवे ने कैटरिंग नीति में बदलाव कर “प्रीमियम ब्रांड कैटरिंग आउटलेट्स” की शुरुआत की है। अब मैकडॉनल्ड्स, केएफसी, हल्दीराम जैसे बड़े ब्रांड रेलवे स्टेशनों पर आउटलेट खोल सकेंगे, जिससे यात्रियों को बेहतर और विश्वसनीय भोजन अनुभव मिलेगा।

भारतीय रेलवे का आधुनिकीकरण (रचनात्मक तस्वीर)
भारतीय रेलवे, जिसे देश की जीवनरेखा कहा जाता है, अब केवल यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि वह यात्रा के अनुभव को पूरी तरह बदलने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इसी क्रम में रेलवे ने अपनी कैटरिंग नीति में एक बड़ा और निर्णायक बदलाव करते हुए “प्रीमियम ब्रांड कैटरिंग आउटलेट्स” नाम से एक नई श्रेणी की शुरुआत की है। इस फैसले के बाद देश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर मैकडॉनल्ड्स, केएफसी, हल्दीराम, पिज़्ज़ा हट, बास्किन-रॉबिंस, वॉव मोमो जैसे बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के आउटलेट खुलने का रास्ता साफ हो गया है।
अब तक रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को सीमित विकल्पों और गुणवत्ता को लेकर अक्सर शिकायतें रहती थीं। बदलती जीवनशैली, बढ़ती अपेक्षाओं और यात्रियों की विशाल संख्या को देखते हुए रेलवे ने महसूस किया कि खानपान सेवाओं में भी आधुनिकता और विश्वसनीयता लाना आवश्यक है। नई नीति के तहत, प्रीमियम फूड ब्रांड्स को स्टेशन परिसर में निर्धारित स्थानों पर आउटलेट खोलने की अनुमति दी जाएगी, जिससे यात्रियों को साफ-सुथरे माहौल में परिचित और मानकीकृत भोजन उपलब्ध हो सकेगा।
इस नीति का एक अहम पहलू यह है कि इन आउटलेट्स का आवंटन पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। रेलवे ई-नीलामी के माध्यम से लाइसेंस देगा, जिससे प्रतिस्पर्धा बनी रहे और राजस्व में वृद्धि हो। आमतौर पर ये लाइसेंस पांच वर्षों की अवधि के लिए दिए जा सकते हैं, जिसमें प्रदर्शन और नियमों के अनुपालन के आधार पर आगे विस्तार की संभावना भी रहेगी। यह कदम रेलवे के गैर-किराया राजस्व को बढ़ाने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस फैसले से यात्रियों के अनुभव में गुणात्मक सुधार होगा। रोज़ाना करोड़ों लोग भारतीय रेलवे से सफर करते हैं और स्टेशन ऐसे स्थान होते हैं जहाँ यात्रियों का ठहराव स्वाभाविक रूप से अधिक होता है। ऐसे में भरोसेमंद ब्रांड्स की मौजूदगी न केवल भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करेगी, बल्कि स्टेशन परिसर की समग्र छवि को भी बेहतर बनाएगी।
आने वाले समय में, जैसे-जैसे देशभर में स्टेशन पुनर्विकास परियोजनाएं आगे बढ़ेंगी, इन प्रीमियम ब्रांड आउटलेट्स की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। खासतौर पर बड़े जंक्शन, पुनर्विकसित और आधुनिक सुविधाओं वाले स्टेशन इस पहल के पहले चरण में शामिल हो सकते हैं। रेलवे का लक्ष्य है कि 2026 से इन आउटलेट्स का संचालन चरणबद्ध तरीके से शुरू हो।
मुंबई जैसे महानगरों में इस नीति का प्रभाव और भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने की संभावना है। उपनगरीय रेलवे स्टेशनों पर विकसित किए जा रहे एलिवेटेड डेक और व्यावसायिक क्षेत्रों में ऐसे ब्रांडेड फूड आउटलेट्स यात्रियों को एक नया अनुभव दे सकते हैं। इससे न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि स्टेशन भी आधुनिक शहरी केंद्रों के रूप में विकसित होंगे।
कुल मिलाकर, रेलवे की यह नई पहल देश में सार्वजनिक परिवहन और उपभोक्ता अनुभव के बीच की दूरी को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह बदलाव संकेत देता है कि भारतीय रेलवे अब सिर्फ यात्रा नहीं, बल्कि एक संपूर्ण और आधुनिक अनुभव प्रदान करने की ओर अग्रसर है।
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Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
