रेलवे का नया नियम : रिटायरमेंट पर अब नहीं मिलेगा 'चांदी का मेडल'; क्या 20 साल पुरानी परंपरा होगी खत्म ?
भारतीय रेलवे में रिटायरमेंट पर मिलने वाले गोल्ड प्लेटेड चांदी के मेडल की 20 साल पुरानी परंपरा खत्म! भोपाल मंडल में सामने आए नकली मेडल घोटाले के बाद रेलवे बोर्ड ने लिया बड़ा फैसला। चांदी के नाम पर महज 0.23% शुद्धता मिलने से विभाग में हड़कंप। 31 जनवरी 2026 से रिटायर होने वाले कर्मचारियों को अब नहीं मिलेगा सम्मान का यह सिक्का। पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

Retirement Silver Medal Stop : भारतीय रेलवे के लाखों कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट का पल अब पहले जैसा नहीं रहेगा। वर्षों की निष्ठावान सेवा के बाद सम्मान के प्रतीक के रूप में मिलने वाला 'गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल' अब इतिहास का हिस्सा बन गया है। रेलवे बोर्ड ने एक सनसनीखेज फैसले में सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों को चांदी के सिक्के देने की दो दशक पुरानी परंपरा को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है। यह कदम उस वक्त उठाया गया है जब विभाग के भीतर एक बड़े मेडल घोटाले ने रेलवे की साख पर सवाल खड़े कर दिए थे।
परंपरा का अवसान: विदाई सम्मान पर 'ग्रहण'
रेलवे बोर्ड की प्रधान कार्यकारी निदेशक रेनू शर्मा द्वारा 28 जनवरी 2026 को जारी औपचारिक आदेश ने उस रवायत को खत्म कर दिया है जो मार्च 2006 में शुरू हुई थी। पिछले 20 वर्षों से, हर सेवानिवृत्त रेलकर्मी को विदाई के समय लगभग 20 ग्राम वजन का स्वर्ण मढ़ा चांदी का सिक्का दिया जाता था। यह केवल एक धातु का टुकड़ा नहीं, बल्कि जीवन भर की मेहनत का सम्मान माना जाता था।
घोटाले की परतें: चांदी के नाम पर 'तांबे' का खेल
इस कठोर निर्णय की जड़ें भोपाल मंडल में सामने आए एक शर्मनाक घोटाले में छिपी हैं। जांच के दौरान जो सच सामने आया, उसने रेल प्रशासन की नींद उड़ा दी:
- नकली मेडल का खुलासा: लैब टेस्टिंग में पाया गया कि कर्मचारियों को दिए गए कई मेडल नकली थे।
- नाममात्र की चांदी: जिन सिक्कों को 'चांदी का मेडल' कहा जा रहा था, उनमें चांदी की मात्रा महज 0.23 प्रतिशत पाई गई, जो तकनीकी रूप से शून्य के बराबर है।
- भ्रष्टाचार की जांच: मेडल आपूर्ति करने वाले वेंडर ने रेलवे की आंखों में धूल झोंककर शुद्ध चांदी की जगह घटिया धातुओं का मिश्रण खपा दिया।
विधिक कार्रवाई और आगामी प्रभाव :
रेलवे ने इस धोखाधड़ी को गंभीरता से लेते हुए संबंधित सप्लायर के खिलाफ FIR दर्ज कराई है और उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही:
- वर्तमान में रेलवे के पास मौजूद मेडल स्टॉक का उपयोग अब सेवानिवृत्ति उपहार के रूप में नहीं होगा।
- इन सिक्कों को अब अन्य प्रशासनिक या वैकल्पिक कार्यों के लिए डायवर्ट कर दिया जाएगा।
- यह नियम 31 जनवरी 2026 को रिटायर होने वाले कर्मचारियों से ही लागू हो जाएगा, यानी अब से विदाई समारोहों में मेडल नजर नहीं आएंगे।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
