भारतीय रेलवे ने पिछले 11 वर्षों में हाई-स्पीड ट्रैक की लंबाई को 31,445 किमी से बढ़ाकर 84,244 किमी तक पहुंचा दिया है। रेल मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अब देश के 80% रेल नेटवर्क पर हाई-स्पीड ट्रेनें दौड़ सकती हैं। सुरक्षा बाड़ और आधुनिक पटरियों के नवीनीकरण के साथ भारतीय रेल अब पहले से कहीं अधिक तेज और सुरक्षित हो गई है।

expansion of high speed railway infrastructure under modi government : भारतीय रेल की पटरियां अब केवल दो शहरों को जोड़ने का माध्यम नहीं रह गई हैं, बल्कि वे विकसित होते भारत की नई गति और आधुनिकता की कहानी बयां कर रही हैं। रेल मंत्रालय द्वारा रविवार को जारी किए गए ताजा आंकड़ों ने देश के बुनियादी ढांचे में आए एक क्रांतिकारी बदलाव को रेखांकित किया है। केंद्र सरकार के अनुसार, पिछले 11 वर्षों में भारत के हाई-स्पीड रेलवे ट्रैक नेटवर्क में भारी विस्तार हुआ है, जिसकी लंबाई 2014 के 31,445 किलोमीटर से बढ़कर अब 84,244 किलोमीटर के विशाल आंकड़े तक पहुंच गई है। यह वृद्धि केवल आंकड़ों की बाजीगरी नहीं, बल्कि भारतीय रेल के परिचालन में आए उस गुणात्मक सुधार का प्रमाण है, जिसने देश के कोने-कोने को तेज रफ्तार से जोड़ने का काम किया है।

मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इस समीक्षा अवधि के दौरान देश के कुल रेलवे ट्रैक नेटवर्क में हाई-स्पीड पटरियों की हिस्सेदारी में दोगुनी वृद्धि दर्ज की गई है। जहां पहले केवल 40 प्रतिशत ट्रैक ही उच्च गति वाली ट्रेनों के अनुकूल थे, वहीं अब यह बढ़कर 80 प्रतिशत हो गए हैं। रेलवे ने इस बदलाव के केंद्र में 'सुरक्षा' और 'विश्वसनीयता' को रखा है। ट्रैक इंफ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने के परिणामस्वरूप अब रेल संचालन पहले के मुकाबले कहीं अधिक सुरक्षित और तेज हो गया है। सरकार ने पटरियों के नवीनीकरण को एक मिशन मोड में लिया है, जिसके तहत वित्तीय वर्ष 2024-25 में 6,851 किलोमीटर पटरियों का कायाकल्प किया गया। यह सिलसिला यहीं नहीं रुका है; वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 7,500 किलोमीटर और आगामी वर्ष 2026-27 के लिए 7,900 किलोमीटर पटरियों के नवीनीकरण का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

तकनीकी बारीकियों की बात करें तो रेलवे ने ट्रेनों की सुचारू आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए 'थिक वेब स्विच' और 'वेल्डेबल सीएमएस क्रॉसिंग' जैसी उन्नत प्रणालियों को बड़े पैमाने पर स्थापित किया है। इसके साथ ही, उन खंडों पर जहां ट्रेनें 110 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से दौड़ती हैं, मवेशियों और बाहरी हस्तक्षेप को रोकने के लिए 15,000 किलोमीटर से अधिक सुरक्षा बाड़ (Fencing) लगाई जा चुकी है। ट्रैक की स्थिरता और यात्रियों की सुखद यात्रा के लिए गिट्टी की मशीनीकृत गहन स्क्रीनिंग का कार्य भी युद्ध स्तर पर जारी है। यह संपूर्ण प्रयास भारतीय रेलवे को वैश्विक मानकों के करीब ले जा रहा है। सरकार का यह दावा स्पष्ट करता है कि आगामी कुछ वर्षों में भारतीय रेल न केवल समय की पाबंद होगी, बल्कि सुरक्षा और रफ्तार के मामले में दुनिया के विकसित देशों को कड़ी टक्कर देगी।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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