स्वच्छता पखवाड़ा 2025 के तहत मध्य रेल के सोलापुर मंडल ने “स्वच्छ रेलगाड़ी, प्रसन्न यात्री” थीम को जीवंत करते हुए पिट लाइन से लेकर कोच तक सफाई का व्यापक अभियान चलाया। यात्रियों की सुविधा, स्वास्थ्य और संतुष्टि को केंद्र में रखकर मंडल ने स्वच्छता की नई मिसाल कायम की।


“स्वच्छ रेलगाड़ी, प्रसन्न यात्री” यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि यात्रियों को स्वच्छ और सुखद यात्रा अनुभव प्रदान करने की दिशा में मध्य रेल के सोलापुर मंडल की जीवंत प्रतिबद्धता का प्रतीक है। स्वच्छता पखवाड़ा 2025 के अंतर्गत 5 और 6 अक्टूबर को आयोजित गतिविधियों ने इस संकल्प को एक सशक्त रूप में सामने रखा, जहाँ रेलकर्मी और अधिकारी मिलकर पटरियों से लेकर पिट लाइन तक स्वच्छता को जीवन्त बना रहे थे।

पांच अक्टूबर को सोलापुर मंडल ने “स्वच्छ ट्रेन” थीम के तहत पूरे क्षेत्र में ट्रेनों का विस्तृत निरीक्षण अभियान चलाया। वरिष्ठ अनुभाग इंजीनियर (एसएसई) और मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक (सीएचआई) ने विभिन्न स्टेशनों पर ट्रेनों की सफाई व्यवस्था का बारीकी से मूल्यांकन किया। पंढरपुर, लातूर और हरंगुल जैसे प्रमुख स्टेशनों पर पंढरपुर–मैसूर एक्सप्रेस, लातूर–यशवंतपुर एक्सप्रेस, हरंगुल–पुणे एक्सप्रेस और लातूर–एलटीटी मुंबई एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों का गहन निरीक्षण किया गया। ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग सर्विस (ओबीएचएस) टीमों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई ताकि यात्रियों को यात्रा के दौरान स्वच्छ वातावरण मिल सके। निरीक्षण के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि सफाई के लिए आवश्यक सामग्री पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो और डिब्बों में कचरा प्रबंधन के सभी नियमों का पालन किया जा रहा हो।

अधिकारियों ने ओबीएचएस कर्मियों को यात्री संतुष्टि को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और सेवा मानकों में निरंतर सुधार के लिए प्रेरित किया। यात्रियों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से डिब्बों में “कूड़ा न फैलाएं” और “स्वच्छ रेलगाड़ी, प्रसन्न यात्री” जैसे संदेशों वाले पोस्टर लगाए गए। यह केवल एक स्वच्छता अभियान नहीं था, बल्कि यात्रियों और रेलकर्मियों के बीच साझा जिम्मेदारी का भाव जाग्रत करने का प्रयास भी था।

अगले दिन, छह अक्टूबर को, सोलापुर के पिट लाइन क्षेत्र में सफाई का एक और बड़ा अभियान चलाया गया। आधुनिक उपकरणों और मशीनीकृत साधनों की मदद से ट्रेनों की नीचे तक गहन सफाई की गई — एक ऐसा क्षेत्र जहाँ सामान्यतः यात्रियों की नजर नहीं पहुँचती, लेकिन जहाँ से स्वच्छ यात्रा की नींव रखी जाती है। इस दौरान सिद्धेश्वर एक्सप्रेस, हसन एक्सप्रेस, हुतात्मा एक्सप्रेस और वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनों की पिट लाइनों को विशेष रूप से साफ किया गया। वरिष्ठ इंजीनियरों ने सफाई कार्यों की निगरानी की ताकि प्रत्येक चरण में गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।

मंडल प्रशासन ने यात्रियों से सीधे फीडबैक एकत्र करने का भी निर्णय लिया। ओबीएचएस कर्मियों द्वारा वितरित फीडबैक फॉर्मों के माध्यम से यात्रियों ने अपने अनुभव साझा किए, जिससे सुधार के क्षेत्रों की पहचान की जा सके। यह प्रक्रिया न केवल पारदर्शिता बढ़ाने का एक तरीका थी, बल्कि यात्री संतोष को मापने का एक व्यावहारिक साधन भी।

सोलापुर मंडल के इन प्रयासों ने यह सिद्ध कर दिया कि स्वच्छता केवल एक प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि एक सतत संस्कृति है। रेल प्रशासन का ध्यान सिर्फ पिट लाइन या डिब्बों की सफाई तक सीमित नहीं था; उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि यात्रियों के बीच स्वच्छता के प्रति जागरूकता एक स्थायी व्यवहार बने। मंडल का यह अभियान “स्वच्छता ही सेवा” के व्यापक उद्देश्य के अनुरूप था, जिसमें प्रत्येक रेलकर्मी, सफाईकर्मी और यात्री को इस मिशन का सक्रिय भागीदार बनाया गया।

स्वच्छ रेलगाड़ी केवल एक पहल नहीं, बल्कि भारतीय रेल की उस नई सोच का प्रतीक है जो यात्रियों के अनुभव को प्राथमिकता देती है। सोलापुर मंडल ने इस दिशा में जिस अनुशासन और समर्पण के साथ काम किया, वह न केवल अन्य मंडलों के लिए प्रेरणास्रोत है, बल्कि इस तथ्य का प्रमाण भी कि जब स्वच्छता और सेवा एक साथ आती हैं, तो रेल यात्रा केवल गंतव्य तक पहुँचने का माध्यम नहीं, बल्कि गर्व और संतोष का अनुभव बन जाती है।

Updated On 8 Oct 2025 7:07 PM IST
Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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