कब और कैसे हुआ था गलवान बॅटल? जानिए 45 साल बाद भारत और चीन के बीच हुए टकराव का कारण
पूर्वी लद्दाख में 2020 से भारत–चीन सीमा पर जारी सैन्य तनाव, गलवान घाटी की हिंसक झड़प, पैंगोंग झील और एलएसी पर हुए टकराव, कूटनीतिक वार्ताओं और इसके रणनीतिक, राजनीतिक व आर्थिक प्रभावों की विस्तृत और तथ्यात्मक रिपोर्ट।

पूर्वी लद्दाख की दुर्गम और बर्फ से ढकी पहाड़ियों में मई 2020 में जो हलचल शुरू हुई, उसने भारत–चीन संबंधों को दशकों के सबसे गंभीर सैन्य तनाव के दौर में धकेल दिया। वास्तविक नियंत्रण रेखा, जिसे लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल कहा जाता है, के आसपास भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमने-सामने की झड़पें धीरे-धीरे एक बड़े सैन्य टकराव में बदलती चली गईं। यह केवल सीमाई विवाद नहीं था, बल्कि रणनीति, कूटनीति और शक्ति संतुलन की एक जटिल परीक्षा थी।
5 मई 2020 से लद्दाख के पैंगोंग झील क्षेत्र, गलवान घाटी और सिक्किम से सटे इलाकों में दोनों सेनाओं के बीच आक्रामक गश्त, हाथापाई और तनावपूर्ण आमने-सामने की घटनाएं सामने आने लगीं। मई के अंत में गलवान नदी घाटी में भारत द्वारा सड़क निर्माण पर चीनी आपत्ति ने हालात को और भड़का दिया। 15 और 16 जून 2020 की रात गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प ने इस टकराव को एक निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया, जिसमें दोनों पक्षों के सैनिकों की जान गई। यह घटना इसलिए भी ऐतिहासिक मानी गई क्योंकि दशकों से सीमा पर किसी सैनिक की मौत नहीं हुई थी।
इस संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। कुछ रिपोर्टों में सैनिकों को हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई, हालांकि आधिकारिक स्तर पर दोनों देशों ने इसकी पुष्टि से इनकार किया। सितंबर 2020 में हालात और गंभीर तब हो गए जब वास्तविक नियंत्रण रेखा पर 45 वर्षों में पहली बार गोलियों की आवाज सुनाई दी। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गोलीबारी के आरोप लगाए, जिससे सीमा पर बने हथियार न इस्तेमाल करने के पुराने समझौतों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो गए।
तनाव के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत का सिलसिला भी जारी रहा। जून और जुलाई 2020 में गलवान, हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा क्षेत्रों से आंशिक रूप से सैनिकों की वापसी हुई, जबकि फरवरी 2021 में पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी तट से पूर्ण रूप से पीछे हटने की प्रक्रिया पूरी की गई। अगस्त 2021 में गोगरा क्षेत्र से disengagement के बाद विश्लेषकों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा के पश्चिम की ओर खिसकने की आशंका भी जताई।
इस पूरे गतिरोध के दौरान भारत ने सीमा क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। लगभग 12 हजार अतिरिक्त कर्मियों को सीमा सड़क संगठन के तहत तैनात किया गया ताकि रणनीतिक सड़कों और अन्य परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की आक्रामकता का एक बड़ा कारण लद्दाख में बन रही दारबुक–श्योक–दौलत बेग ओल्डी सड़क परियोजना भी रही, जो भारत की रणनीतिक क्षमता को मजबूत करती है।
राजनीतिक स्तर पर भी इस टकराव के दूरगामी प्रभाव पड़े। अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त करने के भारत सरकार के फैसले को लेकर चीन पहले ही असहज था। गलवान घटना के बाद भारत में चीनी उत्पादों के बहिष्कार की मांग तेज हुई और आर्थिक मोर्चे पर भी सख्त कदम उठाए गए। नवंबर 2020 तक भारत सरकार ने 200 से अधिक चीनी मोबाइल ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया, जिसमें कई बड़े तकनीकी समूहों से जुड़े ऐप्स शामिल थे।
हालांकि, तमाम तनाव के बावजूद दोनों देशों ने यह दोहराया कि सीमा विवाद के समाधान के लिए द्विपक्षीय तंत्र मौजूद हैं। कोर कमांडर स्तर की बैठकों से लेकर विदेश और रक्षा मंत्रियों के संवाद तक, बातचीत के कई दौर चले। जनवरी 2022 में चुशूल-मोल्दो सीमा बैठक बिंदु पर 14वीं कोर कमांडर स्तरीय वार्ता इसी प्रयास का हिस्सा थी।
भारत–चीन सीमा विवाद का इतिहास लंबा और जटिल रहा है। 1962 और 1967 के युद्धों से लेकर डोकलाम गतिरोध तक, दोनों देशों के बीच अविश्वास की परतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। 2020 के बाद का यह टकराव केवल सैन्य नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक संदेश भी था कि हिमालय की ऊंचाइयों पर संतुलन बनाए रखना आने वाले वर्षों में भी एक बड़ी चुनौती बना रहेगा। लद्दाख की इन घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति केवल संवाद और सतर्कता के संतुलन से ही संभव है।
- लद्दाख भारत चीन सीमा विवाद 2020गलवान घाटी हिंसक झड़प 15 जून 2020पैंगोंग झील भारत चीन टकरावएलएसी पर गोलीबारी सितंबर 2020पूर्वी लद्दाख सैन्य तनावभारत चीन सैनिक झड़प लद्दाखIndia China Ladakh standoff 2020Galwan Valley clash detailed newsPangong Lake disengagement 2021Line of Actual Control India China conflictDoklam and Ladakh border tension analysisIndia China border infrastructure LadakhPLA Indian Army faceoff LadakhSino Indian border dispute Ladakh reportGalwan Battlebattle of galwangalwanSalman Khan Movie Battle of GalwanBattle Of Galwan Salman Khan Role

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
