त्रेतायुग का पिनाक अब आधुनिक काल में बनेगा दुश्मनों का काल ; जाने क्या है पिनाक धनुष्य और पिनाक रॉकेट का संबंध..
DRDO ने ओडिशा के चांदीपुर में पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (LRGR 120) का सफल परीक्षण किया। 120 किमी मारक क्षमता वाले इस रॉकेट का नाम भगवान शिव के दिव्य धनुष पिनाक से प्रेरित है। यह उपलब्धि भारत की सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक विरासत के संगम को दर्शाती है।

Pinaka long range guided rocket test DRDO hindi : त्रेतायुग में जिस दिव्य धनुष की टंकार से आसुरी शक्तियां कांप उठती थीं, उसी पिनाक की प्रतीकात्मक शक्ति आज आधुनिक भारत की सैन्य क्षमता में साकार होती दिखाई दे रही है। पौराणिक आस्था और अत्याधुनिक रक्षा तकनीक के अद्भुत संगम के रूप में भारत ने एक बार फिर अपनी रणनीतिक ताकत का परिचय दुनिया को कराया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट के सफल परीक्षण ने न केवल सैन्य दृष्टि से, बल्कि सांस्कृतिक प्रतीकात्मकता के स्तर पर भी एक गहरी छाप छोड़ी है।
डीआरडीओ ने ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (आईटीआर) में पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (LRGR 120) का पहला सफल परीक्षण कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस उन्नत रॉकेट की मारक क्षमता 120 किलोमीटर तक है, जो इसे भारतीय सेना के लिए एक अत्यंत प्रभावी हथियार बनाती है। परीक्षण के दौरान रॉकेट ने अपने सभी तकनीकी मानकों पर सटीक प्रदर्शन किया, जिससे इसकी विश्वसनीयता और सटीकता की पुष्टि हुई।
इस बढ़ी हुई रेंज के साथ पिनाका प्रणाली अब रणनीतिक रूप से कहीं अधिक सक्षम हो गई है। भारतीय सीमा के भीतर से यह प्रणाली पाकिस्तान के इस्लामाबाद, लाहौर और सियालकोट जैसे प्रमुख शहरों तक लक्ष्य भेदने की क्षमता रखती है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपलब्धि भारत की प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत करती है तथा क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन में एक अहम भूमिका निभाती है।
पिनाका रॉकेट सिस्टम का नाम भगवान शिव के दिव्य धनुष ‘पिनाक’ से लिया गया है, जो भारतीय पौराणिक परंपरा में विनाश के माध्यम से धर्म की रक्षा का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने इसी धनुष से त्रिपुरासुर नामक राक्षस का संहार किया था, जिसने अपने अत्याचारों से पूरे ब्रह्मांड को भयभीत कर रखा था। एक ही बाण से त्रिपुरासुर का वध कर शिव ने शांति और धर्म की स्थापना की थी, जिससे पिनाक शक्ति और न्याय का प्रतीक बन गया।
पौराणिक मान्यताओं में पिनाक की यात्रा यहीं समाप्त नहीं होती। त्रिपुरासुर वध के बाद यह दिव्य धनुष राजा जनक के पूर्वज देवरात को प्राप्त हुआ और मिथिला में सुरक्षित रखा गया। कालांतर में यही धनुष सीता स्वयंवर का केंद्र बना, जहां भगवान श्रीराम ने इसे उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाते समय तोड़ दिया। यह घटना श्रीराम की दिव्यता, सामर्थ्य और धर्म के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक मानी जाती है।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, पिनाक का निर्माण स्वयं विश्वकर्मा ने किया था और भगवान शिव का एक नाम ‘पिनाकी’ भी इसी कारण पड़ा। यह धनुष इतना भारी और शक्तिशाली था कि देवता भी इसे हिला नहीं सकते थे। इसी पौराणिक महत्व को आधुनिक भारत ने अपनी रक्षा प्रणाली में आत्मसात किया है, जहां पिनाका केवल एक हथियार नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रतीक बनकर उभरा है।
डीआरडीओ द्वारा पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का सफल परीक्षण इस बात का संकेत है कि भारत न केवल तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बन रहा है, बल्कि अपनी सभ्यतागत चेतना को भी आधुनिक सैन्य शक्ति के साथ जोड़ रहा है। यह उपलब्धि आने वाले समय में भारत की रक्षा तैयारियों को नई मजबूती देने के साथ-साथ उसकी वैश्विक रणनीतिक स्थिति को भी और सुदृढ़ करने वाली मानी जा रही है।
(इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। pratahkal.com इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
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Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
