सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने चीन सीमा (LAC) पर मौजूदा हालात को 'स्थिर लेकिन संवेदनशील' बताया है। जानें भारतीय सेना की तैयारी, निगरानी तंत्र और सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए उठाए जा रहे कड़े कदम।

नई दिल्ली | 17 फरवरी, 2026

भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर मौजूदा सुरक्षा स्थितियों को लेकर देश के सामने एक महत्वपूर्ण और संतुलित तस्वीर पेश की है। सेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि हालांकि चीन के साथ उत्तरी सीमा पर हालात फिलहाल 'स्थिर' (Stable) हैं, लेकिन इसे किसी भी तरह से हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने इस स्थिति को 'संवेदनशील' (Sensitive) करार देते हुए भारतीय सेना की 'सतर्कता' पर विशेष जोर दिया है।

'स्थिर' लेकिन 'सतर्क': क्या हैं इसके मायने?

सेना प्रमुख का 'स्थिर' शब्द इस्तेमाल करने का अर्थ है कि सीमा पर फिलहाल कोई बड़ी हिंसक झड़प या आमने-सामने का टकराव नहीं हो रहा है। दोनों सेनाएं अपने-अपने निर्धारित क्षेत्रों में जमी हुई हैं। लेकिन, 'संवेदनशील' शब्द यह याद दिलाता है कि सीमा पर बुनियादी ढांचे का निर्माण और सैनिकों की भारी तैनाती अभी भी बनी हुई है, जिससे स्थिति कभी भी बदल सकती है।

जनरल द्विवेदी ने कहा, "हमारा उद्देश्य शांति बनाए रखना है, लेकिन यह शांति हमारी संप्रभुता की कीमत पर नहीं होगी। भारतीय सेना हर उस गतिविधि पर नजर रख रही है जो एलएसी की यथास्थिति को बदलने की कोशिश कर सकती है।"

निगरानी तंत्र (Surveillance) का सुदृढ़ीकरण

सेना प्रमुख के बयान की सबसे बड़ी बात तकनीक और निगरानी को लेकर थी। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना ने अपनी 'आंखें और कान' यानी निगरानी प्रतिष्ठानों को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत कर लिया है।

• हाई-टेक सेंसर्स: सीमा के ऊंचे पहाड़ों पर ऐसे सेंसर्स लगाए गए हैं जो खराब मौसम और घने कोहरे में भी दुश्मन की हरकत को पकड़ सकते हैं।

• ड्रोन पेट्रोलिंग: 24 घंटे चलने वाली ड्रोन निगरानी के जरिए एलएसी के पार हो रहे निर्माण कार्यों और सैन्य आवाजाही का रीयल-टाइम डेटा इकट्ठा किया जा रहा है।

• सैटेलाइट इमेजिंग: अंतरिक्ष से मिलने वाली तस्वीरों के जरिए चीन के सैन्य बेस और बुनियादी ढांचे के विस्तार पर बारीक नजर रखी जा रही है।


सैन्य तैनाती और रसद की तैयारी

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने यह भी स्पष्ट किया कि सर्दियों के इस मौसम में भी भारतीय सैनिकों की तैनाती में कोई कमी नहीं की गई है। 'मिरर डिप्लॉयमेंट' (दुश्मन के बराबर तैनाती) की नीति के तहत भारतीय सेना पूरी तरह मुस्तैद है।

• लॉजिस्टिक्स: बर्फबारी और दुर्गम रास्तों के बावजूद सेना के पास रसद, ईंधन और आधुनिक हथियारों का पर्याप्त भंडार है।

• त्वरित प्रतिक्रिया: किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में सेना के 'क्विक रिएक्शन फोर्स' (QRF) को कुछ ही मिनटों में मोर्चे पर पहुंचने के लिए प्रशिक्षित किया गया है।


कूटनीति और सैन्य वार्ता का रास्ता

सेना प्रमुख ने इस बात पर भी बल दिया कि भारत शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। सैन्य कमांडर स्तर की वार्ताएं लगातार जारी हैं।

• बफर जोन और डिसइंगेजमेंट: कई विवादित बिंदुओं से पीछे हटने की प्रक्रिया (Disengagement) पर चर्चा जारी है।

• भरोसा बहाली: दोनों देशों के बीच स्थानीय कमांडरों के स्तर पर 'हॉटलाइन' और मीटिंग्स के जरिए तनाव कम करने की कोशिशें की जा रही हैं, ताकि छोटी-मोटी गलतफहमी किसी बड़े विवाद का रूप न ले ले।


मुख्य बिंदु: सेना प्रमुख के संबोधन का सारांश

विषय सेना की स्थिति

सीमा की स्थिति स्थिर लेकिन अत्यधिक संवेदनशील

निगरानी रडार, ड्रोन और सेंसर्स के जरिए 24/7 मॉनिटरिंग

रणनीति 'सतर्कता' और 'त्वरित प्रतिक्रिया' पर आधारित

उद्देश्य एलएसी पर अप्रैल 2020 से पहले की यथास्थिति बहाल करना

सतर्कता ही सुरक्षा है

सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का यह बयान देश को आश्वस्त करने वाला है कि सीमाएं सुरक्षित हाथों में हैं। "स्थिरता" के बावजूद "सतर्कता" को प्राथमिकता देना यह दर्शाता है कि भारतीय सेना अब किसी भी तरह की सरप्राइज गतिविधि के लिए तैयार नहीं है। चीन की तरफ से होने वाले किसी भी निर्माण या सैन्य जमावड़े का जवाब देने के लिए भारत ने अपना 'डिफेंस इन्फ्रास्ट्रक्चर' और 'इंटेलिजेंस नेटवर्क' अभेद्य बना लिया है।

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